बिजनेस स्टैंडर्ड - 'वैकल्पिक ढांचे में अभी लगेंगे 15-20 महीने'
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, October 28, 2021 11:15 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम कंपनिया खबर

'वैकल्पिक ढांचे में अभी लगेंगे 15-20 महीने'

सुब्रत पांडा और जयदीप घोष /  June 04, 2017

एचडीएफसी लाइफ और मैक्स लाइफ का विलय 9 महीने से ज्यादा वक्त से बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के पास अटका हुआ है। एचडीएफसी लाइफ के प्रबंध निदेशक व मुख्य कार्याधिकारी अमिताभ चौधरी ने सुब्रत पांडा और जयदीप घोष को दिए साक्षात्कार में कहा, वैकल्पिक ढांचे पर बात हुई है और अगले 45-60 दिनों में इस पर फैसला ले लिया जाएगा। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश...


मैक्स लाइफ के साथ विलय पर मौजूदा स्थिति क्या है?
हम एक ढांचे के साथ आईआरडीएआई के पास गए थे, जिसे नियामक ने ठुकरा दिया था और इसे अटॉर्नी जनरल को संदर्भित कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अटॉर्नी जनरल ने बिना किसी सिफारिश के फाइल लौटा दी है। लेकिन हमें इस पर कोई जानकारी अभी नहीं मिली है। अगर अटॉर्नी जनरल ने वास्तव में इसे वापस भेजा है तो आईआरडीएआई शायद ही हमारे हक में फैसला लेगा। उस स्थिति में हम विकल्प पर विचार करेंगे। या तो हम मौजूदा ढांचे में कुछ बदलाव करेंगे या अलग ढांचा सामने रखेंगे। हमें लगा था कि बीमा अधिनियम 1938 की धारा 35 नियामक को बीमा कंपनियों के विलय की मंजूरी का अधिकार देता है। हमने कभी भी यह नहीं सोचा था कि यह धारा सिर्फ एक बीमा कंपनी को दूसरी के साथ विलय की अनुमति देता है।

किस तरह का वैकल्पिक ढांचा है?
अगर हम वैकल्पिक ढांचा सामने रखते हैं तो हमें दोनों पक्षों के विभिन्न हितधारकों को संतुष्ट करना होगा। वैकल्पिक ढांचे के तहत दो बीमा कंपनियों का विलय होगा। इसके अतिरिक्त इसे यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सेबी की अनिवार्यताएं पूरी हुई हैं। अगर एचडीएफसी लाइफ सूचीबद्ध होती है और मैक्स फाइनैंशियल सर्विसेज के शेयरधारकों को एचडीएफसी लाइफ में लाती है तो कर का मसला सामने आएगा। हम जो भी ढांचा पेश करें, इसमें कम से कम 15-20 महीने का वक्त लगेगा क्योंकि इसे मैक्स लाइफ, मैक्स फाइनैंशियल सर्विसेज और एचडीएफसी लाइफ के शेयरधारकों को संतुष्ट करना होगा।

इसमें आरंभिक सार्वजनिक निर्गम की योजना कहां फिट बैठती है?
हम हमेशा से ही सूचीबद्ध होना चाहते थे। चूंकि विलय में समय लग रहा है, लिहाजा हमने आईपीओ पर आगे बढऩे के बारे में सोचा क्योंकि इसमें कम वक्त लगेगा। विलय का मतलब कल भी था, आज भी है और कल भी रहेगा। ऐसे में यह निश्चित तौर पर होगा। हम इसके लिए प्रतिबद्ध हैं। वास्तविकता यह है कि आईपीओ में भी मैक्स फाइनैंशियल के शेयरधारकों पर कोई असर नहीं होगा। पहले कदम के तौर पर हमें नियामक के साथ इस विलय को पूरा करना होगा।

क्या आपको लगता है कि यह सौदा मौजूदा प्रारूप में हो जाएगा?
हमें इस काम को पूरा करना ही है। या तो हमें सकारात्मक नतीजे मिलेंगे या फिर कुछ नहीं मिलेगा। अगर कुछ नहीं मिलेगा तो यह उद्योग के लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगा।

क्या सौदा पूरा होने के सकारात्मक संकेत हैं?
अभी सभी पक्षकार का ध्यान विलय पर केंद्रित है। हां, इसमें कुछ वक्त लग सकता है। हम सूचीबद्ध भी होना चाहते हैं। ऐसे में हम ऐसी योजना सामने रखना चाहते हैं, जिससे दोनों मकसद इस तरह से पूरा हो कि किसी को कोई नुकसान न हो। हम निश्चित तौर पर ऐसा ढांचा चाहते हैं जो नियामकों व शेयरधारकों की उम्मीद पर खरा उतरे। अगले 45 दिन में हमें इसके समाधान की उम्मीद है।

आईपीओ पेश होने में कितना वक्त लगेगा?
इसमें चार से पांच महीने लगेंगे।

अगले 45 दिन में आईपीओ पेश होगा या विलय होगा?
हम मौजूदा अध्याय बंद करने की कोशिश करेंगे। आगे के लिए हमारे पास योजना तैयार होगी और हमें शेयरधारकों खास तौर से मैक्स के शेयरधारकों को स्पष्टीकरण देना होगा। हम दोनों ही विलय के लिए प्रतिबद्ध हैं। लेकिन सबसे पहले हमें एक ढांचा सामने रखना होगा, जो हर किसी के लिए बेहतर हो।

बीमा क्षेत्र पर जीएसटी की दर 18 फीसदी होगी। क्या यह थोड़ा ज्यादा है?
यह थोड़ा ज्यादा है क्योंकि 18 फीसदी की दर हमारे अनुमान से ज्यादा है। मुझे लगता है कि प्रीमियम बढ़ेगा।

नोटबंदी का कैसा असर रहा?
वास्तव में नोटबंदी का नकारात्मक असर रहा।

Keyword: HDFC life, IRDAI, max life,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या चिप संकट के लंबा खिंचने से वाहन कंपनियों पर होगा व्यापक असर?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.