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गुजरात में भाजपा की जीत की उम्मीद से उत्साहित बाजार

पुनीत वाधवा / नई दिल्ली October 26, 2017

चुनाव आयोग द्वारा गुजरात में चुनाव की घोषणा के साथ विश्लेषकों का मानना है कि राजनीतिक बदलाव आर्थिक निर्णयों में अहम भूमिका निभा सकता है। बाजार मौजूदा स्तरों पर, हालांकि कुछ हद तक भाजपा की जीत से वाकिफ हैं, लेकिन इनमें कारोबार निर्णायक परिणाम नहीं आ जाने तक अनिश्चित बना रह सकता है। अब और आम चुनाव (संभवत: मई 2019 में) के बीच 12 विधानसभा चुनाव हैं और विश्लेषकों का कहना है कि इन चुनावों को मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के दो प्रमुख सुधारों - नोटबंदी और जीएसटी पर जनमत संग्रह के तौर पर देखा जाएगा। 
 
राज्यों के चुनावों में, मुख्य रूप से फोकस गुजरात (दिसंबर 2017), कर्नाटक (अप्रैल 2018), मध्य प्रदेश (दिसंबर 2018) और राजस्थान (दिसंबर 2018) पर रहेगा।  इक्विनोमिक्स रिसर्च के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम कहते हैं, 'जब इन चुनावों का परिणाम आ जाएगा तो 2019 के लोक सभा चुनाव का परिणाम काफी हद तक स्पष्टï हो जाएगा। दूसरी बात, गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य है और अपने गृह प्रदेश में उनकी लोकप्रियता पूरे भारत के स्तर पर उनकी छवि के लिए एक अहम सैम्पल के तौर पर जानी जाएगी।'
 
पिछले महीने सरकार ने कई नीतिगत उपायों की घोषणा की जिनमें ब्याज-मुक्त कृषि ऋण, नई गुजरात औद्योगिक विकास निगम (जीआईडीसी) इकाइयों का गठन आदि शामिल है। दो प्रमुख नीतियों - सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए 2.11 लाख करोड़ रुपये के पुनर्पूंजीकरण पैकेज और भारतमाला परियोजना के जरिये बुनियादी ढांचे को बढ़ावा दिए जाने- ने बाजार का ध्यान आकर्षित किया है। 
 
नोमुरा के प्रबंध निदेशक एवं भारतीय मामलों के मुख्य अर्थशास्त्री सोनल वर्मा का कहना है, 'बड़े आकार के सुधार हुए हैं और हमें पहले से घोषित उपायों - बैंकिंग सेक्टर, बड़ी हिस्सेदारी बिक्री, इन्फ्रास्ट्रक्चर खर्च और निजीकरण- के क्रियान्वयन पर ध्यान देने की जरूरत है।' ऐसे में बाजार इन चुनाव परिणामों को किस तरह से देखेगा और आपकी निवेश रणनीति क्या होगी? हालांकि जई विश्लेषकों का मानना है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा गुजरात में जीत दर्ज करेगी, लेकिन उनका कहना है कि यदि पार्टी को नुकसान होता है तो इसका बाजार धारणा पर प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक सुधारों पर मौजूदा सरकार का जोर दिया जाना बाजारों में दीर्घावधि तेजी की उम्मीद के लिए मुख्य आधार हैं। 
 
कैलेंडर वर्ष 2017 में अब तक बीएसई के सेंसेक्स और निफ्टी 50 में 24 फीसदी और 26 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है। बीएसई पर मिड-कैप और स्मॉल-कैप सूचकांकों में तेजी लगभग 35 प्रतिशत और 42 प्रतिशत रही है।  चोकालिंगम का कहना है, 'बाजार में तेजी अब चुनाव परिणाम आने तक थम जाएगी। गुजरात परिणाम पूरे भारत के स्तर पर मोदी की लोकप्रियता का सैम्पल होगा। मैं नहीं मानता कि विदेशी संस्थागत निवेशक चुनाव परिणाम को लेकर स्थिति स्पष्टï होने से पहले तक भारत में निवेश को इच्छुक होंगे। बाजार में ताजा तेजी को देखते हुए निवेशक आंशिक रूप से मुनाफा वसूली कर सकते हैं।'
 
इक्विटी सेगमेंट में लगभग 95,000 करोड़ रुपये का निवेश कर चुके म्युचुअल फंडों द्वारा लगातार निवेश किए जाने की संभावना है। विश्लेषकों का कहना है कि इससे किसी विपरीत घरेलू या वैश्विक घटनाक्रम की स्थिति में गिरावट को नियंत्रित बनाए रखने में मदद मिलेगी।  मिजुहो बैंक में भारतीय मामलों के रणनीतिकार तीर्थंकर पटनायक कहते हैं, 'बाजार गुजरात में मोदी/भाजपा की जीत को भुना रहे हैं। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने ऐसे समय में निवेश किया है जब वहां विदेशी निवेशकों के बिकवाली पर जोर दिया है। जब तक कि देश में निवेशकों को प्रभावित करने वाला कोई बड़ा नकारात्मक बदलाव नहीं दिखता, तब तक घरेलू और विदेशी, दोनों निवेशकों से लगातार प्रवाह बना रहेगा और बाजार मजबूत होंगे।'  
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