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ट्रकों पर रिपोर्टर : सरपट दौड़ने लगे हैं अब ट्रक

साहिल मक्कड़ /  07 19, 2017

अब क्लीयरेंस के लिए नाकों पर नजर नहीं आती ट्रकों की कतारें

बिजनेस स्टैंडर्ड ट्रकों पर रिपोर्टर : सरपट दौड़ने लगे हैं अब ट्रकवस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के दो सप्ताह बाद जमीन पर इसके असर को देखने, ट्रक ड्राइवरों का मिजाज भांपने और सरकारी दावों की पड़ताल के लिए बिज़नेस स्टैंडर्ड के संवाददाताओं ने दिल्ली से गुजरने वाले कई अहम राजमार्गों पर सामान से लदे ट्रकों में सफर किया। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के करीब नया बाजार मार्केट में चंबा मनाली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के ऑफिस के बाहर रूप मोहम्मद का ट्रक खड़ा है। आधी रात के बाद का समय है और मजदूर चंडीगढ़ जा रहे इस ट्रक में सामान लाद रहे हैं। 100 किलोग्राम सामान उठाने पर इन मजदूरों को 10 से 12 रुपये मेहनताना मिलता है। अमूमन 3 मजदूर एक रात में 50 से 60 टन सामान ट्रकों में लादते हैं और कमाई आपस में बराबर बांटी जाती है। एक कोने पर ट्रांसपोर्ट कंपनी के कर्मचारी देवेंद्र कुमार मजदूरों पर नजर रखे हुए हैं और साथ ही बिलों को भी पलट रहे हैं।

हर बिल या चालान पर जीएसटीएन संख्या है और एकीकृत जीएसटी की दर अंकित है। जीएसटी की दर 5 फीसदी से 18 फीसदी तक है। मोहम्मद जब ट्रक लेकर निकलेंगे तो उन्हें हर सामान के लिए बिल की जरूरत पड़़ेगी। अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए बिलों की जांच कर सकते हैं कि व्यापारियों ने आईजीएसटी की सही दर वसूली है और कोई भी सामान बिना बिल के नहीं ले जाया जा रहा है। चंबा मनाली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन जैसे कंपनियां एक शहर से दूसरे शहर सामान भेजने के लिए व्यापारी से प्रति किलोग्राम 1 से 5 रुपये तक वसूलते हैं। चंबा मनाली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के पास अपने कुछ ट्रक हैं और साथ ही वह मोहम्मद जैसे लोगों की भी सेवाएं लेती है। चंडीगढ़ सामान ले जाने के लिए मोहम्मद को 7,700 रुपये दिए गए।

कुमार ने मोहम्मद को बिल थमाते हुए कहा, 'जीएसटी लागू होने के बाद सामान की आवाजाही की मांग बढ़ गई है। अब हम ज्यादा ट्रक भेज रहे हैं।' 42 साल के मोहम्मद जल्दी में हैं। उन्होंने तड़के अपना सफर शुरू किया। मोहम्मद ने कहा, 'पिछले 15 दिन में दो चीजें बदली हैं। सामान की अवैध आवाजाही (बिना बिल के) खत्म हो गई है और नाकों पर कोई लाइन नहीं है।'

रास्ते में मोहम्मद ने एक दूसरी ट्रांसपोर्ट कंपनी के कर्मचारी वीरेंद्र कुमार को बैठाया। जिस ट्रक में कुमार जा रहे थे वह अंबेडकर विश्वविद्यालय के करीब खराब हो गया था। परेशान दिख रहे कुमार ने कहा, 'यह सारी गड़बड़ मोदी की वजह से हुई है। कारोबार चौपट हो गया है।' मोहम्मद ने जब कहा कि बिना बिल के सामान की आवाजाही 3 महीने में फिर से शुरू हो जाएगी तब जाकर कहीं कुमार का पारा ठंडा हुआ। उन्होंने कहा, 'अधिकारी सरकार के आदेश का पालन करते हैं। वे भ्रष्ट हैं और अब मोटा कमीशन मांगेंगे।' कुमार दिल्ली-हरियाणा सीमा से पहले उतर गए। 

मोहम्मद ने दिल्ली-हरियाणा सीमा पर कुंडली नाके को पार करते हुए कहा, 'पहले 70 फीसदी सामान बिना बिल के जाता था। अब हर सामान का बिल है।' इस नाके पर बिक्री के बिल नहीं देखे जाते हैं। वर्ष 2000 से इस रूट पर ट्रक चला रहे मोहम्मद के मुताबिक हरियाणा सरकार ने बिक्री कर के नाके नहीं लगाए हैं बल्कि नीली बत्ती वाली बलेरो गाडिय़ां यह काम करती हैं। इन गाडिय़ों में अधिकारी ट्रक ड्राइवरों का पीछा करते हैं। उन्होंने कहा, 'दिल्ली और पंजाब के उलट हरियाणा में अधिकारियों को रिश्वत देना मुश्किल है। वे कानून के मुताबिक मोटा जुर्माना वसूलते हैं।' 

शनिवार का दिन है और मोहम्मद को बिल की जांच के लिए नहीं रोका गया। तीन घंटे ड्राइव करने के बाद उन्होंने बिना किसी परेशानी के पानीपत और करनाल में दो टोल कलेक्शन नाके पार कर लिए। तब तक पौ फट चुकी थी और उजाला होने से मोहम्मद ने राहत की सांस ली। मोहम्मद ठेठ पंजाबी बोलते हैं और पंजाबी गीतों से अपने साथी मुसाफिरों का मनोरंजन करते हैं। अंबाला में उन्होंने दायीं तरफ मुड़कर पंचकूला का रुख करने का फैसला किया।

मोहम्मद ने कहा, 'मैं लालरू नाके पर समय बर्बाद नहीं करना चाहता हूं। इससे अच्छा है कि मैं पंचकूला होते हुए चंडीगढ़ जाऊं। इसमें एक घंटा ज्यादा लगेगा।' लालरू से वाहन पंजाब में प्रवेश करते हैं और वहां ट्रकों के दस्तावेजों और सामान के बिलों की जांच होती है। 

जीएसटी लागू होने से पहले ड्राइवरों को कभी-कभी दस्तावेजों की जांच पूरी कराने में एक पूरा दिन लग जाता था। इस नाके पर अब शायद ही कोई ट्रक क्लीयरेंस के लिए खड़ा नजर आता है। मोहम्मद ने रफ्तार बढ़ाने की कोशिश की। वह हर हाल में 8 बजे से पहले चंडीगढ़ पहुंचना चाहते हैं। लेकिन वहां पहुंचते ही अधिकारियों से बचने का सिलसिला खत्म हो गया। वर्दी पहने एक व्यक्ति ने ट्रक और दस्तावेजों की जांच के बहाने उन्हें रोका। कुछ ही मिनट में उन्हें आगे जाने की अनुमति मिल गई। बाद में मोहम्मद ने कहा कि वह आरटीओ का आदमी था और सारे कागजात होने के बावजूद उसे 100 रुपये देने पड़े। मोहम्मद ने कहा कि उसके लिए जीएसटी से कुछ नहीं बदला है।
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