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जीएसटी के बाद बाधारहित माल ढुलाई के लिए मल्टीमोडल परिवहन होगा अहम

मेघा मनचंदा / नई दिल्ली 08 02, 2017

वाराणसी में मल्टीमॉडल टर्मिनल

► दिसंबर 2018 के पहले शुरू हो जाएगी मल्टीमोडल सेवा
वाराणसी में 170 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है मल्टीमोडल टर्मिनल
वाराणसी बन सकता है पूर्वी भारत, पूर्वोत्तर भारत व बांग्लादेश को जोड़ने का केंद्र
यह 5,369 करोड़ रुपये की जेएमवीपी का हिस्सा

बिजनेस स्टैंडर्ड जीएसटी के बाद बाधारहित माल ढुलाई के लिए मल्टीमोडल परिवहन होगा अहमवस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद मल्टीमोडल ट्रांसपोर्ट से माल के बाधारहित परिवहन से कारोबार को और बढ़ावा मिलेगा। सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि दिसंबर 2018 के पहले पहली मल्टीमोडल सेवा शुरू हो जाएगी। वाराणसी में 170 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा मल्टीमोडल टर्मिनल एक बेहतरीन लॉजिस्टिक गेटवे बनकर उभर सकता है, जो उत्तर भारत को पूर्वी भारत व पूर्वोत्तर भारत के राज्यों से जोड़ेगा, जिसका विस्तार बांग्लादेश तक होगा। 

वाराणसी में बन रहा टर्मिनल जलमार्ग, रेल और सड़क संपर्क से जुड़ा होगा, जो सरकार की 5,369 करोड़ रुपये की जल मार्ग विकास परियोजना (जेएमवीपी) का हिस्सा है। मल्टीमोडल ट्रांसपोर्टेशन की सामान्य रूप से व्याख्या इस तरह से की जाती है कि कोई माल फैक्टरी से निकलने के बाद से उपभोक्ता तक किस तरह से पहुंचता है। उदाहरण के लिए मल्टीमोडल ट्रांसपोर्ट में किसी गोदाम से माल ट्रक से निकलेगा। निर्धारित मार्ग से यात्रा के बाद ट्रक रेलवे स्टेशन तक पहुंचेगा, जहां उस सामान को रेलरोड कार में लाद दिया जाएगा। वैकल्पिक रूप से माल ढुलाई के लिए कार्गो विमान और लाइन हॉल ट्रकों का भी इस्तेमाल हो सकता है। एक केंद्र पर माल पहुंचने के बाद छोटे वाहनों के माध्यम से उसकी डिलिवरी की जाएगी। निर्यात-आयात कार्गो के मामले में माल समुद्री जलमार्ग से जाएगा। यह जमीन वाले जलमार्गों व तटीय शिपिंग से गुजरते हुए घरेलू खपत के लिए पहुंचेगा, जो नदियों में चलने वाले छोटे जहाजों के माध्यम से भी भेजा जाएगा। 

बहरहाल जब सड़क और रेल ढुलाई की बात आती है तो प्रमुख चुनौती अपर्याप्त बुनियादी ढांचे की होती है। सड़क संपर्क खराब होने व चेकपोस्ट की वजह से खासी देरी होती है। जीएसटी लागू होने के बाद चेकपोस्ट की समस्या से मुक्ति मिली है। सरकार का दावा है कि इससे परिवहन की अवधि घटी है। नगर निगमोंं की चुंगी अभी जारी है, जिसकी वजह से परिवहन में कुछ देरी हो रही है।

लॉजिस्टिक कंपनियों का कहना है कि मल्टीमोडल ट्रांसपोर्ट भविष्य के कारोबार के हिसाब से बेहतर है। उद्योग संगठन एसोचैम के मुताबिक वैश्विक रूप से सालाना लॉजिस्टिक्स लागत करीब 3.5 लाख करोड़ डॉलर है। भारत अपने सकल घरेलू उत्पाद का करीब 14.4 प्रतिशत लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन पर खर्च करता है, जो अन्य विकसित देशों में 8 प्रतिशत से भी कम है। 

विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक विकासशील देशों में भारत की लॉजिस्टिक्स लागत सबसे ज्यादा है। मई में आयोजित एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स सम्मेलन में गडकरी ने कहा था कि सरकार एकीकृत मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट नीति बनाने की दिशा में काम कर रही है, जिससे देश में लॉजिस्टिक्स लागत घटक र आधी रह जाएगी और इससे भारत के उत्पाद और ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे।
Keyword: जीएसटी, माल ढुलाई, टर्मिनल, वाराणसी, बांग्लादेश, जेएमवीपी, ट्रांसपोर्ट, परिवहन, राजमार्ग,
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