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इंजीनियरिंग की पढ़ाई, नौकरी में कठिनाई

विनय उमरजी, गिरीश बाबू और अभिषेक रक्षित /  11 19, 2017

प्लेसमेंट की चिंता

► क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेजों से आईटी क्षेत्र की भर्तियों में 20 से 30 फीसदी कमी
आईटी कंपनियां पहले इन कॉलेजों से बड़े पैमाने पर करती रही हैं भर्तियां
औसत वेतन पैकेज में स्थिरता या 30 फीसदी तक गिरावट
कॉलेजों ने ई-कॉमर्स और आतिथ्य-सत्कार क्षेत्र से लगाई आस

देश के शीर्ष इंजीनियरिंग कॉलेजों में शुमार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में पढ़ने वाले छात्रों को तो कंपनियां इस बार अच्छी संख्या में प्लेसमेंट-पूर्व पेशकश कर रही हैं लेकिन क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेजों में स्थिति उतनी अच्छी नहीं है। इन कॉलेजों को अपने छात्रों को प्लेसमेंट दिलाने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। अमूमन हर साल सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र की कंपनियां इन कॉलेजों से बड़े पैमाने पर नई नियुक्तियां करती रही हैं लेकिन इस बार खुद आईटी उद्योग का ही माहौल खराब होने से उस क्षेत्र में नौकरी मिलने के आसार कम नजर आ रहे हैं। इसका मतलब है कि न केवल कोर्स पूरा करने वाले नए इंजीनियरों को नौकरियों के कम मौके मिलेंगे बल्कि उन्हें वेतन के मोर्चे पर भी थोड़े से ही संतोष करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में इंजीनियरिंग कॉलेज ई-कॉमर्स, होटल-रेस्टोरेंट, स्वास्थ्य देखभाल और स्टार्टअप क्षेत्र की कंपनियों को आकर्षित करने में जुट गए हैं। इसके साथ ही वे अपने छात्रों को नौकरी के लिए बेहतर रूप से तैयार करने के मकसद से उनकी दक्षता बढ़ाने के कार्यक्रम भी चला रहे हैं।

पदस्थापन एवं प्लेसमेंट गतिविधियों से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि नियोक्ता अब अधिक कुशल उम्मीदवारों को नौकरी देना पसंद करने लगे हैं। इसके अलावा कंपनियां अपने परिचालन वाले इलाकों में मौजूद इंजीनियरिंग कॉलेजों से बड़े पैमाने पर भर्तियां करने की प्रवृत्ति में भी कमी कर रहे हैं। इसके चलते छात्रों को मिलने वाले औसत वेतन पैकेज में भी कमी आ रही है। खासकर आईटी कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया में यह अधिक देखा जा रहा है।

अन्ना यूनिवर्सिटी से संबद्ध स्व-वित्तपोषित तमिलनाडु कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के छात्रों को भी प्लेसमेंट प्रक्रिया में ऐसा रुझान देखने को मिला है। इस कॉलेज के छात्रों को न केवल आईटी और अन्य प्रमुख क्षेत्रों से मिलने वाले ऑफर में कमी आई है बल्कि उनका सालाना वेतन पैकेज भी 3-4.2 लाख रुपये से गिरकर इस बार 1.5-2.8 लाख रुपये पर आ गया है। देश के पूर्वी हिस्से में स्थित संस्थान टेक्नो इंडिया ग्रुप (टीआईजी) में भी इंजीनियरिंग स्नातकों को 3-3.5 लाख रुपये का औसत वेतन ऑफर ही मिला है। इस कॉलेज के केवल पांच फीसदी छात्र को ही 15-25 लाख रुपये के मोटे वेतन का ऑफर मिल पाया है।

सूरत के एसवीएनआईटी कॉलेज का मानना है कि प्लेसमेंट के दौरान औसत वेतन पैकेज पिछले साल के ही स्तर 7.9 लाख रुपये पर रह सकता है। वैसे इस कॉलेज में प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट प्रमुख भार्गवी जागीरदार कहती हैं कि कंप्यूचर साइंस बैच के अधिकतर छात्रों को आईटी कंपनियों में नौकरी मिल जाएगी। मौजूदा शैक्षणिक सत्र में कॉलेज परिसर में आकर प्लेसमेंट करने वाली कंपनियों की संख्या में गिरावट आई है। अधिकांश आईटी कंपनियां भी प्लेसमेंट में इस बार अधिक जोश नहीं दिखा रही हैं।

तमिलनाडु कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के प्लेसमेंट प्रभारी जे अरुण कहते हैं कि विनिर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भी सुस्ती आने से नौकरियों की पेशकश पर फर्क पड़ रहा है। वह कहते हैं, 'प्रमुख क्षेत्रों की कंपनियों ने इस साल भर्ती प्रक्रिया धीमी कर दी है। पिछले साल की तुलना में इस बार प्लेसमेंट कम हो रहे हैं।' इसी के साथ वह यह भी बताते हैं कि इस माहौल में भी उनके कॉलेज के 50 फीसदी छात्रों का प्लेसमेंट हो गया है।

इसी तरह निजी इंजीनियरिंग कॉलेज टीआईजी में कंप्यूटर साइंस पढऩे वाले करीब 1300 छात्रों की प्लेसमेंट प्रक्रिया में केपजेमिनी, टीसीएस, इन्फोसिस, कंप्यूटर ग्राफिक्स इंडिया और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स जैसी प्रमुख कंपनियों ने शिरकत की। सितंबर के मध्य में शुरू हुई प्लेसमेंट प्रक्रिया में 30 से भी अधिक कंपनियां शामिल हो चुकी हैं लेकिन इनमें से किसी ने भी अब तक यह नहीं बताया है कि वह कितने युवाओं को नौकरी देना चाहते हैं। कॉलेज के प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट प्रभारी सौम्य कांति दास भले ही इसे सामान्य प्रवृत्ति बताते हैं लेकिन उनकी बातों से चिंता भी झलकती है।

दास कहते हैं, 'अब यह एक स्थापित तथ्य है कि आईटी क्षेत्र को नए कर्मचारियों की जरूरत में कमी आई है। पिछले कुछ वर्षों में यह कमी करीब 10 फीसदी रही है। हालांकि शीर्ष कंपनियां अब भी प्रतिभावान इंजीनियरों की तलाश कर रही हैं और यह कहना सही नहीं होगा कि प्रतिभा की अब कोई कद्र नहीं रह गई है।' वर्ष 2010-12 के आईटी बूम के दौरान इस कॉलेज के 85 फीसदी छात्रों को प्लेसमेंट मिला था लेकिन 2014-15 में यह आंकड़ा गिरकर 60 फीसदी पर आ गया था।

बदले हुए परिवेश में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के करीब पहुंच चुके छात्रों को नौकरी पाने के लिए अधिक मुश्किल प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ रहा है। कॉलेजों में आने वाली कंपनियों ने बेहतर कर्मचारी की तलाश में नए-नए तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं। मसलन, टीसीएस ने प्लेसमेंट प्रक्रिया में पहली बार लिखित परीक्षा में प्रोग्रामिंग एवं कोडिंग को भी शामिल किया है तो विप्रो ने इसके साथ छात्रों का लिखित संचार कौशल परखना भी शुरू किया है। इसी तरह कॉग्निजेंट ने साक्षात्कार के पहले प्रोग्रामिंग परीक्षण के दो दौर से गुजरना जरूरी कर दिया है। वैसे कॉग्निजेंट ने सफल अभ्यर्थियों के लिए वेतन पैकेज को बढ़ाकर करीब 6.5 लाख रुपये कर दिया है।

टीमलीज सर्विस लिमिटेड की वरिष्ठ उपाध्यक्ष नीति शर्मा कहती हैं, 'आईटी उद्योग में भर्तियों में कुछ गिरावट आने से हमारे लायक नौकरियों में बदलाव आ रहा है। पिछले 5-6 महीनों में ऑटोमेशन के चलते आईटी क्षेत्र की नौकरियों में कमी आ रही है लेकिन ये नौकरियां तो शुरुआती स्तर वाली हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के ठीक से काम करने के लिए भी मानवीय हस्तक्षेप जरूरी है। ऐसी स्थिति में उद्योगों को अधिक रचनाधर्मी, नवाचारपरक तकनीक-सक्षम उम्मीदवारों की जरूरत है। भर्तियों की संख्या में गिरावट आने के साथ ही वांछित उम्मीदवारों की प्रकृत्ति भी बदल रही है।'

एसआरएम यूनिवर्सिटी के निदेशक (करियर सेंटर) श्रीराम एस पद्मनाभन कहते हैं कि भर्तियों की संख्या कम होने पर नियोक्ता भी अपने लायक उम्मीदवारों के चयन में अधिक नुक्ताचीनी करने लगे हैं। पद्मनाभन कहते हैं, 'कंपनियां न केवल प्लेसमेंट के लिए कम कॉलेजों का रुख कर रही हैं बल्कि वहां से चुने जाने वाले छात्रों की संख्या भी कम कर रही हैं। सीजीपीए मानदंड ऊंचा होता जा रहा है या फिर चयन परीक्षा अधिक मुश्किल होती जा रही है। कुछ कंपनियों ने प्रोग्रामिंग की  बेहतर जानकारी की परख के लिए नए टेस्ट लेने शुरू किए हैं। खास तौर से छोटे कॉलेजों पर इसका असर अधिक पड़ रहा है।'

कैंपस प्लेसमेंट में आ रही इन दिक्कतों को देखते हुए कॉलेजों ने छात्रों को रोजगार दिलाने के लिए वैकल्पिक तरीकों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। अब वे न केवल अपने छात्रों की दक्षता सुधारने के लिए सीमित अवधि के कार्यक्रम चला रहे हैं बल्कि आतिथ्य-सत्कार, स्वास्थ्य देखभाल, ई-कॉमर्स और स्टार्टअप कंपनियों को भी प्लेसमेंट के लिए बुलाने लगे हैं।  नीति ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में कहा, 'आतिथ्य-सत्कार, स्वास्थ्य देखभाल, ई-कॉमर्स कंपनियां इन छात्रों को अपने बैक-ऑफिस कार्यों और ऐप्लिकेशन तैयार करने जैसे कामों के लिए नौकरी पर रख रही हैं। अब छोटे शहरों में भी स्टार्टअप तैयार होने लगे हैं जहां पर काम करने के लिए तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं की जरूरत होगी। आईटी क्षेत्र पहले से ही ओवरलोड है जबकि अन्य क्षेत्र भर्तियां कर रहे हैं।'

बड़े पैमाने पर आंकड़ों पर निर्भर कंपनियों और इंटरनेट आधारित गतिविधियों (आईओटी) में लगी कंपनियों में रोजगार संभावनाओं को देखते हुए टीआईजी कॉलेज अपने छात्रों के लिए सेमिनार, कार्यशाला और कौशल विकास सत्रों का आयोजन कर रहा है। बहरहाल हाल के दिनों में कंप्यूटर इंजीनियरों की कम मांग को देखते हुए निजी कॉलेजों को ई-कॉमर्स कंपनियों को आकर्षित करने में दिक्कत हो रही है। टीआईजी के सौम्य कांति दास कहते हैं फ्लिपकार्ट और उबर जैसी ई-कॉमर्स कंपनियां आईआईटी और जादवपुर यूनिवर्सिटी जैसे सरकारी संस्थानों का ही रुख कर रही हैं। वह कहते हैं, 'हमने ई-कॉमर्स कंपनियों को प्लेसमेंट के लिए आमंत्रित किया है लेकिन अभी तक जवाब नहीं मिला है।' 
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