बिजनेस स्टैंडर्ड - दिवालिया मालिक नहीं लगा सकेगा बोली!
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दिवालिया मालिक नहीं लगा सकेगा बोली!

वीणा मणि, ईशिता आयान दत्त और देव चटर्जी / नई दिल्ली/कोलकाता/मुंबई 11 19, 2017

तैयारी कर रही सरकार

बिजनेस स्टैंडर्ड दिवालिया मालिक नहीं लगा सकेगा बोली!सरकार भुगतान में चूक करने वाले (डिफॉल्टर) प्रवर्तकों को फंसी परिसंपत्तियों में बोली लगाने से रोकने के लिए कई कदम उठा रही है। इसके लिए सरकार एक तो दिवालिया कानून में संशोधन करेगी वहीं, सभी बोलीदाताओं को उनके समाधान प्रस्ताव के साथ अग्रिम भुगतान के लिए कहेगी। सरकार में एक उच्च पदस्थ सूत्र ने कहा कि अगले सप्ताह के शुरू में कंपनी मामलों का मंत्रालय एक कैबिनेट प्रस्ताव जारी करेगा, जिसके तहत इन्सॉल्वेंसी ऐंड बैंगक्रप्टसी कोड (आईबीसी) में एक अतिरिक्त प्रावधान जोडऩे का प्रस्ताव है, साथ ही प्रवर्तकों को उनकी कंपनियों में बोली लगाने की नई शर्तें तय करने के लिए कुछ दूसरे प्रावधानों में भी संशोधन किया जाएगा। 

हाल में ही सरकार ने बोली स्वीकृत करने के नियमों पर स्पष्टीकरण जारी किया था और आईबीसी के मौजूदा नियमों में कुछ नए प्रावधान जोड़े थे। नए नियमों में समस्या समाधान के आवेदन की विश्वसनीयता और पुराने रिकॉर्ड पर ध्यान दिया गया है। अध्यादेश की जरूरत इसलिए महसूस की जा रही है क्योंकि सरकार का मानना है कि मौजूदा प्रवर्तकों को बोली लगाने की अनुमति दिए जाने से पूरी दिवालिया प्रक्रिया का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। 

इस साल जून में भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को 12 कंपनियों को आईबीसी के तहत राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) भेजने का आदेश दिया था। ये कंपनियां ऋण चुकाने में असफल हो गई थीं, जिसके बाद आरबीआई ने यह आदेश दिया था।  इन 12 कंपनियों में पांच इस्पात कंपनियों और एमटेक ऑटो को संभावित खरीदारों से काफी कम प्रस्ताव मिले हैं। फिलहाल प्रवर्तकों को फंसी परिसंपत्तियों के लिए समाधान योजना सौंपने की अनुमति है।

इस योजना के तहत बैंकों को उनके ऋणों पर कम से कम 50 प्रतिशत नुकसान उठाना पड़ेगा। एस्सार स्टील, भूषण स्टील और भूषण पावर ऐंड स्टील अपने प्रस्ताव दिसंबर में दिवालिया समाधान मामले के पेशेवरों को सौंपने की योजना है। दिलचस्प बात है कि अमेरिका में मौजूदा प्रवर्तकों को दीवालिया प्रक्रिया में अपनी कंपनियों के लिए बोली लगाने की अनुमति है।

एस्सार के प्रवर्तकों रुइया ने गुजरात में अपने हाजिरा संयंत्र के लिए पेशकश करने के लिए रूस के वीटीबी बैंक से सहयोग किया है। इसी तरह, जेपी एसोसिएट्स ने जेपी इन्फ्राटेक की रियल एस्टेट परिसंपत्तियों के लिए बोली लगाने के लिए जेएसडब्ल्यू समूह के साथ हाथ मिलाया है। सरकार अध्यादेश लाने के साथ ही बोलीदाताओं के मूल्यांकन का आधार भी बदल रही है। एक फंसी परिसंपत्ति के समाधान से जुड़े पेशेवर ने कहा, 'निवेशकों को अब अधिक तवज्जो मिलेगी, जो इक्विटी के रूप में नया निवेश लाएंगे या अग्रिम रकम का भुगतान करेंगे।' इस पेशेवर ने माना कि यह प्रक्रिया स्वत: ही उन प्रवर्तकों के पत्ते काट देगी, जिन्होंने भुगतान में चूक की है।

पहले अधिकतम ऋण भुगतान करने वालों को तवज्जो दी जाती थी। पेशेवर ने कहा, 'प्रवर्तकों के बोली लगाने की जब चर्चा शुरू हुई तो उसी समय पूरी कवायद शुरू हुई।' कारोबारों में बदलाव लाने में बोलीदाताओं के अनुभव को भी महत्त्व दिया जाएगा और यह भी देखा जाएगा कि पहले उन्होंने कभी भुगतान में चूक तो नहीं की है।  जेएसडब्ल्यू स्टील के प्रवर्तक सज्जन जिंदल ने हाल में कहा था कि विश्वसनीयता खोने वाले प्रवर्तकों को बोली में हिस्सा लेने नहीं दिया जाना चाहिए। पात्रता और मूल्यांकन आधार पहले घोषित किया जाना चाहिए और सभी खातों में एक समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'यह महत्त्वपूर्ण पहलू है क्योंकि विभिन्न कंपनियों के लिए हम अलग-अलग मानदंड नहीं रख सकते।'
Keyword: चूक, डिफॉल्टर, प्रवर्तक, फंसी परिसंपत्ति, बोली, दिवालिया कानून, आईबीसी, एनसीएलटी,
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