बिजनेस स?टैंडर?ड - मूल्य मानकों के उल्लंघन पर दवा नियामक सख्त
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मूल्य मानकों के उल्लंघन पर दवा नियामक सख्त

वीणा मणि / नई दिल्ली 05 18, 2017

एनपीपीए का कारण बताओ नोटिस

बिजनेस स?टैंडर?ड मूल्य मानकों के उल्लंघन पर दवा नियामक सख्तदवा कंपनियों को भेजे गए कारण बताओ नोटिस में राष्ट्रीय दवा मूल्य प्राधिकरण (एनपीपीए) ने कहा है कि भारत में तमाम कंपनियां नियामक की मंजूरी के बगैर दवाओं के दाम के मानकों का उल्लंघन कर दवाएं उतार रही हैं। एनपीपीए की सूची में 200 दवाएं हैं, जिनमें फिक्स्ड डोज कंबिनेशन (एफडीसी) और सभी बड़ी दवा कंपनियां शामिल हैं। एनपीपीए के कारण बताओ नोटिस में कहा गया है, 'यह स्पष्ट नहीं है कि इन फॉम्युलेशंस को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) से मंजूरी मिली है या नहीं, और क्या यह दवाएं कंबिनेशन वाली दवा के रूप में तार्किक हैं या नहीं, क्योंकि इसमें से ज्यादातर एफडीसी हैं।'

एनपीपीए के नोटिस में दवा कंपनियों पर आरोप लगाया गया है कि फार्म्‍युलेशन में बदलाव किया गया है, जो मूल्य नियंत्रण के दायरे में आता है, जिसमें दवा की ताकत या डोज में बदलाव किया जाता है। एनपीपीए किसी भी दवा की कीमत तय कर सकता है, जो शेड्यूल-1 के तहत आती हैं। एनपीपीए किसी भी नॉन शेड्यूल दवा की कीमतोंं की निगरानी कर सकता है। एनपीपीए यह भी सुनिश्चित कर सकता है कि इन दवाओंं की कीमतों में सालाना 10 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी न हो। 

औषधि मूल्य नियामक ने कंपनियों से कहा है कि वे बैचवार उत्पादन और बिक्री का विस्तृत ब्योरा दें, जिसमें अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) शामिल है। नोटिस में राज्य दवा नियामकों को बाजार मेंं बिकने वाली अनधिकृत दवाओं पर नजर रखने को कहा गया है। एनपीपीए ने उन दवा कंपनियों को लेकर सख्त रवैया अपनाया है, जो कथित रूप से निर्धारित मूल्य सीमा का उल्लंघन कर रही हैं। फरवरी में एनपीपीए ने 634 दवाओं का मूल्य ज्यादा लिए जाने को लेकर नोटिस भेजा था। इस बार भी एनपीपीए ने पाया कि इनकी संख्या अधिक है, इसलिए उन्हें सिर्फ कारण बताओ नोटिस भेजा गया है।  एनपीपीए मेडिकल उपकरणों जैसे हर्ट वाल्वों, ऑर्थोपैडिक इम्प्लांट्स व अन्य की कीमतों की निगरानी भी कर रहा है। 

तय समय में एनपीपीए को जवाब देंगे दवा विनिर्माता

भारत के दवा नियामक ने मंजूरी के बगैर मधुमेह व एंटीबॉयोटिक दवाओं को नए रूप में बेचे जाने को लेकर 65 घरेलू व विदेशी कंपनियों से मांगी गई सफाई पर कंपनियों ने जल्द अपना पक्ष रखने की बात कही है। इन कंपनियों में ऐबट लैबोरेटरीज, सनोफी, नोवार्तिस और भारतीय फर्में जैसे सन फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्रीज और ल्यूपिन शामिल हैं। एनपीपीए ने कहा है कि कंपनियोंं को 15 जून तक का वक्त दिया गया है, उसके बाद कार्रवाई की जाएगी। उद्योग संगठन इंडियन फार्मास्यूटिकल्स एलायंस के महासचिव डीजी शाह ने एक बयान में कहा कि संगठन उन कंपनियों के नाम का इंतजार करेगा, जिनके बारे में नियामक ने कहा है।

देश की बड़ी दवा निर्माता सनफार्मा के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी नियामक के नोटिस में सूचीबद्ध किए गए हर उत्पाद को देखेगी, जिससे स्थिति की जानकारी हो सके और समय पर उसका जवाब देगी। एक और दवा निर्माता ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स के प्रवक्ता ने भी ई मेल से भेजे जवाब में कहा कि कंपनी मूल्य प्राधिकरण को जल्द से जल्द जवाब भेजेगी।  अन्य कंपनियों से भी संपर्क करने की कवायद की गई, जिनसे तत्काल जवाब नहीं मिल सका है। भारत में बिकने वाली करीब आधी दवाएं दो या ज्यादा दवाओं का तय डोज का मिश्रण होती हैं, जिन्हें फिक्स्ड डोज कंबिनेशन कहा जाता है। पिछले साल स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस तरह के दवाओं के करीब 100 मिश्रण पर प्रतिबंध लगा दिया था, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाई गई थीं।

रायटर्स

Keyword: pharma, medicine, NPPA,,
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