बिजनेस स्टैंडर्ड - एमडीआर पर मुखर खुदरा विक्रेता
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, September 26, 2018 10:46 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम निवेश खबर

एमडीआर पर मुखर खुदरा विक्रेता

राघवेंद्र कामत और करण चौधरी / मुंबई/नई दिल्ली 12 10, 2017

डेबिट कार्ड पर शुल्क का मामला

सरकार ने डेबिट कार्ड से लेनदेन पर शुल्क 0.9 प्रतिशत कर दिया है
खुदरा कारोबारी वित्त मंत्रालय व रिजर्व बैंक के समक्ष दर्ज करेंगे विरोध
कारोबारियों के मुताबिक यह डिजिटल इंडिया अभियान के खिलाफ
सुनवाई न होने पर विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं खुदरा कारोबारी

बिजनेस स्टैंडर्ड एमडीआर पर मुखर खुदरा विक्रेतासोशल मीडिया पर सरकार पर हो रहे हमले के बाद खुदरा कारोबारी इस सप्ताह डेबिट कार्ड के माध्यम से लेन देन पर संशोधित मर्चेंट डिस्काउंट दरों (एमडीआर) को लेकर औपचारिक विरोध की तैयारी में हैं। दरअसल एमडीआर वह दर होती है जो बैंक, डेबिट कार्ड से लेन देन पर कारोबारियों से वसूलते हैं। बुधवार को रिजर्व बैंक ने एमडीआर दरों के आधार में बदलाव करते हुए उसे कारोबारियों की श्रेणी के मुताबिक कर दिया है, जबकि अब तक यह दर लेन देन के आकार के मुताबिक थी।

वी मार्ट रिटेल के सीएफओ आनंद अग्रवाल ने कहा, 'यह पूरी तरह से सोच विचारकर उठाया गया कदम नहीं है। यह एक कदम आगे और दो कदम पीछे चलने जैसा फैसला है।' वी मार्ट की मौजूदगी देश के छोटे शहरों में है। अग्रवाल ने कहा, 'नोटबंदी के पहले ग्रामीण इलाकों में हमारे कुल कारोबार में डिजिटल भुगतान का हिस्सा महज 10 प्रतिशत था। उसके बाद यह 25 प्रतिशत तक पहुंच गया और अभी भी यह बढ़त की ओर है। अगर हमारे लिए डिजिटल लेन देन महंगा होता है तो हम डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन देने को इच्छुक नहीं होंगे।'  

रिजर्व बैंक ने सभी संगठित खुदरा कारोबारियों के लिए एमडीआर दरें प्वाइंट आफ सेल के लिए 2000 रुपये तक के लेन देन पर 0.9 प्रतिशत कर दिया है, जो अब तक 1,000 रुपये तक के लेन देन के लिए 0.25 प्रतिशत और 1,000 से 2,000 रुपये तक के लेन देन के लिए 0.5 प्रतिशत था। इन खुदरा कारोबारियों के यहां 2,000 रुपये से कम का ज्यादातर लेन देन डेबिट कार्ड के माध्यम से होता है इसलिए 2,000 रुपये से ऊपर के लेन देन पर शुल्क 1 प्रतिशत से मामूली घटकर 0.9 प्रतिशत होने से कोई खास मदद नहीं मिलेगी। 

फ्यूचर रिटेल के संयुक्त प्रबंध निदेशक राकेश बियाणी ने कहा, 'डेबिट कार्ड के इस्तेमाल से व्यक्ति के खाते से सीधे पैसा निकलता है और इसमें किसी को जोखिम नहीं होता। यह आरटीजीएस लेन देन की तरह ही बेहतर है। ऐसे में 0.9 प्रतिशत शुल्क क्योंं लगाया जाना चाहिए?' वह जानना चाहते हैं, 'यह बोझ कौन उठाएगा, अगर खुदरा कारोबारी का शुद्ध मुनाफा 3 प्रतिशत है। हम कैसे 0.9 प्रतिशत का बोझ उठा सकते हैं?' 

इसके पहले रिलायंस रिटेल में ग्रोसरी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दामोदर मल्ल ने ट्विटर पर कहा था, 'इस कदम से विरोधाभास पैदा होता है। यह हमारे डिजिटल इंडिया अभियान के विपरीत है। मैं उम्मीद करता हूं कि नीति आयोग इसे संज्ञान में लेगा। हमें डिजिटल अभियान को बढ़ावा देने के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए।' प्रमुख खुदरा दिग्गज इसे लेकर मुखर हुए हैं वहीं रिटेलर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (आरएआई) एमडीआर दरों में बदलाव को लेकर विरोध का दायरा बढ़ाने की तैयारी में है। बुधवार को रिजर्व बैंक की घोषणा के बाद सोशल मीडिया में अभियान चलाने के बाद, आरएआई इस सप्ताह इसके खिलाफ विरोध तेज करने की योजना बना रहा है। 

आरएआई के मुख्य कार्यकारी कुमार राजगोपालन ने कहा, 'हम इस सप्ताह की शुरुआत में सरकार व रिजर्व बैंक को इस मसले पर पत्र लिखेंगे और बात करने के लिए समय मांगेंगे।' इस लॉबी समूह में फ्यूचर ग्रुप, टाटा का ट्रेंट, शॉपर्स स्टॉप के अलावा अन्य शामिल हैं। पत्र में साफ किया जाएगा कि किस तरह से संशोधित एमडीआर से डेबिट कार्ड के इस्तेमाल को हतोत्साहन मिलेगा। 

उन्होंने कहा, 'यहां तक कि रुपे कार्ड का इस्तेमाल कम हो रहा है। इसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए और लोकप्रिय बनाया जाना चाहिए। इस तरह के कार्डों पर शुल्क 0.2 प्रतिशत से कम होना चाहिए, जैसा कि चीन ने यूनियनपे कार्ड पर रखा है।' रुपे रिजर्व बैंक द्वारा प्रवर्तित घरेलू कार्ड योजना है। अन्य कारोबारी संगठनों जैसे कॉन्फेडरेशन आप आल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) ने भी वित्त मंत्रालय से संपर्क साधकर इस मसले पर ज्ञापन देने की योजना बनाई है।

सीएआईटी के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन खंडेलवाल ने कहा, 'कम या ज्यादा एमडीआर का आखिरकार अतिरिक्त वित्तीय बोझ या तो कारोबारी पर पड़ेगा या ग्राहक पर।' उन्होंने कहा, 'अगर बगैर किसी एमडीआर के डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया जाता है तो ज्यादा से ज्यादा लोग डिजिटल भुगतान की ओर अग्रसर होंगे।' 

वित्त मंत्रालय को दिए जाने वाले अपने सुझावों में कारोबारी संगठन चाहते हैं कि सरकार एमडीआर का भुगतान सब्सिडी के रूप में बैंकों को करे। वे इस मसले पर अन्य उद्योग संगठनोंं से भी बात कर रहे हैं, खासकर दूरसंचार और उड्डयन क्षेत्र से बात हो रही है। टेलीकॉम क्षेत्र पर इससे बहुत ज्यादा असर होगा क्योंकि मोबाइल हैंडसेट पर मुनाफा पहले से ही बहुत मामूली 4-5 प्रतिशत रह गया है। इस तरह से दुकानों पर हैंडसेट बेचने वाले उन दुकानदारों का मुनाफा प्रभावित होगा, जिनका सालाना कारोबार 20 लाख रुपये से ऊपर है। एमडीआर दरें 0.9 प्रतिशत होने से उनका मुनाफा और कम हो जाएगा। 

कारोबारियों का कहना है कि अगर ज्ञापन व बातचीत से सफलता नहीं मिलती तो इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। खुदरा दुकानदार जहां अपने विरोध प्रदर्शन में सरकार के इस फैसले को लेकर ज्यादा मुखर हैं, वहीं ई रिटेलर इस मसले पर जल्दबाजी नहीं दिखा रहे हैं। एमेजॉन के प्रवक्ता ने कहा, 'हम अभी रिजर्व बैंक के निर्देशों का अध्ययन कर रहे हैं, जिससे उसे बेहतर तरीके से समझ सकें। इसके बाद ही हम इस मसले पर नियामक निकाय के समक्ष अपनी बात रखेंगे।'
Keyword: retailer, FMCG, future, MDR, Demonetization,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या आईएलऐंडएफएस संकट से बॉन्ड बाजार भी होगा प्रभावित?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.