बिजनेस स्टैंडर्ड - 'कृषि जिंसों के लिए हों लाभकारी मूल्य'
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'कृषि जिंसों के लिए हों लाभकारी मूल्य'

अभिजित लेले /  12 19, 2017

बीएस बातचीत

भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार चाहते हैं कि कृषि जिंसों के मूल्य को शीर्ष प्राथमिकता दी जाए। अभिजित लेले के साथ बातचीत में उन्होंने विभिन्न मसलों पर राय रखी। पेश है बातचीत के मुख्य अंश :

बिजनेस स्टैंडर्ड

पांच तिमाही तक नरमी के बाद चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है। क्या कर्ज की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है? 

अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है। दिसंबर से लेकर मार्च तक व्यस्त सीजन रहेगा और  इस दौरान निश्चित तौर पर कर्ज उठाव में तेजी आएगी। लेकिन कर्ज की मांग में वृद्घि मुख्य रूप से खपत पर निर्भर करेगी। 

लघु एवं सूक्ष्म उपक्रमों की ओर से कैसा अनुभव रहा है?

एसबीआई की बात करें तो अक्टूबर की तुलना में नवंबर में कर्ज उठाव की दर बेहतर रही है। अगले चार महीनों में एमएसएमई क्षेत्र के ऋण आवंटन में वृद्घि होगी। 

क्या जीएसटी से एमएसएमई को कर्ज लेने में आसानी हुई है?

ऐसा कहा जा सकता है। हमने एसएमई क्षेत्र को ऋण देने के लिए कई कदम उठाए हैं। जीएसटी ने हमें कर्जदारों की नकदी प्रवाह का आकलन करने में सक्षम बनाया है। सभी प्रस्तावों को नकदी प्रवाह के आधार पर प्रोसेस किया जा रहा है।

पिछले दो वर्षों में कृषि उत्पादों को उचित मूल्य देने के मसले को पीछे रखा गया है। क्या इससे किसानों की कर्ज चुकाने की क्षमता भी प्रभावित होती है?

निश्चित तौर पर इसमें संतुलन होना चाहिए। किसानों की लागत बढ़ गई है, ऐसे में न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी इजाफा होना चाहिए। अगर कोई श्रम और पैसा लगाता है तो उसे उचित रिटर्न मिलना ही चाहिए। हम उद्योग के लिए इक्विटी रिटर्न पर काफी बात करते हैं। लेकिन हमें कृषि क्षेत्र के बारे में भी गंभीरता से विचार करना चाहिए। 

एमएसपी में बदलाव ही पर्याप्त होगा?

कृषि क्षेत्र की गहन समीक्षा की जरूरत है। एक विशेषज्ञ समिति इस मसले पर गौर करते हुए देख सकती है कि आमदनी और कृषि उत्पादकता में कैसे सुधार हो सकता है। उत्पादकता बढऩे से किसानों को फायदा होगा। उन्हें उनके श्रम, पूंजी और समय लगाने के लिए उचित कीमत मिलनी जरूरी है। 

एनसीएलटी में भेजे गए बड़े फंसे कर्जों के मामले में प्रावधान की जरूरतों को लेकर आपका क्या आकलन है? क्या किसी एक क्षेत्र मसलन स्टील के लिए ज्यादा प्रावधान से दूसरे मामलों की क्षतिपूर्ति की जरूरतों में मदद मिल सकती है? 

हम पोर्टफोलियो के आधार पर प्रावधान पर विचार करते हैं। कुछ खाते के लिए हमें ज्यादा प्रावधान की जरूरत हो सकती है जबकि कुछ में कम की। कुछ खाते के लिए हम 90-100 फीसदी प्रावधान रख रहे हैं लेकिन रिकवरी 30-35 फीसदी के दायरे में हो सकती है। कुछ मामलों में पोर्टफोलियो के मूल्य में फिर से बढ़ोतरी भी हो सकती है। एक बार अगर हमने 55 फीसदी प्रावधान स्तर को हासिल कर लिया तो हम अनुमानित घाटे को सहने की स्थिति में होंगे।

कुछ बड़े फंसे कर्ज मामलों में मौजूदा वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में क्या हम रिकवरी की उम्मीद कर सकते हैं खासतौर पर वे मामले जो एनसीएलटी में गए हैं?

कुछ मामले में समाधान जरूर होगा। कुछ मामले में यह चौथी तिमाही या इसके बाद की तिमाही में हो सकता है क्योंकि अगर हम एक समाधान योजना रखते हैं तो पूरी प्रक्रिया संपन्न होने में वक्त लगता है। हमारी कोशिश मार्च 2018 के अंत में समाधान योजना पर अमल करने की है। 

आरबीआई की दूसरी सूची में शामिल ज्यादातर खाते को न्यायाधिकरण में भेजा गया है ऐसे में क्या एसबीआई कुछ और मामले दिवालिया कानून के तहत एनसीएलटी में भेजेगा?

अब यह सामान्य प्रक्रिया है। जब भी किसी खाते के कर्ज के फंसने के संकेत मिलते हैं तब हमें यह फैसला करना होता है कि हम इस मामले को एनसीएलटी में भेजे या फिर इसके बाहर रिकवरी की कोशिश करें या फिर एक बार निपटान करें। हमें सबसे बेहतरीन विकल्प पर विचार करना होता है। जहां पर समाधान दिवालिया कानून के मुताबिक हो सकता है हम उसके लिए उस मामले को न्यायाधिकरण में भेजेंगे। 

सहयोगी बैंकों के विलय के प्रभाव से बैंकों के कुल एनपीए में पहली तिमाही की बढ़ोतरी के बाद दूसरी तिमाही में गिरावट देखी गई। क्या गिरावट का रुझान बरकरार रहते हुए फीसदी के लिहाज से यह एकल अंक तक पहुंच सकता है? 

हमें सकल एनपीए और पुनर्गठित अग्रिम कर्ज को एक साथ देखना होगा। दोनों को एक साथ रखने पर मुझे उम्मीद है कि सुधार के संकेत मिलेंगे। मिली-जुली संख्या के एकल अंक में आने में अभी वक्त लगेगा क्योंकि कर्ज का दायरा बढ़ नहीं रहा है। 

कुछ वक्त के लिए ऋण पोर्टफोलियो का आकार कमोबेश स्थिर ही रहा है। अगर कुल फीसदी में गिरावट आती है तो यह आंकड़ा भी ऊपर जा सकता है। मौजूदा स्तर पर (सितंबर 2017 के अंत में 11.63 फीसदी) पर फंसे कर्जों में  बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है। जैसे जैसे एनसीएलटी में भेजे गए मामलों का समाधान होता रहेगा उसी आधार पर दो-तीन तिमाही कम होनी शुरू हो जाएगी। हम समाधान के चरण में हैं क्योंकि फंसे कर्जों के पहचान का चरण कमोबेश खत्म हो चुका है।

Keyword: agriculture, commodities, sbi, भारतीय स्टेट बैंक, एसबीआई, कृषि जिंस,
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