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इलेक्ट्रिक कार: खर्च करिए मोटी रकम मगर चलाने का खर्च कम

सुरजीत दास गुप्ता /  December 10, 2017

दिल्ली में धुएं-कोहरे का प्रदूषण वरिष्ठ नागरिकों और सरकार सहित सभी की सांस फुलाए हुए है। इस वजह से कम प्रदूषण वाले वाहनों पर अब सबकी नजर है। इसमें बैटरी या बिजली चालित यानी इलेक्ट्रिक कारों को सबसे बेहतर विकल्प माना जा रहा है। ज्यादातर समर्थक इसकी दो वजह मानते हैं- कम प्रदूषण और चलाने की कम लागत। लेकिन क्या कम लागत की बात वाकई सही है? 
 
सबसे पहले हमें इनकी उपलब्धता के विकल्पों पर विचार करना चाहिए। इस समय केवल एक कंपनी- महिंद्रा इलेक्ट्रिक और दो मॉडल- ई20 प्लस पी4 और वेरिटो बाजार में उपलब्ध हैं। हालांकि अब टाटा ने भी टिगोर उतार दी है और दूसरे कई तैयारी कर रहे हैं। इन्हें खरीदने के इच्छुक किसी भी शख्स को इनमें से कोई चुनना होगा। लेकिन एक या दो साल में स्थितियां बदल सकती हैं और ज्यादा विकल्प मिल सकते हैं।  
वॉल्वो, निसान, टोयोटा और टाटा मोटर्स जैसी अग्रणी कार कंपनियां कुछ वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहन के मॉडल पेश करने की योजना पर काम कर रही हैं। यहां तक कि टेस्ला भी भारत में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री शुरू करने के लिए पिछले कुछ समय से बातचीत कर रही है।
 
खरीदना महंगा, चलाना सस्ता
 
इलेक्ट्रिक कार के दाम पेट्रोल से चलने वाली कार से करीब 20 फीसदी अधिक हैं। ई20 प्लस पी4 की कीमत दिल्ली में 7.46 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है, जबकि वेरिटो की कीमत 9.25 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है। हालांकि महिंद्रा इलेक्ट्रिक के मुख्य कार्याधिकारी महेश बाबू कहते हैं कि इन इलेक्ट्रिक कारों को चलाने की लागत बेहद कम यानी  80 पैसा प्रति किलोमीटर है, जो पेट्रोल कार की प्रति किलोमीटर लागत की महज 20 फीसदी है। साफ है कि इलेक्ट्रिक कार खरीदने की ज्यादा कीमत की भरपाई कुछ वर्षों में हो सकती है क्योंकि पेट्रोल और बिजली की लागत में बहुत ज्यादा अंतर है। महिंद्रा इलेक्ट्रिक लीज का विकल्प भी मुहैया करा रही है। 
 
ई20 प्लस पी4 को चार साल की लीज पर लेने के लिए ग्राहक को हर माह 15,999 रुपये का भुगतान करना होगा, जिसमें सड़क कर, बीमा और तयशुदाा मरम्मत आदि शामिल हैं। यह सब तो ठीक है, लेकिन कोई व्यक्ति कार को चार्ज कैसे करेगा? कार चार्ज करने में काफी समय लगता है। एक फास्ट चार्जिंग स्टेशन पर करीब 90 मिनट लग जाते हैं। ऐसे स्टेशन को स्थापित करने पर करीब 2 से 3 लाख रुपये की लागत आती है। लेकिन अगर आप अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग स्टेशन लगाना चाहते हैं तो उस पर 20 लाख रुपये की लागत आएगी। हालांकि इसमें कार महज 15 मिनट में चार्ज हो जाएगी। तीसरा विकल्प स्लो चार्जर का इस्तेमाल करना है। ये चार्जर वाहन को घर पर ही पूरी रात में चार्ज कर सकते हैं। यह विकल्प भी महिंद्रा इलेक्ट्रिक मुहैया कराती है।
 
अगर आप किसी फ्लैट में भी रहते हैं तो कंपनी आपको एक सॉकेट मुहैया कराती है, जिसे आपके इलेक्ट्रिक मीटर से कनेक्ट किया जा सकता है। बाबू ने कहा कि उनके अनुसंधान में यह बात सामने आई है कि कार मालिक आम तौर पर एक दिन में 2 से 4 घंटे से ज्यादा कार का इस्तेमाल नहीं करते हैं। इसलिए जब कार पार्किंग में खड़ी हो तो उसे चार्ज करने के लिए पर्याप्त समय होता है। अगर आप इसी तरह के उपयोगकर्ता हैं तो आपके लिए यह कार खरीदना काफी आकर्षक साबित हो सकता है। 
 
लेकिन अगर आप चार्जिंग स्टेशन पर निर्भर हैं तो आपको दिक्कत भी हो सकती है। चीन में 1.5 लाख चार्जिंग स्टेशन हैं, लेकिन भारत में पूरे देश में 400 से अधिक चार्जिंग स्टेशन नहीं हैं और इनमें से ज्यादातर स्टेशन दिल्ली और एनसीआर में हैं।  चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए और लाइसेंस जारी किए गए हैं, लेकिन पेट्रोल पंपों की तुलना में इनकी संख्या कुछ भी नहीं है। बहुत से विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ रुझान उस समय बढ़ेगा जब इलेक्ट्रिक कार की कीमतें पेट्रोल-डीजल की कार के बराबर हो जांएगी और उपभोक्ता अपने वाहनों की बैटरी उसी तरह चार्ज करवा सकेंगे, जैसे वे तेल भरवाते हैं। 
 
उचित दूरी  
 
अगर आप दिल्ली से मुंबई या मुंबई से दिल्ली की यात्रा करना चाहते हैं तो आपको इलेक्ट्रिक कार में यात्रा नहीं करनी चाहिए। हालांकि महिंद्रा ने अपनी बैटरी में काफी सुधार किया है और अब आप एक बार चार्ज करके 160 से 180 किलोमीटर का सफर तय कर सकते हैं। लेकिन यह लंबी दूरी के सफर के लिए पर्याप्त नहीं है। अलबत्ता, देश के ज्यादातर शहरों में रोजमर्रा के आने-जाने के लिए यह पर्याप्त है। अच्छी बात यह है कि अब एक बार चार्ज से 200 से 400 किलोमीटर की दूरी तय करने पर काम चल रहा है। इसका मतलब है कि मुंबई से पुणे या दिल्ली से चंडीगढ़ की यात्रा करना जल्द ही संभव हो जाएगा।
कितनी चलती है बैटरी? 
 
शायद यह सबसे बड़ी चिंता है क्योंकि कार की कीमत में बैटरी की लागत करीब 40 फीसदी होती है। अगर आप ई20 प्लस पी4 के हिसाब से देखें तो उसमें बैटरी की कीमत करीब 3 लाख रुपये है। अगर आपको हर दो या तीन साल के बाद बैटरी बदलानी पड़ी तो यह बहुत महंगा पड़ेगा। अच्छी बात यह है कि इस समय इस्तेमाल की जा रहीं ज्यादातर बैटरी 5 साल से अधिक चलती हैं। हालांकि बैटरियों की कीमतों में भारी कमी आ रही है और अगले एक-दो साल में इसमें 60 फीसदी की कमी और आने के आसार हैं। 
 
दूसरा, कुछ वर्षों बाद इन बैटरी के आयात की जरूरत नहीं होगी। बहुत सी भारतीय कंपनियां इन बैटरियों के विनिर्माण के लिए संयंत्र भी लगा रही हैं। मारुति सुजूकी ने संयुक्त उपक्रम बनाया है तो  सरकारी कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स भी इनके उत्पादन पर काम कर रही है।
 
जल्द आ सकते हैं दोपहिया 
 
अभी सड़कों पर लिथियम बैटरी से चलने वाले दोपहिया वाहन नहीं हैं, लेकिन अगले साल ऐसे कई दोपहिया वाहन आने की संभावना है। बेंगलूरु की एथेर एनर्जी को उम्मीद है कि वह अगले साल इलेक्ट्रिक स्कूटर पेश कर देगी। इस कंपनी में हीरो मोटोकॉर्प और टीवीएस समूह ने भी कुछ निवेश किया है। दिल्ली की ट्वेंटी टू मोटर्स ने पिछले दिनों अपना नया इलेक्ट्रिक स्कूटर पेश किया है। जहां तक मोटरसाइकिल को पसंद करने वाले लोगों की बात है, पुणे की टॉर्क मोटर्स जल्द ही अपनी इलेक्ट्रिक बाइक पेश करने जा रही है।
 
आयशर मोटर्स के मुख्य कार्याधिकारी सिद्धार्थ लाल कहते हैं कि उन्होंने 250सीसी से अधिक सेगमेंट की इलेक्ट्रिक  बाइक को लेकर एक कोर ग्रुप बनाया है। वह कहते हैं, 'हालांकि ऐसी बाइक को आने में वक्त लगेगा और वैसे भी, हमारा सबसे पहले इसे उतारने का इरादा नहीं है।'
 
खरीद की ज्यादा कीमत और चलाने की कम लागत दोपहिया के मामले में भी सही है। एथेर एनर्जी के सह-संस्थापक तरू मेहता कहते हैं कि वे अपने स्कूटर की कीमत करीब 1.25 लाख रुपये तय करने की सोच रहे हैं। यह कीमत वेस्पा स्कूटर की कीमत के लगभग बराबर है। लेकिन इसे चलाने की लागत काफी कम होगी। 
 
मेहता ने कहा, 'एक पेट्रोल स्कूटर चलाने में मालिक का  हर साल औसतन 16,000 रुपये का खर्च आता है, जबकि इलेक्ट्रिक स्कूटर में उसे हर साल केवल 2,000 रुपये खर्च करने होंगे।' इस तरह तीन से पांच साल में इलेक्ट्रिक स्कूटर में पेट्रोल स्कूटर की तुलना में 40,000 रुपये की बचत होगी। इन स्कूटरों की बैटरी भी लंबी चल सकती हैं। टॉर्क के संस्थापक कपिल शेलके कहते हैं कि वे मोटरसाइकिल में ऐसी बैटरी लगा रहे हैं, जो 1 लाख किलोमीटर तक चलेगी और पांच-छह साल के लिए पर्याप्त होगी। 
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