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दबाव वाली भूषण स्टील की बिक्री से दूर रहेगी ओडिशा सरकार

देव चटर्जी और अभिजित लेले / मुंबई December 14, 2017

ओडिशा सरकार ने भूषण स्टील की बिक्री से दूर रहने का फैसला किया है, जिसे प्रतिस्पर्धी कंपनियों से 23 दिसंबर को बोली मिलने की संभावना है। भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि बैंक को अपनी पेशकश पर कोई जवाब नहीं मिला है, जिसने ओडिशा सरकार से इस साल अक्टूबर में कंपनी की 26 फीसदी हिस्सेदारी लेने का अनुरोध किया था। कुमार ने बुधवार को बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा था, हमें ओडिशा सरकार से अपने पत्र का जवाब नहीं मिला है। चूंकि भूषण स्टील का संयंत्र ओडिशा में है, लिहाजा बैंंक ने राज्य सरकार से हिस्सेदारी लेने का अनुरोध किया था। दोनों कंपनियों ने संयुक्त रूप से 87,000 करोड़ रुपये के कर्ज का भुगतान नहीं किया, लिहाजा दिवालिया संहिता के तहत समाधान के लिए इन्हें नैशनल कंपनी लॉ टिब्यूनल भेजा गया। 

आरबीआई ने इस साल जून में दबाव वाली जिन 12 कंपनियों के एनसीएलटी ले जाने का निर्देश दिया था, उनमें भूषण स्टील सबसे बड़ी गैर-निष्पादित आस्तियां है। जेएसडब्ल्यू स्टील दोनों कंपनियों के लिए बोली लगा रही है, लेकिन भूषण स्टील के अधिग्रहण में इसकी रुचि है क्योंंकि इसके पास 56 लाख टन सालाना क्षमता का संयंत्र है। जेएसडब्ल्यू स्टील ओडिशा की कंपनी के लिए बोली लगाने की खातिर जापान की जेएफई के साथ गठजोड़ कर रही है। इस कंपनी पर मार्च के आखिर में 49,957 करोड़ रुपये का कर्ज था। यह बोली में भाग लेने के लिए प्राइवेट इक्विटी कंपनियों से भी बात कर रही है।

जेएसडब्ल्यू भूषण पावर ऐंड स्टील लिमिटेड के लिए भी बोली लगाएगी, जिसके पास 35 लाख टन सालाना क्षमता का एकीकृत संयंत्र है और इसकी शुद्ध बिक्री मार्च 2016 में 7,699 करोड़ रुपये रही थी और कर्ज 37,248 करोड़ रुपये रहा था। भूषण पावर ऐंड स्टील के लिए बोली 22 दिसंबर को होने की संभावना है। जेएसब्ल्यू एयॉन कैपिटल के साथ मोनेट इस्पात की एकमात्र बोलीदाता है। जेएसडब्ल्यू के अलावा टाटा स्टील, आर्सेलरमित्तल भी भूषण स्टील के लिए बोली लगा सकती है।

दबाव वाली इन कंपनियों में बैंकों को अपने कर्ज पर 60 फीसदी का घाटा उठाना पड़ सकता है और इन्हें मौजूदा तिमाही में इन कर्जों पर 50 फीसदी का प्रावधान भी करना होगा। इस साल जून में आरबीआई ने बैंकों को पहली सूची में दर्ज 12 कंपनियों को एनसीएलटी ले जाने का निर्देश दिया था और अगर दिसंबर के आखिर तक समाधान नहीं निकला तो 28 कंपनियों की अन्य सूची भी आरबीआई जारी करेगा, जिन्हें एनसीएलटी ले जाना है। इन प्रमुख खातों पर कुल मिलाकर 4 लाख करोड़ रुपये का एनपीए है यानी कुल गैर-निष्पादित आस्तियों का 45 फीसदी। आरबीआई की सूची में शामिल 28 कंपनियों में से चार वीडियोकॉन व जयप्रकाश एसोसिएट्स आदि को एनसीएलटी नहींं भेजा गया है क्योंकि इन मामलों का समाधान करीब है।
 
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