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ग्रो फिट: घटाएं वजन पाएं सेहतमंद भोजन

शमीन अलाउद्दीन /  10 15, 2017

... ताकि आप रहें फिट

बिजनेस स्टैंडर्ड ग्रो फिट: घटाएं वजन पाएं सेहतमंद भोजनकरीब 30 साल के उद्यमी प्रीतम सतीश कुछ सालों से वजन घटाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। बतौर पार्ट टाइम निनजुत्सु (जापानी मार्शल आर्ट्स) शिक्षक का कहना है कि अभ्यास के जरिये कुछ किलोग्राम ज्यादा वजन घटाना सही तरीका नहीं है। वह अपने लिए खाना मंगाने वाली किसी सेवा की तलाश में थे। उसी वक्त उनकी नजर 'ग्रो फिट' पर गई। ग्रो फिट एक ऐसा ऐप्लिकेशन है जो आपकी शारीरिक संरचना को सही दुरुस्त रखने में मदद करता है। इसके लिए वह कम कैलोरी वाला खाना भेजता है। इसमें बस दिक्कत यही है कि इसका मेन्यु पहले से तय है।

सतीश जो खाते हैं उसकाचुनाव उसी नेकिया है और वह उनको पसंद है। यह स्टार्टअप वजन घटाने वाले केटोजेनिक आहार की डिलीवरी करता है जिसकी सिफारिश उनके निजी आहार विशेषज्ञ करते हैं। ये विशेषज्ञ यूजर की जांच करते रहते हैं।  फरवरी 2016 में ज्योत्सना पट्टाभिरामन द्वारा स्थापित बेंगलूरु के स्टार्टअप ने कुछ महीने पहले ही मणिपाल समूह, एसएआर समूह और ग्रोवर ट्रस्ट की पीई इकाई मणिपाल एजुकेशन ऐंड मेडिकल ग्रुप से ए सीरीज फंडिंग के तहत 45 लाख डॉलर जुटाए हैं। 

क्या है अवधारणा

ग्रो फिट डेटा विज्ञान, व्यावहारिक नजरिया, मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करके अपने ग्राहकों की रणनीति की पहचान और पुष्टि करता है। यह हेल्थ स्टार्ट अप मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, अनिद्रा, त्वचा और बालों की समस्या और पोषण  के लिए विशेषज्ञों के साथ संवाद की सुविधा मुहैया कराता है। इसकी योजना में नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन शामिल होता है। शाकाहारी आहार की लागत तकरीबन 24,000 रुपये प्रति माह होगी जबकि मांसाहारी आहार के लिए यह लागत करीब 28,000 रुपये महीने होगी। ऐसा भोजन बेंगलूरु में उपलब्ध है लेकिन पैकेज्ड फूड तो देश भर में उपलब्ध है। 

कैसा है मौका

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक हर साल जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की वजह से देश में 60 लाख लोगों की मौत हो जाती है। विश्व आर्थिक फोरम के अनुमान के मुताबिक इन बीमारियों की वजह से आर्थिक बोझ का दायरा 4.58 लाख करोड़ डॉलर को पार कर लेगा। कंपनी का दावा है कि इससे बीमारियों का दायरा कम होगा और रोगं का हल भी मिलेगा। इनमें प्रजनन से लेकर तनाव प्रबंधन से जुड़े मसले शामिल हैं जिनका हल ऐप के जरिये मिलेगा। 

ग्रो फिट में निवेश करने वाली एमईएमजी के सीईओ और एमडी डॉ रंजन पई कहते हैं, 'कंपनी का पूरा जोर हेल्थकेयर पर है जिसकी मांग ग्राहक न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी कर रहे हैं।' पई कहते हैं, 'दुनिया भर में संपन्नता बढऩे के साथ ही यह जरूरी है कि आरामपरस्त जीवनशैली और फास्ट फूड पर निर्भरता की वजह से हमारी पोषण संबंधी आदतों की भरपाई होनी चाहिए। ग्रो फिट का मॉडल समीचीन है। इससे इस अंतर को कम किया जा सकता है और यह दुनिया में कहीं भी कारगर हो सकता है।'

राजस्व

ग्रो फिट अपने ग्राहकों के दायरे में 30 फीसदी की बढ़ोतरी कर रही है और हर महीने इसकी सबस्क्रिप्शन कमाई दोगुनी हो रही है जबकि फूड सबस्क्रिप्शन में पांच गुना बढ़ोतरी हो रही है। इसके करीब 60 फीसदी यूजर लखनऊ और मेडक जैसे छोटे और मझोले शहरों से जुड़े हैं। ग्राहकों के पास यह विकल्प होता है कि वे निजी तौर पर अपनी इस आहार योजना में बदलाव कर सकें। फ्री प्लान एक जेनेरिक प्लान है। ग्राहक अपने पोषण, थेरेपी और तनाव प्रबंधन और नींद के हिसाब से अपनी योजना में तब्दीली कर सकते हैं।

आगे की राह

बेंगलूरु में कंपनी के 25,000 ग्राहक हैं और उसकी योजना 10 शहरों में अपना दायरा बढ़ाने की है जिनमें हैदराबाद, जयपुर और मुंबई भी शामिल है। इसने कुछ कंपनियों के साथ गठजोड़ किया है और यह अस्पतालों के साथ गठजोड़ को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। स्टार्ट अप के 10 ऐसे उत्पाद हैं जिनके पेटेंट के लिए ावेदन किया गया है। वे हाल में मिले धन का इस्तेमाल करेंगे ताकि नए उत्पादों की पेशकश की जा सके। साथ ही डाटा विज्ञान और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर भी काम करने की योजना है। भविष्य में यह प्रजनन, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली औरतों, तनाव प्रबंधन के लिए योजनाओं की शुरुआत करेगा। यह विभिन्न आंकड़ों को जोड़ते हुए ऐप को तंदरुस्ती का बेहतर साथी बनाने की कोशिश में जुटा हुआ है।
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