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एयर इंडिया की तरह रेलवे को भी पटरी पर ला पाएंगे लोहानी?

अरिंदम मजूमदार /  08 23, 2017

रेलवे को अपना पहला प्यार बताने वाले अश्विनी लोहानी को रेलवे बोर्ड का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है। एयर इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक के तौर पर कुछ हद तक कामयाब रहे लोहानी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहे रेलवे को किसी तरह पटरी पर लाया जाए।
वैसे लोहानी के लिए यह कोई पहला मौका नहीं है जब उन्हें मुश्किल हालात में कोई नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। खुद लोहानी भी कहते हैं कि उन्हें संगठनों की कायापलट कर देने में महारत हासिल है। लोहानी ने अगस्त 2015 में जब एयर इंडिया की कमान संभाली थी तब भी सरकारी एयरलाइन पायलटों की हड़ताल और इंडियन एयरलाइंस के विलय के बाद के कई अनसुलझे मुद्दों की मार झेल रही थी। लेकिन लोहानी के नेतृत्व में एयर इंडिया वित्तीय परिचालन लाभ की स्थिति में पहुंच गयी जिसके लिए काफी हद तक विमान ईंधन की कीमतों में आई कमी भी मददगार रही है। बहरहाल एयर इंडिया में लोहानी के प्रदर्शन को परखने के लिए वित्त वर्ष 2015-16 और 2016-17 के आंकड़ों पर नजर डालते हैं।
आंकड़े बताते हैं कि इन दो वर्षों में एयर इंडिया की दक्षता सुधरी है। इसके बावजूद यह सच है कि एयर इंडिया के कायापलट के लिए जो कार्ययोजना बनाई गई थी उसके कई लक्ष्यों को हासिल करने में वह नाकाम रही है।
एयर इंडिया ने नागरिक उड्डïयन मंत्रालय को दी गई प्रस्तुति में कहा था कि वर्ष 2016-17 में उसके घाटे में कमी आई है जबकि उसके राजस्व और आय-परिचालन अनुपात में बढ़ोतरी हुई है। ये आंकड़े इस लिहाज से महत्त्वपूर्ण हैं कि एयरलाइन ने 2015-16 की तुलना में अपना प्रदर्शन बेहतर किया है। पिछले वित्त वर्ष में एयर इंडिया ने 105 करोड़ रुपये का परिचालन लाभ कमाया था जो इंडियन एयरलाइंस के साथ उसके विलय के बाद का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। वर्ष 2016-17 में इस एयरलाइन का राजस्व करीब 10 फीसदी बढ़कर 22,521 करोड़ रुपये हो गया। एयरलाइन प्रबंधन ने कहा था कि यात्रियों से प्राप्त राजस्व में बढ़ोतरी की वजह यह रही कि एयर इंडिया ने अपनी क्षमताओं का पूरी कुशलता से इस्तेमाल किया। एयर इंडिया प्रबंधन ने कहा था, 'प्रति किलोमीटर यात्री राजस्व के मामले में क्षमता उपयोग 2016-17 के दौरान 6.85 फीसदी बढ़कर 4.13 करोड़ हो गया।'
एयर इंडिया के प्रदर्शन में आए इस सुधार की वजह यह थी कि उसने लोड फैक्टर को बेहतर किया। एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं, 'हम अपने लोड फैक्टर को 2015-16 के 75 से बेहतर कर 76.4 तक पहुंचाने में सफल रहे। देखने में यह मामूली सुधार लग सकता है लेकिन घरेलू मार्गों पर निजी विमानन कंपनियों के भारी क्षमता नियोजन को देखें तो यह कम नहीं है।'
इसी तरह एयर इंडिया अपने घाटे में भी 5.05 फीसदी कटौती करते हुए 3,643 करोड़ रुपये पर लाने में सफल रही जबकि 2015-16 में यह 3,836 करोड़ रुपये था। एयर इंडिया के एक अधिकारी ने कहा, 'यह बात ध्यान में रखी जानी चाहिए कि हम पिछले वित्त वर्ष में विमान ईंधन के दाम बढऩे और हवाईअड्डïों पर लैंडिंग चार्ज बढऩे के बावजूद अपना घाटा कम करने में सफल रहे।' वर्ष 2016-17 में एयर इंडिया का ईंधन पर व्यय 484 करोड़ रुपये बढ़कर 6,330 करोड़ रुपये पर आ गया था।
इसके अलावा जस्टिस धर्माधिकारी समिति की सिफारिशें लागू होने से भी एयर इंडिया का खर्च बढ़ गया। यह अधिकारी कहते हैं, 'सिफारिशें लागू होने से स्टाफ पर होने वाले व्यय में 202 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। यह स्थिति स्टाफ को तर्कसंगत करने के सुझावों को लागू करने के बाद की है।'
इन तमाम सुधारों के बावजूद जमीनी हकीकत यही है कि लोहानी भी एयर इंडिया की घरेलू बाजार में खोई हुई स्थिति बहाल करा पाने में नाकाम रहे। एयर इंडिया के एक अधिकारी इसकी सबसे बड़ी वजह सस्ती विमानन सेवा कंपनियों के वर्चस्व को मानते हैं। उन्होंने कहा, 'सस्ती विमानन सेवा देने वाली एयरलाइंस का बाजार पर दबदबा कायम होने से हमारे नतीजे गिरने लगे और हम उनका मुकाबला नहीं कर पाए। लेकिन हमें इस पहलू को भी ध्यान में रखना होगा कि हम किसी निजी कंपनी की तरह बर्ताव नहीं कर सकते हैं। आखिर किसी निजी एयरलाइन को रणनीतिक फैसलों से जुड़ी जटिलताओं का ध्यान नहीं रखना पड़ता है।' घरेलू विमानन बाजार में तगड़ी प्रतिस्पद्र्धा होने से एयर इंडिया ने कारोबार के लिए मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर ध्यान केंद्रित किया। उसने दिल्ली-सैन फ्रांसिस्को मार्ग पर उड़ानों की संख्या दोगुनी कर दी, मैड्रिड और वियना के लिए सीधी उड़ानों की शुरुआत की और अहमदाबाद-लंदन-नेवार्क एवं दिल्ली-कोच्चि-दुबई मार्ग पर नई सेवा शुरू की।
लोहानी की एक और खासियत यह रही है कि उन्होंने एयर इंडिया के कर्मचारियों के साथ सीएमडी कार्यालय के फासले को पाटने की कोशिश की। पायलट यूनियन के एक पदाधिकारी कहते हैं, 'उनके दरवाजे हमारे लिए हमेशा खुले रहते थे। उन्होंने हमारी बातों को पूरे ध्यान से सुना।' जब लोहानी से एयर इंडिया के सीएमडी के तौर पर उनकी सबसे बड़ी कामयाबी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि मैं कंपनी के भीतर एक तरह से हक की भावना लाने में सफल रहा। अब कोई मुफ्त टिकट नहीं मिलता है, न ही मुफ्त अपग्रेड है। अब एयर इंडिया किसी कारोबारी संस्थान की ही तरह काम करती है।'
लोहानी के सामने अगली चुनौती रेलवे को पटरी पर लाने की है। हालात यह हो गए हैं कि रेलवे बोर्ड के एक सदस्य को जबरन छुट्टïी पर जाने को कहा गया, बोर्ड के चेयरमैन ने इस्तीफा दे दिया और खुद रेल मंत्री भी इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं। ऐसी स्थिति में लोहानी के लिए कायापलट करने वाले शख्स के दावे पर खरा उतर पाना आसान नहीं होगा।

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