बिजनेस स?टैंडर?ड - गुजरात रहा पास, हिमाचल भी आया हाथ
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गुजरात रहा पास, हिमाचल भी आया हाथ

अर्चिस मोहन / नई दिल्ली 12 18, 2017

चुनावी परिणाम

► भाजपा ने लगातार छठी बार गुजरात में सरकार बनाई
► मोदी ने कहा, दोनों राज्यों में जीत का कारण 'सुशासन तथा विकास' की राजनीति
► कांग्रेस को पहले से अधिक सीटें मिली और मत प्रतिशत भी सुधरा 

बिजनेस स?टैंडर?ड गुजरात रहा पास, हिमाचल भी आया हाथपिछले करीब ढाई महीने से सुर्खियों में रहे गुजरात विधानसभा चुनावों के नतीजे आज आए तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राहत की सांस ली क्योंकि लगातार छठी बार राज्य में उसकी सरकार बन गई। गुजरात ने उसे राहत दी तो हिमाचल प्रदेश ने खुश होने का पूरा मौका दिया क्योंकि पार्टी ने वह राज्य भी कांग्रेस के हाथ से छीन लिया।  गुजरात में भारतीय जनता पार्टी को 182 सदस्यीय विधासभा में 99 सीटें मिलीं। हिमाचल प्रदेश की 68 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी को 44 सीटें मिली हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दोनों राज्यों में जीत का कारण 'सुशासन तथा विकास' की राजनीति है। जब यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी आराम से सरकार बनाने जा रही है तो प्रधानमंत्री ने कहा कि देश 'सुधार, प्रदर्शन और कायाकल्प' (रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म) के लिए तैयार है। उन्होंने इसे 'असाधारण' जीत बताया, जो कड़ी चुनौतियों के बीच मिली है।

 हालांकि गुजरात में भाजपा का प्रदर्शन 2012 के मुकाबले खासा फीका रहा। उस वर्ष पार्टी ने 115 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार आंकड़ा 100 तक भी नहीं पहुंच पाया। 

भाजपा मुख्यालय में यहां अपने भाषण में मोदी ने कहा कि 'विकास' ही भाजपा का मंत्र है और उन्होंने पार्टी समर्थकों से विकास की जीत का नारा लगाने के लिए कहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये जीत उन्हें करारा जवाब हैं, जिन्हें लगता था कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) चुनावों में भाजपा के लिए दिक्कत पैदा करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने एक बार फिर गुजरात की राजनीति में 'जातिवाद का जहर' घोल दिया है।

भाजपा ने गुजरात में नोटबंदी और जीएसटी के कारण शहरों में पनपे असंतोष से पार पाते हुए अपने मत प्रतिशत में इजाफा किया। लेकिन उसे 1995 के बाद से सबसे कम सीटें हासिल हुईं। नतीजों से यह बात भी सामने आ गई कि स्वयं प्रधानमंत्री के गढ़ और गृहराज्य में पार्टी कई दरारों से जूझ रही है। भाजपा ने शहरी क्षेत्रों में तो शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन पगडंडियों पर कांग्रेस काबिज हो गई, जिससे पता चलता है कि किसानों के असंतोष ने 150 सीट जीतने के भाजपा के सपने को कितनी करारी चोट पहुंचाई।

गुजरात में भाजपा को अगर जीत मिली है तो उसका सेहरा भी प्रधानमंत्री के सिर ही बांधा जाएगा, जिन्होंने प्रचार अभियान के आखिरी दस दिनों में एक के बाद एक जनसभाएं की थीं। जहां तक कांग्रेस का सवाल है तो उसे पहले से अधिक सीटें मिली हैं और उसका मत प्रतिशत भी पहले से सुधरा है। 2018 में कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले ये दोनों बातें पार्टी का और समूचे विपक्ष का मनोबल जरूर बढ़ाएंगी।

चुनावी नतीजों का असर संसद में मोदी सरकार के विधायी एजेंडा तथा नीतियों पर भी पड़ सकता है और अपने बाकी कार्यकाल में सरकार कृषि क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान दे सकती है। प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाए जा सकते हैं और मनरेगा के लिए बजट आवंटन भी बढ़ सकता है। साथ ही मोदी सरकार को शहरी क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने के उपाय भी करने होंगे। 

संसद में सरकार को राहुल गांधी के पीछे खड़ी अधिक आक्रामक कांग्रेस से जूझना पड़ सकता है। मोदी सरकार के विनिवेश तथा श्रम सुधारों के खिलाफ फरवरी में राष्टरव्यापी हड़ताल करने की धमकी श्रमिक संगठन पहले ही दे चुके हैं। 2019 के आम चुनावों से पहले होने वाले विधानसभा चुनावों में सियासी खींचतान जोरों पर रहने का अंदेशा है। मार्च तक मेघालय, त्रिपुरा और नगालैंड में, मई तक कर्नाटक में और दिसंबर तक छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं मिजोरम में विधानसभा चुनाव होने हैं। गुजरात में भाजपा की नई सरकार के सामने भी मुश्किलें कम नहीं होंगी क्योंकि पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने आंदोलन फिर शुरू करने का ऐलान कर दिया है।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में गुजरात की जीत को 'असाधारण' बताया और दोनों राज्यों मिली जीत का श्रेय पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की मेहनत को दिया। कांग्रेस ने हार तो स्वीकार की, लेकिन वरिष्ठ पार्टी नेता अशोक गहलोत ने कहा कि भाजपा युवाओं के रोजगार, कृषि संकट और भ्रष्टचार जैसे मुद्दों का जवाब नहीं दे पाई। मोदी ने पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वïवान किया कि 2022 तक भारत को संपन्न बनाने के लिए काम किया जाए।

उन्होंने कहा कि गुजरात में जीत उनके लिए खास है क्योंकि साढ़े तीन साल पहले उनके गुजरात से चले आने के बाद भी वहां जीत हासिल की गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के अलावा ढेरों ऐसी ताकतें हैं, जो गुजरात में भाजपा की हार के लिए एकजुट हो गईं। भाजपा अध्यक्ष शाह ने कहा कि अब 14 राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं और पांच राज्यों में उसकी गठबंधन सरकार है। उधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुजरात के मतदाताओं की तारीफ करते हुए कहा कि 2019 के लिए उन्होंने 'बिल्ली के गले में घंटी बांध' दी है। माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखिया सीताराम येचुरी ने कहा कि भाजपा का मुकाबला करने के लिए विपक्ष की अधिक से अधिक ताकतें एक वैकल्पिक मंच पर आएं ताकि घृणा फैलाने वाली पार्टी को नेस्तनाबूद किया जा सके।

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