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कंपनियों ने सेबी के पास जताई चिंता

श्रीमी चौधरी / मुंबई August 01, 2017

एक ओर जहां नई दिवालिया संहिता के तहत 12 कंपनियों के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया पर लेनदार आगे बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कंपनियां अंतरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) की नियुक्ति की प्रक्रियाओं पर चिंता जता रही हैं।
समझा जाता है कि कुछ कंपनियों ने मौजूदा प्रतिभूति कानून पर स्पष्टीकरण के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड व अन्य प्राधिकरण से संपर्क साधा है कि क्या भेदिया कारोबार व अधिग्रहण संहिता लागू होगी।
एक नियामकीय अधिकारी ने कहा, दिवालिया प्रक्रिया के मामले में कुछ चिंता सामने रखी गई है। हम मिले हुए फीडबैक का अध्ययन कर रहे हैं।
आईबीसी के तहत अगर कोई देनदार तय समय में कर्ज का भुगतान नहीं कर पाता है तो लेनदार दिवालिया समाधान प्रक्रिया की शुरुआत कर सकता है। या तो लेनदार या कर्जदार कंपनी को डिफॉल्ट के सबूत के साथ समाधान प्रक्रिया की शुरुआत के लिए नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में आवेदन दाखिल करना होता है। अंतरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल कार्यभार संभालने के सात दिन के भीतर देनदार की समापन (लिक्विडेशन) कीमत तय करने की खातिर पंजीकृत मूल्यांकनकर्ता नियुक्त करेंगे। इसका आकलन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य मूल्यांकन के मानक के मुताबिक होगा, लेकिन इससे पहले इन्वेंट्री व अचल संपत्तियों का भौतिक रूप से सत्यापन होगा।
एक कंपनी के अधिकारी ने कहा, पूरी कवायद में अच्छी साख की दरकार होती है। आईआरपी को सुनिश्चित करना होगा कि वह कंपनी की मान्यताओं के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करेगा। इसके अलावा जटिलताओं से निपटने के लिए उन्हें पर्याप्त इंतजाम करना होगा।
इसके अलावा तीन अन्य चिंता है। खेतान ऐंड कंपनी के पार्टनर सिद्धार्थ शाह ने कहा, आंतरिक सलाहकार समिति कंपनी का नियंत्रण हाथ में ले लेती है और इसके निदेशक मंडल से ऊपर हो जाती है। समिति आईआरपी को भी शामिल करेगी, जो लेनदारों को सलाह देंगे कि कैसे पुनर्गठन किया जाना है। समिति के पास कीमत संवेदनशील सूचना की जांच आदि का पूरा अधिकार होगा। यह निदेशक मंडल के सदस्यों पर कुछ निश्चित दायित्व आरोपित करेगा कि उन परिस्थितियों में वे सूचना देने को बाध्य हैं।
भेदिया कारोबार नियम की धारा-3 किसी कंपनी या सूचीबद्ध प्रतिभूतियों से जुड़ी अप्रकाशित कीमत संवेदनशील सूचना मुहैया कराने पर रोक लगाती है। हालांकि इसमें कहा गया है कि वैध मकसद के लिए सूचना साझा करना ड्यूटी या कानूनी उत्तरदायित्व का हिस्सा है। इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज के प्रबंध निदेशक श्रीराम सुब्रमण्यन ने कहा, दारोमदार समिति के सदस्यों पर है। उनके पास सूचनाएं होती हैं और वे इसकी रक्षा के लिए बाध्य हैं। हालांकि ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां ऐसी व्यवस्था या सरकार की तरफ से नियुक्त समिति ने नियमों का दुरुपयोग हुआ है।
13 जून को भारतीय रिजर्व बैंक ने दबाव वाले 12 बड़े खाते की पहचान की थी, जिसका निपटारा आईबीसी के जरिए करने की दरकार है। ये वैसे खाते हैं जहां लेनदारों का बकाया 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो और इसके 60 फीसदी हिस्से को एनपीए बताया गया हो। इस वास्तविकता से समस्या का अंदाजा लगाया जा सकता है कि करीब 10 लाख करोड़ रुपये के कर्ज को या तो गैर-निष्पादित आस्तियां या फिर दबाव वाले कर्ज के तौर पर वर्गीकृत किया गया है।

Keyword: दिवालिया संहिता, SEBI, bankruptcy code,
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