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आपदकाल में रखिए लिक्विड फंडों में अपना पैसा
फंड प्रश्नोत्तरी
बीएस संवाददाता /  February 08, 2009

मैं अपने आपातकालीन धन (यानी वह धन जिसे में अचानक जरूरत पर इस्तेमाल कर सकूं) का निवेश बिरला सन लाइफ शॉर्ट टर्म रिटेल (ग्रोथ) में करने की योजना बना रहा हूं।

क्या यह उचित फैसला होगा? यदि नहीं, तो मुझे बताइये कि मैं आपातकालीन धन का निवेश कहां करूं? 
                                       
अपूर्बा पान

आपका फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि आपको निवेश किया हुआ अपना धन कितने समय में वापस चाहिए होगा। अगर आपको पैसा तुरंत ही वापस चाहिए होगा तो आप आवर्ती जमा के विकल्प को अपनाइये ताकि आप किसी भी आपातकालीन स्थितियों के दौरान अपना पैसे तुरंत निकाल सकते हैं।

इन परिस्थितियों में आपका मूलधन भी यथावत बना रहेगा। यदि आपको उतनी जल्दी नहीं है और आप थोड़ा जोखिम उठा सकते हैं, तो आप लिक्विड फंडों का चुनाव कर सकते हैं जोकि आवर्ती जमा के मुकाबले बेहतर रिटर्न दे सकते हैं। लिक्विड फंड में निवेश की वापसी कारोबारी दिन के साथ 1 और दिन होने के बाद हो सकती है यानी कि 24 घंटे बाद।

यदि किन्हीं परिस्थितियों में छुट्टियां आ जाती हैं या उस दौरान कारोबार नहीं हो रहा है, तो निवेश की वापसी उक्त दिनों तक टल जाएगी। इसलिए, आपका चुनाव इन बातों पर निर्भर करेगा कि आप कितनी जल्दी अपना पैसा वापस चाहते हैं।

इन परिस्थितियों में आप लिक्विड फंड का चुनाव कर रहे हैं, साथ ही आपके द्वारा चुना गया बिरला सन लाइफ शॉर्ट टर्म रिटेल भी बढ़िया है साथ-साथ इसे 4 स्टार रेटिंग भी मिली है। इसके अलावा, कैनरा रोबैको लिक्विड, एस्कॉर्ट्स लिक्विड और एचडीएफसी कैश मैनेजमेंट सेविंग्स आदि अन्य लिक्विड फंडों का भी प्रदर्शन काफी बढ़िया रहा है।

मैं ऐसे फंडों में निवेश करना चाहता हूं जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कारोबार करते हैं। क्या आप कुछ अच्छे फंडों के बारे में सुझाव दे सकते हैं?

अरुण रामचंद्रन

वर्तमान में ऐसे कई फंड हैं जो अपनी परिसंपत्तियों का निवेश विदेशी बाजारों में करते हैं। उल्लेखनीय है कि कुछ फंडों द्वारा उनकी राशि को अन्य म्युचुअल फंडों में निवेश किया जाता है जो विदेशों में कारोबार करते हैं और इन फंडों को फीडर फंड कहते हैं, जबकि कुछ अन्य प्रत्यक्ष तौर पर विदेशी प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं।

उनके लक्ष्यों के मुताबिक ही इन फंडों की विदेशी बाजारों में निवेश करने की प्रक्रिया विभिन्न होती है। विदेशों में निवेश करने वाले अधिकांश फंड नए हैं और साथ ही इनके प्रदर्शन का कोई लेखा-जोखा भी नहीं जिस पर कोई टिप्पणी दी जा सके। साथ ही यह बात भी मायने रखती है कि आपके द्वारा चुने गए फंड का निवेश दुनिया के हिस्से में होना चाहिए।

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल इंडो एशिया इक्विटी, फ्रैंकलिन एशियन इक्विटी जैसे कुछ फंडों द्वारा प्राथमिक तौर पर एशिया-पैसेफिक क्षेत्रों में निवेश किया जाता है। आईएनजी का एक फंड है जो लैटिन अमेरिका में निवेश करता है।

इसके बाद, डीडब्ल्यूएस ग्लोबल थीमेटिक ऑफशोर फंड जैसे फीडर फंडों द्वारा सिंगापुर स्थित इसके स्वामित्व वाले डीडब्ल्यूएस स्ट्रैटेजिक ग्लोबल थीम्स फंड में निवेश किया जाता है।

मैं डेट फंडों से प्राप्त होने वाली आय पर लागू होने वाले कर के बारे में जानना चाहता हूं? दीर्घावधि पूंजी आय और अल्पावधि पूंजी आय क्या है? इससे प्राप्त  आय पर कितना कर चुकाना पड़ता है? क्या सभी डेट फंडों पर एक समान नियम लागू होते हैं?

मनोज मंगला

यदि किसी म्युच्युअल फंड में एक वर्ष से कम अवधि तक निवेश किया गया है, तो इसे अल्पावधि पूंजी संपत्ति कहा जाता है और यदि किसी म्युच्युअल फंड में एक वर्ष से अधिक का निवेश किया गया है, तो यह दीर्घावधि पूंजी परिसंपत्ति बन जाती है।

अल्प एवं दीर्घावधि के दौरान बिकवाली से प्राप्त होनेवाली आय पर अल्प एवं दीर्घावधि पूंजी आयों के दिशा-निर्देशों के तहत ही कर लागू किए जाते हैं। सभी डेट फंडों पर एकसमान ही कर लागू किए जाते हैं जहां पूंजी आय मायने रखती है। सिर्फ लाभांश वितरण के मामले में ही लिक्विड योजनाओं पर अन्य सभी डेट फंडों के मुकाबले विभिन्न कर दरें लागू होती हैं।

डेट फंडों पर प्राप्त होनेवाले अल्पावधि की पूंजी आय को किसी वैयक्तिक निवेशक के कर योग्य आय में मिला दिया जाता है और जिसे उचित कर दायरे के तहत लागू किया जाता है। दीर्घावधि पूंजी आय पर इंडेक्सेशन के बिना 11.33 फीसदी की दर से कर वसूला जाता है या इंडेक्सेशन के साथ 22.66 फीसदी की दर से वसूला जाता है।

मैं कर बचाने के उद्देश्यों के साथ 40,000 से 50,000 रुपये निवेश करने की योजना बना रहा हूं। क्या आप मुझे कुछ अच्छी इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस)केबारे में बता सकते हैं?

कपिल शर्मा

टैक्स सेविंग स्कीम न सिर्फ कर बचाने में सहायक होती हैं बल्कि उनका प्रदर्शन भी बढ़िया होता है और जो हमें लंबी अवधि के लिए बेहतर रिटर्न भी देती है।

आप मैग्नम टैक्सगेन, सुंदरम बीएनपी पारिबास टैक्ससेवर, फ्रैंकलिन इंडिया टैक्सशील्ड और कैनरा रोबैको इक्विटी टैक्स सेवर में से कोई भी चुन सकते हैं।

लिक्विड और लिक्विड-प्लस फंडों में क्या भिन्नता है? क्या लिक्विड-प्लस फंड अधिक तरलता प्रदान करते हैं या अधिक रिटर्न देते हैं या ये कर बचाने के लिए अधिक योग्य होते हैं? इनकी मूलभूत योग्यताओं को विस्तार के साथ बताइये।

अमित दास

अधिकांश लोगों के जेहन में लिक्विड-प्लस के नाम से यह भ्रम पैदा हो जाता है कि इससे कुछ अधिक प्राप्त हो सकता है। लिक्विड और लिक्विड प्लस फंड के बीच सबसे मुख्य अंतर अन्तर्निहित निवेश के परिपक्व होने की समयावधि है।

लिक्विड-प्लस फंडों के अंतर्गत आनेवाले डेट निवेशों की समयावधि लिक्विड फंडों के मुकाबले काफी लंबी होती है। लिहाजा, लिक्विड-प्लस फंडों की औसतन परिपक्वता लिक्विड फंडों की तुलना में अधिक होती है।

लिक्विड फंड डेट निवेश के उपकरणों में निवेश करते हैं जिसकी परिपक्वता काफी कम अवधि की होती है। लिक्विड-प्लस फंडों द्वारा ऐसे निवेश उपकरणों में निवेश किया जाता है जिसकी अवधि दीर्घ होती है और जिसमें अधिक जोखिम बना रहता है। लिक्विड फंड की तुलना में लिक्विड-प्लस फंडों में विभिन्नता है।

लिहाजा ये कुछ-कुछ जोखिम भरे हैं, लेकिन समान परिस्थितियों में ये आंशिक मात्रा में अच्छे रिटर्न का मौका देते हैं और साथ ही कर भी कम चुकाना पड़ता है। लिक्विड प्लस फंडों द्वारा लाभांश वितरण में 22.7 फीसदी की दर से कर लागू होता है जबकि लिक्विड फंडों के लाभांश वितरण में 28.3 फीसदी की दर से कर वसूला जाता है (वैयक्तिक निवेशक के मामले में)।

हाल ही में सेबी द्वारा लिक्विड फंडों की नियमावली में बदलाव किये गए थे। इनको सुरक्षित निवेश बनाने की ओर कदम बढ़ाते हुए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि लिक्विड फंड प्रबंधकों के अधिकारों में बदलाव करते हुए इन फंडों की अधिकतम परिपक्वता 1 फरवरी से 6 महीने कर दी है और आगे 1 मई से तीन महीने के लिए कर दी गई है।

कुछ समय पहले सेबी द्वारा रियल इस्टेट म्युच्युअल फंडों को मंजूरी दी गई थी। क्या किसी फंड हाऊस ने ऐसे किसी फंड को बाजार में उतारा है, या उतारने की तैयारी कर रहा है?

सुमनेश

सेबी द्वारा रीट (रियल इस्टेट इंवेस्टमेंट ट्रस्ट) संकल्पना को मंजूरी दे दी गयी है। रीट के यूनिटों की खरीददारी के बाद निवेशक बिना किसी भौतिक प्रॉपर्टी के रियल इस्टेट में निवेश कर सकता है।

हालांकि, अब तक किसी भी फंड हाऊस ने ऐसे फंड को बाजार में नहीं उतारा है। इसके अलावा, किसी भी फंड हाऊस ने ऐसे फंड के लिए प्रस्ताव कागजातों को भी आगे नहीं बढ़ाया है।

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