बिजनेस स्टैंडर्ड - निजीकरण पर सरकार का बढ़ा जोर
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निजीकरण पर सरकार का बढ़ा जोर

अरूप रॉयचौधरी / नई दिल्ली August 18, 2017

सार्वजनिक स्वामित्व वाली कंपनियों के निजीकरण में पिछले सालों की धीमी प्रगति के बाद सरकार अब 'रणनीतिक विनिवेश' की प्रक्रिया में तेजी लाने की कोशिश कर रही है। बुधवार को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने मंत्रियों की एक उच्चस्तरीय समिति बनाने के लिए मंजूरी दी जिससे अंतिम बिक्री के लिए कंपनी की पहचान करने में लगने वाला समय कम होगा।
 
'वैकल्पिक प्रणाली' वाली इस समिति में वित्त मंत्री अरुण जेटली, सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और प्रशासनिक विभाग मंत्री के भी शामिल होंगे जिनकी कंपनी को रणनीतिक बिक्री के लिए नामित किया गया है। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि वैकल्पिक प्रणाली से केंद्र रणनीतिक बिक्री की मात्रा बढ़ाने में सक्षम होगा और किसी भी बिक्री के लिए निवेश विभाग और सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन (डीआईपीएएम) को कैबिनेट से संपर्क करने की रफ्तार कम करनी होगी। एक अधिकारी ने बताया, 'निजीकरण और खरीदारों का अनुमोदन करने का अंतिम फैसला सीसीईए के पास है। हालांकि इच्छुक खरीदारों से लेकर वित्तीय बोली के  आमंत्रण का निर्णय वैकल्पिक तंत्र ही करेगा। इन प्रक्रियाओं के लिए हमें सीसीईए से संपर्क करने की जरूरत नहीं है।'
 
वर्ष 2017-18 में कुल बजट का विनिवेश लक्ष्य 72,500 करोड़ रुपये है, वहीं अल्पांश हिस्सेदारी की बिक्री, बायबैक, विलय, सार्वजनिक सूचीबद्धता और सीपीएसई ईटीएफ के जरिये 46,500 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। रणनीतिक बिक्री के जरिये 15,000 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। बाकी 11,000 करोड़ रुपये पांच सरकारी सामान्य बीमा कंपनियों की सूचीबद्धता से जुड़ी पूर्व घोषित योजनाओं से मिलने की संभावना है।
 
इस वित्त वर्ष में केंद्र ने सबसे बड़े विनिवेश को पूरा करने की जो योजना बनाई है इनमें हिंदुस्तान पेट्रोलियम की 51 फीसदी हिस्सेदारी ओएनजीसी लिमिटेड को बेचने से जुड़ी हैं। डीआईपीएएम ने घाटे में चल रही स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड के रणनीतिक विनिवेश में मदद करने के लिए सलाहकारों की सेवाएं लेने के प्रस्ताव के लिए आवेदन जारी किया है। इसने बीईएमएल लिमिटेड, पवन हंस और हिंदुस्तान प्रीफैब के निजीकरण की योजना बनाई है। सबसे हाई-प्रोफाइल घोषणा एयर इंडिया के निजीकरण से जुड़ी थी लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इस वित्त वर्ष में ऐसा पूरा होना संभव नहीं है। 
 
वित्त मंत्रालय ने घाटे में चल रहे कई सरकारी उपक्रमों का विलय समान क्षेत्र की प्रतिस्पद्र्धी बड़ी सरकारी कंपनियों में करने की योजना बनाई है। इसके अलावा स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन और पीईसी लिमिटेड को बंद करने और उनकी परिसंपत्ति का विलय बड़ी कंपनी एमएमटीसी लिमिटेड में करने की सिफारिशें भी दी गईं हैं। सार्वजनिक स्वामित्व वाली सूचीबद्ध निर्माण कंपनी एनबीसीसी लिमिटेड ने पहले ही हिंदुस्तान स्टीलवक्र्स कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को खरीदा है।
Keyword: PSU, PPP, CCEA,,
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