बिजनेस स्टैंडर्ड - देसी विटामिन बाजार में एमएनसी तगड़ी
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देसी विटामिन बाजार में एमएनसी तगड़ी

सोहिनी दास / अहमदाबाद 09 11, 2017

शीर्ष पांच कंपनियों में सभी बहुराष्ट्रीय कंपनियां

बिजनेस स्टैंडर्ड देसी विटामिन बाजार में एमएनसी तगड़ीवैश्विक न्यूट्रास्युटिकल्स बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ने के लिए तैयार है लेकिन विटामिन्स एवं पोषक आहार श्रेणी में घरेलू औषधि कंपनियों की सीमित हिस्सेदारी के साथ बहुराष्ट्रीय कंपनियों का वर्चस्व है। करीब 10,000 करोड़ रुपये के इस बाजार शीर्ष पांच कंपनियों में सभी बहुराष्ट्रीय कंपनियां (एमएनसी) हैं।

यूरोमॉनिटर के आंकड़ों से पता चलता है कि अमेरिका की कंपनी एमवे पिछले पांच साल से भारतीय बाजार की इस श्रेणी में अग्रणी बनी हुई है। हालांकि उसकी हिस्सेदारी घटकर 2016 में 33.8 फीसदी रह गई जो 2013 में 43.2 फीसदी रही थी। इसके बाद अपने बीकोसुल्स ब्रांड के लिए चर्चित कंपनी फाइजर 16.8 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे पायदान पर मौजूद है। इसी प्रकार तीसरे पायदान पर मर्क, चौथे पायदान पर बेयर और पांचवें पायदान पर ऐबट मौजूद है। देसी कंपनी वॉकहार्ट इस बाजार में सातवें पायदान पर थी।

एसोचैम और आरएनसीओएस के हालिया अध्ययन से उजागर हुआ है कि भारतीय न्यूट्रास्युटिकल्स बाजार 2022 तक 8.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है जो 2015 में 2.5 अरब डॉलर था। अध्ययन में यह भी कहा गया है कि वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी 2015 में 2 फीसदी थी जो बढ़कर 2022 में 3 फीसदी होने का अनुमान है। देश में बढ़ते शहरीकरण और जागरूकता बढऩे से इसे बल मिलेगा। एसोचैम और आरएनसीओएस में कहा गया है कि इसमें विटामिन्स एवं खनिज तत्वों का बाजार 2022 तक मूल्य के लिहाज से 2.1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

बिजनेस स्टैंडर्ड देसी विटामिन बाजार में एमएनसी तगड़ीयूरोमॉनिटर ने भी 2017 और 2021 के बीच 3.6 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि विकास दर का अनुमान लगाया है। जानकारों का मानना है कि विटामिन्स एवं पोषक आहार बाजार में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के वर्चस्व की मुख्य वजह यह है कि उनके ब्रांड तीन या चार दशक पुराने हैं। कैडिला हेल्थकेयर के चेयरमैन पंकज पटेल ने कहा, 'बहुराष्टï्रीय कंपनियां पहले से ही अपने ब्रांड को स्थापित कर चुकी हैं। इसलिए इस श्रेणी में पैठ बनाना किसी नए ब्रांड के लिए आसान नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा कि पहले जायडस कैडिला की भी उल्लेखनीय हिस्सेदारी नहीं थी।

बिजनेस स्टैंडर्ड देसी विटामिन बाजार में एमएनसी तगड़ीहालांकि ऐसा नहीं है कि भारतीय कंपनियों ने कोई पहल नहीं की। सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज ने अपने रीवाइटल ब्रांड (पूर्व में रैनबैक्सी ब्रांड) को पिछले साल स्वास्थ्य पूरक ब्रांड के रूप में उतारा था। हालांकि कंपनी की वित्त वर्ष 2016 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि उसके कुल कारोबार में विटामिन्स, खनिज एवं पोषक तत्वों की हिस्सेदारी करीब 4 फीसदी है। वित्त वर्ष 2017 की रिपोर्ट आना अभी बाकी है। इसी प्रकार ल्यूपिन विटामिन्स, खनिज एवं पोषक तत्वों की श्रेणी से करीब 5 फीसदी राजस्व अर्जित करती है।

Keyword: न्यूट्रास्युटिकल्स, बाजार, भारत, हिस्सेदारी, विटामिन्स, पोषक आहार, औषधि, एमएनसी,
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