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डिजिटल भुगतान में परेशान? क्या हो समाधान

तिनेश भसीन /  December 17, 2017

भारत में भुगतान के क्षेत्र में काफी उलटफेर हो रहा है। करीब एक साल पहले की गई नोटबंदी के बाद बैंक और ई-वॉलेट दोनों काफी आक्रामक तरीके से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दे रहे हैं। साथ ही नकद लेनदेन करने वाले कई लोग अब डिजिटल की ओर मुखातिब हो चुके हैं। हालांकि यह आसान नहीं है। यह सही है कि सब कुछ महज 'एक क्लिक' या 'एक स्कैन' पर होना अच्छा लगता है लेकिन इसमें कई मसले भी हैं। डिजिटल भुगतान प्रणाली से जुड़ रहे नए लोगों को कई दिक्कतें भी हो सकती हैं जैसे किसी और के खाते में रकम चली जाए या लेन-देन ही पूरा न हो पाए यानी फेल हो जाए। मुंबई के 30 वर्षीय सॉफ्टवेयर डेवलपर रमन मासुरकर को ही लीजिए। उन्होंने मुंबई में अपने एक दोस्त के खाते में रकम डालने के बजाय मनाली में उसी नाम के एक होटल को रकम हस्तांतरित कर दी। जब वह अपने बैंक गए तो उन्हें बताया गया कि बैंक कुछ नहीं कर सकता लेकिन अगर वह लिखित शिकायत देंगे तो लाभार्थी बैंक से बात करेंगे। मासुरकर कहते हैं, 'शुक्रगुजार कि होटल मालिक ने तीन दिन बाद रकम मेरे खाते में हस्तांतरित कर दी।' बैंकिंग नियामक ने भले ही यह कहा हो कि सभी तरह के गलत लेनदेन के लिए खाताधारक खुद जिम्मेदार होंगे, लेकिन अच्छी बात यह है कि तमाम बैंक, वॉलेट एवं कार्ड कंपनियां ऐसे मामलों में ग्राहकों की मदद कर रही हैं। लेकिन लेनदेन विफल रहने के मामले में जब रकम वापस नहीं आती तो ग्राहक को समस्या हल होने तक बैंक या वॉलेट कंपनी के पीछे लगे रहना होता है।

 
शुरुआती हिचक
 
भुगतान की दुनिया में इतनी तेजी से बदलाव हो रहे हैं कि इसे पसंद करने वाले लोग भी इसकी रफ्तार के साथ कदमताल नहीं कर पाते। हाल में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वॉलेट कंपनियों को यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के इस्तेमाल की अनुमति दी है। इससे ग्राहक एक वॉलेट से दूसरे में रकम हस्तांतरित कर सकेंगे। नैशनल पेमेंट्ïस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) यूपीआई 2.0 पर काम कर रहा है। यूपीआई 2.0 में स्थायी निर्देश एवं क्विक रिस्पांस कोड जैसी नई सुविधाएं होंगी। 
 
गूगल एवं बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में डिजिटल भुगतान उद्योग के वर्ष 2020 तक 500 अरब डॉलर अथवा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 15 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है। यह पिछले साल के मुकाबले करीब 10 गुना ज्यादा है। पेमेंट्ïस गेटवे कंपनी इंस्टामोजो के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) संपद स्वैन कहते हैं, 'भुगतान जगत फिलहाल अभी छोटा है। इसमें जोरदार उछाल हाल में आया है। नई तकनीक के लगातार आने और लेन-देन की संख्या बढऩे से मौजूदा कंपनियों को अपनी व्यवस्था एवं बुनियादी ढांचे को लगातार बेहतर करने की जरूरत होगी। जो कंपनियां पुरानी व्यवस्था के साथ काम करती रहेंगी, उनके ग्राहकों को भुगतान तालमेल की समस्या से जूझना पड़ेगा।'
 
दूसरे को पैसा चला जाए
 
यदि आप नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं और मासुरकर की तरह किसी गलत लाभार्थी के खाते में रकम भेज देते हैं तो तत्काल बैंक को ई-मेल करें। बैंक को संबंधित खातों की जानकारी देते हुए अपनी समस्या बताएं। साथ ही उसी पत्र के साथ बैंक शाखा जाएं और प्रबंधक से मुलाकात करें। फेडरल बैंक में डिजिटल प्रमुख जितेश पीवी ने बताते हैं, 'लिखित आग्रह के अलावा ग्राहक को भविष्य में विवाद की सूरत में एक वचनपत्र भी देना होगा।' उसके बाद रकम हस्तांतरित करने वाला बैंक रकम प्राप्तकर्ता बैंक से संपर्क करेगा और रकम वापसी के लिए आग्रह करेगा। जब प्राप्तकर्ता यह पुष्टि करता है कि रकम गलत हस्तांतरित हो गई है और वह रकम वापस करने के लिए सहमति जता देता है तभी रकम भेजने वाले को अपना पैसा वापस मिल पाता है। द मोबाइल वॉलेट के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक विनय कलंत्री के अनुसार मोबाइल वॉलेट के जरिये अगर गलत हस्तांतरण हो जाए तो भी ग्राहक को यही प्रक्रिया अपनानी पड़ती है।

लेनदेन विफल, पैसा फंसा
 
लेनदेन का विफल होना कोई दुर्लभ बात नहीं है। आम तौर पर इसकी वजह इंटरनेट कनेक्टिविटी होती है। ऐसे मामलों में 48 घंटे के भीतर खाते में रकम वापस आ जानी चाहिए। लेकिन कई मामलों में रकम की वापसी में देरी हो जाती है। कोलकाता के अनिरुद्ध रॉय एक फिल्म का ऑनलाइन टिकट खरीद रहे थे लेकिन अंतिम समय में जब वह पुष्टिï के लिए मैसेज का इंतजार कर रहे थे तो पता चला कि उनका लेनदेन पूरा नहीं हो सका। हालांकि बैंक ने मैसेज भेज दिया कि लेनदेन सफल रहा। लेकिन दो दिन बाद जब रकम वापस नहीं आई तो उन्होंने बैंक से संपर्क किया। रॉय कहते हैं, 'बैंक से लगातार संपर्क करने के बावजूद रकम वापस लेने तीन सप्ताह से अधिक लग गए।' हालांकि ऐसे मामले कभी-कभार ही होते हैं लेकिन ऐसा होता है। कलंत्री कहते हैं, 'कुछ मामलों में बैंक अथवा वॉलेट कंपनी को भुगतान के मिलान के लिए व्यापारियों का इंतजार करना पड़ता है जिसमें समय लग सकता है। व्यापारी जब तक मिलान नहीं कर दे, बैंक या वॉलेट कंपनी लेनदेन को उलट नहीं सकती।' रकम वापस पाने के लिए बैंक अथवा मोबाइल वॉलेट के साथ लगातार संपर्क में रहने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। 
 
स्वैन कहते हैं, 'भुगतान प्रणाली में यह पता लगाना असंभव नहीं कि समस्या कहां पर है। लेकिन बैंक, कार्ड अथवा वॉलेट कंपनियों को तेजी से समाधान के लिए सक्रियतापूर्वक मामले को निपटाने की जरूरत है।' एटीएम मशीन से रकम नहीं निकलने के मामले में पैसा वापस पाने में सात कार्यदिवस से भी अधिक का समय लग जाता है। रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार अगर इसमें अधिक समय लगता है तो बैंक को 100 रुपये प्रति दिन के हिसाब से भुगतान करना पड़ेगा।
 
जहां वापसी संभव नहीं  
 
यदि आपसे कोई गलती हुई है तो बैंक आपकी मदद कर सकता है। लेकिन वस्तुओं अथवा सेवाओं को लेकर ग्राहक के विवाद के कारण यदि कोई व्यक्ति रकम की वापसी चाहता है तो फिर लेन-देन को उलटना संभव नहीं है। किसी व्यापारी के साथ लेनदेन करते समय यदि आप कोई गलती कर देते हैं तो भी रकम की वापसी संभव नहीं है। बैंक, वॉलेट और क्रेडिट कार्ड कंपनियों सभी का यही नियम है। एसबीआई कार्ड के सीईओ विजय जसूजा कहते हैं, 'किसी अधिकृत लेनदेन को कार्ड जारीकर्ता द्वारा रद्द नहीं किया जा सकता। अगर किसी ग्राहक ने कोई लेनदेन नहीं किया और उसका पैसा चला जाता है तो उसे तुरंत ही कार्ड जारीकर्ता से संपर्क करके अपना कार्ड ब्लॉक करा देना चाहिए और मामले को उठाना चाहिए।' यदि आप मोबाइल रीचार्ज करते समय 100 रुपये की जगह 1,000 रुपये हस्तांतरित कर देते हैं या गलत मोबाइल नंबर लिख देते हैं तो आपको रकम वापस नहीं मिलेगी। कार्ड से लेनदेन करते समय कई बार लेनदेन पूरा नहीं होता लेकिन कार्डधारक के पास यह एसएमएस आ जाता है कि खाते से रकम निकल गई है। ऐसे में व्यापारी कार्ड को दोबारा स्वाइप कर सकते हैं। ऐसे अधिकांश मामलों में विफल रहने वाले लेनदेन से संबंधित रकम आठ दिन के भीतर वापस आ जाती है। 
Keyword: digital, payment,,
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