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दूरसंचार कंपनियों का ऋण प्रवर्तकों की जेब पर भारी

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली December 15, 2017

रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) की परिसंपत्तियों के लिए लेनदार इसी सप्ताह बोली प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। ऐसे में दूरसंचार कंपनियां अपने बहीखाते को दुरुस्त करने में इस्पात कंपनियों के मुकाबले कहीं अधिक तत्पर दिख रही हैं। दूरसंचार कंपनियों के कुल संकटग्रस्त ऋण का आकार 1 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक है। ऋण बोझ से उबरने के लिए आरकॉम अपनी परिसंपत्तियां बेच रही है जबकि टाटा टेलीसर्विसेज को उसके समूह से सहारा मिल रहा है। टाटा समूह ने अपनी इस दूरसंचार कंपनी को उबारने के लिए खुद मदद करने का आश्वासन दिया है। इसलिए टाटा टेलीसर्विसेज बैंकों से ऋण में रियायत मांगने के बजाय पुनर्भुगतान करने का निर्णय लिया है। भारी जेब वाली दो विदेशी दूरसंचार कंपनियों- टेलीनॉर और सिस्तेमा- ने अपने ऋण बोझ को बट्टे खाते में डाल दिया और देश छोडऩे से पहले उन्होंने अपने ऋण का पुनर्भुगतान कर दिया।

आरकॉम ने अपने लेनदारों को 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है और कुल मिलाकर यह दूरसंचार कंपनियों के लिए एक परीक्षण का मामला रहा। हालांकि सूत्रों ने कहा कि उसे अधिकांश प्रमुख परिसंपत्तियों के लिए बोलीदाता मिल गए थे जिनमें टावर, फाइबर, 850, 900, 1800 व 2100 मेगाहट्ïर्ज बैंड में स्पेक्ट्रम और मुंबई, दिल्ली व चेन्नई में रियल एस्टेट परिसंपत्तियां शामिल हैं।

इन परिसंपत्तियों की बिक्री से आरकॉम को कितनी रकम मिलेगी यह सवाल बना हुआ है। हालांकि जानकारों के अनुमान के मुताबिक यह रकम 30,000 करोड़ रुपये से 40,000 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है। लेकिन इस संबंध में अगले कुछ दिनों में घोषणा होने की उम्मीद है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे आरकॉम के ऋण बोझ में उल्लेखनीय कमी आएगी।

दूरसंचार कंपनियों के लिए एक बड़ा फायदा यह है कि आमतौर पर वे किसी दिग्गज कारोबारी समूह की इकाइयां हैं। इन समूहों के पास अन्य कारोबारों से पर्याप्त नकदी भंडार मौजूद है जिससे ऋण का पुनर्भुगतान आसानी से किया जा सकता है। टाटा टेलीसर्विसेज ने स्थगित स्पेक्ट्रम के लिए 1,600 करोड़ रुपये के भुगतान को छोड़कर नकदी मुक्त एवं ऋण मुक्त आधार पर अपना मोबाइल कारोबार एयरटेल को बेच दिया। टाटा टेलीसर्विसेज का ऋण बोझ घटाने के लिए समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस क्वासी-इक्विटी के तौर पर 30,000 करोड़ रुपये झोंक सकती है अथवा समूह के भीतर लिए जाने वाले ऋण का इस्तेमाल ऋण बोझ घटाने में किया जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार, अमेरिकन टावर कॉरपोरेशन (एटीसी) 4,000 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी अथवा अनुबंध की शेष अवधि के लिए किराये के भुगतान के लिए एटीसी टेलीकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर में उसकी 34 फीसदी हिस्सेदारी से समायोजित करेगी। आरकॉम ने एटीसी के साथ दीर्घावधि टावर करार कर रखा है। इसी प्रकार, सिस्तेमा का आरकॉम के साथ विलय हो जाएगा और उसके बदले उसे आरकॉम में 10 फीसदी हिस्सेदारी मिलेगी। रूस की इस कंपनी ने अपनी भारतीय इकाई में 4 अरब डॉलर का निवेश किया था। साथ ही उसने भारतीय एवं विदेशी बैंकों से रकम जुटाई थी।

एयरटेल को अपने भारतीय कारोबार बेचने वाली कंपनी टेलीनॉर ने 9,000 करोड़ रुपये के ऋण बोझ को दो किस्तों में निपटाया और भारत छोडऩे से पहले सभी ऋण का भुगतान कर दिया। आरकॉम के साथ एयरसेल का विलय सौदा टूटने के बाद अब सबकी नजरें एयरसेल पर टिक गई हैं।
 
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