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व्हाट्सऐप पर सटीक 'नतीजे' जारी होने से बढ़ी मुश्किल

रॉयटर्स /  November 16, 2017

डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज लिमिटेड के तिमाही नतीजे आने के तीन दिन पहले ही व्हाट्सऐप के एक निजी ग्रुप में यह संदेश आ गया था कि इस दिग्गज औषधि निर्माता कंपनी को अच्छा-खासा नुकसान होने वाला है। यह अनुमान किसी भी तरह से सही नहीं लग रहा था क्योंकि अधिकतर विश्लेषकों का यह आकलन था कि अप्रैल-जून तिमाही में इस कंपनी को 300 करोड़ रुपये से अधिक लाभ हो सकता है। 

 
बहरहाल जब इस संदेश के तीन बाद डॉ रेड्डीज के तिमाही  नतीजे सामने आए तो हर कोई अचंभित रह गया। व्हाट्सऐप ग्रुप 'मार्केट चैटर' पर प्रसारित संदेश में जारी अनुमान सही निकला था। इस संदेश में डॉ रेड्डीज को 50 करोड़ रुपये से अधिक नुकसान होने का जो अनुमान लगाया था, वह हकीकत के काफी करीब साबित हुआ। तिमाही नतीजों के मुताबिक उसे 58.7 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था जिसके चलते उसके शेयरों के भाव 4.4 फीसदी तक गिर भी गए थे। 
 
कंपनी नतीजों के बारे में व्हाट्सऐप संदेश की भविष्यवाणी सही साबित होने का यह इकलौता मामला नहीं है। रॉयटर्स ने करीब 12 ऐसे मामले दर्ज किए हैं जिनमें किसी कंपनी के नतीजों को लेकर व्हाट्सऐप ग्रुप संदेशों में लगाए गए अनुमान सही साबित हुए हैं।  जब रॉयटर्स ने डॉ रेड्डीज के बारे में संदेश प्रसारित करने वाले ग्रुप मार्केट चैटर की पड़ताल की तो पता चला कि 45 सदस्यों वाले ग्रुप में अधिकतर सदस्य कारोबारी थे। संदेह पैदा करने वाला  संदेश विश्लेषक निशांत वास के फोन नंबर से जारी किया गया था। रॉयटर्स ने जब इस नंबर पर संपर्क किया तो खुद को वास बताने वाले शख्स ने ही उसका जवाब दिया। लेकिन उन्होंने इस ग्रुप पर कोई भी पोस्ट शेयर करने या लिखने से साफ मना कर दिया। उन्होंने पूर्वाभासी नतीजे जारी करने की बात को भी पूरी तरह निराधार बताया। वास आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के साथ विश्लेषक के तौर पर जुड़े हुए हैं।
 
रॉयटर्स ने मार्केट चैटर समेत छह व्हाट्सऐप ग्रुप की पड़ताल की। इनमें दो संदेश शेयर किए गए थे जबकि बाकी संदेश दूसरे समूहों के सदस्यों ने अपने नाम जाहिर न होने की शर्त पर शेयर किए थे। खास बात यह है कि नतीजों के बारे में पूर्वाभासी अनुमान लगाने वाले सभी पोस्ट वास्तविक नतीजों के ऐलान के कुछ दिनों पहले ही जारी किए गए। यह भी हो सकता है कि व्हाट्सऐप ग्रुप पर कंपनी नतीजों के बारे में जारी किए गए संदेश भाग्यशाली अनुमान थे या सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों पर की गई भविष्यवाणी थी। ये सभी मामले एक ही प्रकृति के नहीं थे। बहरहाल रॉयटर्स यह नहीं कह सकता है कि व्हाट्सऐप ग्रुप पर मिली जानकारी के आधार पर उसके सदस्यों ने शेयर बाजार में कारोबार भी किया या नहीं।
 
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के साथ जुड़े रह चुके दो वकीलों का मानना है कि शेयर मूल्य के हिसाब से संवेदनशील सूचना को व्हाट्सऐप ग्रुप पर साझा करने को कानून तोडऩे वाला काम ही माना जाएगा।  फिनसेक लॉ एडवाइजर्स के वकील संदीप पारेख कहते हैं, 'अप्रकाशित अंदरूनी जानकारी को साझा करना भी गैरकानूनी है। भले ही आप उस जानकारी के आधार पर कारोबार न कर रहे हों।' हालांकि जब इस बारे में सेबी से संपर्क किया गया तो उसकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया। 
 
भारतीय शेयर बाजार में भेदिया कारोबार से संबंधित नियमों को वर्ष 2015 में काफी सख्त कर दिया गया था। अब किसी भी अप्रकाशित मूल्यपरक सूचना के साथ ही बाजार पर असर डालने वाली 'किसी भी अनुपलब्ध सूचना' को इसके दायरे में ला दिया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि अप्रकाशित मूल्यपरक सूचना तक पहुंच रखने वाले किसी भी व्यक्ति को 'भेदिया' माना जाएगा, भले ही उसके पास यह सूचना कैसे भी क्यों न पहुंची हो?
 
सेबी के विधि प्रकोष्ठ की पूर्व अधिकारी और फिलहाल सुवेन लॉ एडवाइजर्स की पार्टनर वनीसा अग्रवाल कहती हैं, 'कोई जरूरी नहीं है कि आपको वह भेदिया जानकारी कंपनी से ही मिली हो। आपको वह सूचना कहीं से भी मिल सकती है। आपके पास अंदरूनी जानकारी होते ही आप भेदिया माने जाएंगे और आपको उसे दूसरों से साझा नहीं करना चाहिए।' अगर कोई व्यक्ति सेबी के इस भेदिया नियम का उल्लंघन करता है तो उस पर 25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने के साथ ही 10 साल के कारावास की सजा का भी प्रावधान है। अगर यह साबित हो जाए कि अमुक व्यक्ति ने भेदिया जानकारी का इस्तेमाल शेयरों की खरीद-बिक्री में किया है तो जुर्माने की राशि बढ़ाई भी जा सकती है।
 
हालांकि डॉ रेड्डीज ने अपने तिमाही नतीजों के पहले ही पूर्वाभासी आंकड़े जारी किए जाने संबंधी किसी घटना की जानकारी होने से इनकार किया है। वहीं आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज का कहना है कि अप्रकाशित मूल्यपरक सूचना के प्रसार को वह किसी भी तरह बर्दाश्त नहीं करता है और सूचना की गोपनीयता बनाए रखने के लिए उसके पास एक समुचित ढांचा मौजूद है।
 
रॉयटर्स को जिन 12 कंपनियों के बारे में जारी पूर्वाभासी संदेशों की जानकारी मिली है उनमें से सात कंपनियां नैशनल स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांक निफ्टी में शामिल हैं। डॉ रेड्डीज के अलावा सिप्ला, ऐक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, टाटा स्टील, विप्रो और बजाज फाइनेंस के नतीजों से संबंधित आंकड़े इन संदेशों में जारी किए गए थे। इन संदेशों में कंपनियों के सकल तिमाही नतीजों, शुद्ध लाभ, राजस्व और परिचालन मार्जिन जैसे आंकड़े दिए गए थे। इतना ही नहीं, यह भी बताया गया था कि कंपनी अपने शेयरधारकों को कितना बोनस देने जा रही है।
 
रॉयटर्स को इन निफ्टी कंपनियों के अलावा महिंद्रा हॉलिडेज ऐंड रिसॉट्र्स, क्रॉम्पटन ग्रीव्ज कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, माइंडट्री, मास्टेक  और इंडिया ग्लाइकॉल्स के बारे में भी भेदिया जानकारी देने वाले व्हाट्सऐप संदेशों के बारे में पता चला है। इनमें से विप्रो, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, मास्टेक, क्रॉम्पटन, सिप्ला और महिंद्रा हॉलिडेज ने इस तरह की किसी गतिविधि के बारे में जानकारी होने से इनकार करते हुए कहा कि वे संवेदनशील सूचनाओं को सुरक्षित रखने का कड़ा मानदंड अपनाती हैं। अन्य कंपनियों ने कोई जवाब नहीं दिया।
 
व्हाट्सऐप ने इस बारे में संपर्क किए जाने पर कहा कि उसके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल केवल कानूनी, अधिकृत एवं स्वीकार्य उद्देश्यों के लिए ही किया जा सकता है। इन व्हाट्सऐप संदेशों के बारे में प्राय: यह देखने को मिला है कि उन्हें सुनी-सुनाई बातों के तौर पर पेश किया गया। 
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