बिजनेस स्टैंडर्ड - डूआर्स चाय : फिर निर्यात की आस
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डूआर्स चाय : फिर निर्यात की आस

अभिषेक रक्षित / कोलकाता December 17, 2017

डूआर्स चाय का निर्यात 27 साल बाद फिर से शुरू हो सकता है। चाय उत्पादक इसकी ब्रांडिंग के लिए नए सिरे से प्रयास कर रहे हैं। डूआर्स चाय को करीब 3 दशक पहले केन्या और दूसरे देशों के हाथों अपना अंतरराष्ट्रीय बाजार गंवाना पड़ा था। डूआर्स का खोया बाजार हासिल करने के लिए इंडियन टी एसोसिएशन (आईटीए) ने एक प्रस्ताव तैयार किया है। इसके मुताबिक डूआर्स क्षेत्र के कुल 290 बागानों में से 10 की पहचान की गई है जो दुआर्स रोबस्टा नाम से अपने उत्पाद को ब्रांड करेंगे। चाय की पैकेजिंग के लिए चाय बोर्ड के असम और डूआर्स लोगो को फिर से डिजाइन किया जाएगा। इससे ने केवल चाय की बेहतर कीमतें मिलने में मदद मिलेगी बल्कि भारतीय चाय की विभिन्न किस्मों की ब्रांडिंग में भी फायदा मिलेगा।

 
आईटीए के अध्यक्ष आजम मोनम ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, 'हमें विशिष्टï बागानों को बढ़ावा देने की जरूरत है जो उच्च गुणवत्ता वाली चाय पैदा करते हैं। इससे न केवल इन बागानों की चाय की कीमत में सुधार होगा बल्कि इससे विदेशी खरीदारों में भी यह संदेश जाएगा कि इन बागानों में अच्छी गुणवत्ता की चाय पैदा होती है।' इन विशिष्टï बागानों को ट्रस्ट टी की अनुपालन जरूरतों को पूरा करना होगा। इनसे यह सुनिश्चित होता है कि किसी बागान की चाय विशेष गुणवत्ता वाली है और यह उत्पादन, नैतिक और श्रम कल्याण संबंधी मानकों को पूरा करती है। पौधों के सुरक्षा कोड के बारे में पर्यावरणीय प्रमाणन और उत्पादन की जैविक प्रकृति का आश्वासन भी पूर्व शर्त है। 
 
आईटीए के मुताबिक चुनिंदा बागानों का इस तरह दुआर्स रोबस्टा के रूप में प्रचार किसी खास देश के लिए नहीं होगा बल्कि इसका मकसद दुनियाभर में महंगे टी बुटीक, पंचसितारा केटरिंग, आवाभगत संस्थाओं और ड्यूटी फ्री एयरपोर्ट स्टोरों में डूआर्स चाय को बढ़ावा देना है। साथ ही इससे चाय उत्पादकों को केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय की पहल इंडिया ब्रांड इक्विटी फंड से प्रचार के लिए समर्थन पाने में मदद मिलेगी। 
 
हालांकि असम की चाय की तुलना में डूआर्स चाय की गुणवत्ता एक मुद्दा था लेकिन यह रूसी खरीदारों में काफी लोकप्रिय थी। इसकी वजह यह थी कि यह बेहद सस्ती थी। रूसी खरीदार इसे उच्च गुणवत्ता वाली असम सीटीसी चाय में मिलाकर इस्तेमाल करते थे। लेकिन 1991 में सोवियत संघ के विघटन के कारण भारत और सोवियत संघ के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता टूटने से डूआर्स चाय तबाह हो गई। इस समझौते के कारण डूआर्स चाय की कीमत केन्याई सीटीसी से बहुत कम थी और साथ ही स्थानीय स्तर पर ही मुद्रा विनिमय की सुविधा थी। लेकिन जैसे ही यह समझौता खत्म हुआ तो ज्यादा बेहतर गुणवत्ता वाली केन्याई सीटीसी डूआर्स से सस्ती हो गई और रूसी खरीदारों ने तुरंत डूआर्स चाय को खरीदना बंद कर दिया। 1990 के दशक की शुरुआत में डूआर्स-तराई क्षेत्र से करीब 10 करोड़ किलोग्राम चाय का निर्यात होता था। 
 
डूआर्स चाय की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों के बीच मोनम ने कहा कि डूआर्स क्षेत्र के कुछ बागानों की चाय असम की सर्वश्रेष्ठï चाय को पीछे छोड़ सकती है। डूआर्स क्षेत्र के एक चाय बागान मालिक ने कहा, 'प्रस्तावित कदम से डूआर्स क्षेत्र से चाय का निर्यात फिर से शुरू करने में मदद मिलेगी। हम अपना निर्यात बाजार पूरी तरह गंवा चुके हैं और अब केवल घरेलू बाजार को ही आपूर्ति करते हैं। अगर निर्यात दोबारा शुरू होता है तो इससे न केवल विदेश मुद्रा अर्जित होगी बल्कि डूआर्स ब्रांड फिर से स्थापित होगा।'
 
एक निर्यातक ने कहा कि इससे डूआर्स चाय को उच्च गुणवत्ता वाली प्रीमियम श्रेणी में शामिल करने की मुहिम में मदद मिलेगी। अभी सीमित मात्रा में पैदा होने वाली दार्जिलिंग चाय को यह दर्जा हासिल है। असम के कुछ गिनेचुने बागान भी प्रीमियम श्रेणी में आते हैं। असम चाय के लिए भी इसी तरह की पहल का प्रस्ताव है। इसके तहत आईटीए ने करीब 30 बागानों को चिह्निïत किया है जिन्हें असम एक्जोटिका का ब्रांड टैग मिल सकता है। अंतरराष्ट्रीय खरीदारों में असम के बागानों की अच्छी ब्रांड वैल्यू है और इस पहल से उन्हें बेहतर कीमत मिलने में मदद मिलेगी।
 
इस प्रस्ताव को पश्चिम बंगाल और असम सरकारों का भी समर्थन मिला है। दोनों राज्य सरकारों ने इनके प्रचार के लिए फंड जुटाने के लिए केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय से बात करने का आश्वासन दिया है। आईटीए ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने और प्रचार फंड मुहैया करने के लिए केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय से बात कर रहा है। यह बातचीत अग्रिम दौर में है।
Keyword: tea, bagan, चाय बोर्ड दार्जिलिंग,
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