बिजनेस स्टैंडर्ड - विलय की राह पर पीडीआईएल
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विलय की राह पर पीडीआईएल

वीणा मणि / नई दिल्ली August 13, 2017

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) एक रणनीतिक निवेशक को प्रोजेक्ट ऐंड डेवलपमेंट इंडिया लिमिटेड (पीडीआईएल) बेचने के अपने पहले के फैसले को बदलने के लिए तैयार है। संभवत: यह पीडीआईएल का विलय इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) के साथ करने की मंजूरी दे सकती है। पीडीआईएल से जुड़े रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने इआईएल के साथ संस्था के विलय के लिए एक कैबिनेट नोट का प्रस्ताव पेश करने की योजना बनाई है। जानकार सूत्रों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि इस संबंध में हाल में एक बैठक हुई थी।
सूत्रों का कहना है, 'दोनों संस्थाएं एक ही कारोबार में हैं ऐसे में इसकी हिस्सेदारी बेचने के बजाय उनका विलय फायदेमंद होगा।' ईआईएल सार्वजनिक क्षेत्र का एक उपक्रम है जो पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन है। यह नवरत्न सार्वजनिक उपक्रमों में से एक है। इससे पहले पीडीआईएल के कर्मचारियों ने मंत्रालय को सुझाव दिया था कि इसका विलय इआईएल के साथ कर दिया जाए।
 
सीसीईए ने जब इसकी पूरी हिस्सेदारी एक रणनीतिक निवेशक को बेचने के लिए मंजूरी दी तब सरकार ने पीडीआईएल केविनिवेश की प्रक्रिया शुरू कर दी। इस प्रक्रिया के मूल्यांकन की मांग भी हुई। सरकार ने इससे पहले भी पीडीआईएल का विलय दूसरे सार्वजनिक उपक्रम हिंदुस्तान प्रीफैब के साथ करने की कोशिश की थी। पीडीआईएल एक डिजाइन इंजीनियरिंग और उर्वरक, संबद्ध रसायन उद्योगों, तेल एवं गैस जैसे क्षेत्रों में सलाहकारी संगठन है। प्रोडक्ट पाइपलाइन, एलपीजी टर्मिनल, ऑयल टर्मिनल, एलपीजी बॉटलिंग संयंत्र, मेथनॉल संयंत्र, हाइड्रोजन संयंत्र और विभिन्न तरह के एसिड प्लांट भी इसकी विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। ईआईएल देश में रिफाइनरी क्षेत्र में इंजीनियरिंग सलाहकारी सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी है और इसने 72 रिफाइनरी परियोजनाएं पूरी की हैं। इसकी कुल सम्मिलित रिफाइनिंग क्षमता 10 करोड़ टन सालाना से अधिक है जिनमें 10 मूलभूत रिफाइनरी शामिल हैं। सरकार ने पिछले 7 सालों में अपने विनिवेश का लक्ष्य पूरा नहीं किया है। अपने बजट 2017-18 में इसने 72,500 करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य तय किया था जिनमें 46,500 करोड़ रुपये अल्पांश हिस्सेदारी की बिक्री, 15,000 करोड़ रणनीतिक हिस्सेदारी की बिक्री और विभिन्न बीमा कंपनियों की सूचीबद्धता से मिलने वाली 11,000 करोड़ रुपये की रकम शामिल है। अब तक सरकार ने विनिवेश के जरिये करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाया है।
Keyword: IDPL, CCEA, आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए),
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