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उद्योग ने ली राहत, यूनिटेक के कर्मचारी आहत

करण चौधरी / नई दिल्ली December 13, 2017

पिछले हफ्ते रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक में काम करने वाले एक इंजीनियर को अंतत: लगा था कि अपने मौजूदा नियोक्ता को लेकर उन्हें और उनके सहयोगियों को चिंता दूर हो जाएगी। कंपनी मामलों के मंत्रालय ने पिछले हफ्ते एनसीएलटी का रुख किया था और कर्ज से लदी इस कंपनी का प्रबंधन अपने हाथ में लेने की अनुमति मांगी थी। मंत्रालय ने कहा था कि यहां कुप्रबंधन है और रकम दूसरी जगह लगाई गई है। इससे कंपनी के कई कर्मचारियों को उम्मीद बंधी थी कि नया निदेशक मंडल कंपनी को बचा लेगा। हालांकि बुधवार को उनकी उम्मीद सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से धराशायी हो गई, जिसने 8 दिसंबर के एनसीएलटी के आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें केंद्र सरकार को रियल्टी फर्म का प्रबंधन अपने हाथ में लेने की अनुमति मिली थी। 

उन्होंने कहा, हमें उम्मीद थी कि नया बोर्ड कामकाज संभालेगा और उपचारात्मक कदम उठाना शुरू करेगा। सत्यम कंप्यूटर की तरह ही हमें उम्मीद थी कि अन्य कंपनी इसका अधिग्रहण कर लेगी और हमारी नौकरी अंतत: सुरक्षित हो जाएगी। अब दोबारा से स्थिति वैसी ही हो गई है। कंपनी के करीब 650 कर्मचारियों के लिए पिछले ढाई साल काफी परेशानी भरे रहे हैं, जिन्हें नौकरी जाने का डर है क्योंकि कंपनी घर खरीदारों, लेनदारों और सरकार से जूझ रही है। ऐसे बुरे दिनों में कंपनी ने 1,300 से ज्यादा कर्मचारी गंवा दिए।

दिल्ली-एनसीआर में रियल एस्टेट बाजार ने इस क्षेत्र में कामकाज का मौका अकाल पैदा किया है और इसने यूनिटेक के कर्मचारियों को अपनी नौकरी पर बने रहने को बाध्य किया है। फर्म के एक इंजीनियर ने कहा, मैं दूसरी नौकरी चाहता हूं, वहां काम करना चाहता हूं जिसकी साख अच्छी हो। लेकिन कोई मौका नहीं है। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से रियल एस्टेट कंपनियां राहत महसूस कर रही हैं क्योंकि इस तरह से डिफॉल्ट करने वाली दूसरी कंपनियों का भी सरकार अधिग्रहण कर लेती। क्रेडाई नैशनल के उपाध्यक्ष मनोज गौड़ ने कहा, मुझे लगता है कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही उपचारात्मक कदम उठा चुका है। पर कंपनियों को सावधान रहना होगा।
 
Keyword: Unitech, NCLT, debt, management, Supreme court, यूनिटेक, एनसीएलटी,,
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