बिजनेस स्टैंडर्ड - रोबोट का बढ़ता प्रयोग, रोजगार का घटता योग
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रोबोट का बढ़ता प्रयोग, रोजगार का घटता योग

सुदीप्त दे /  May 07, 2017

अगली बार जब नई नौकरी में आपकी दिलचस्पी जानने के लिए फोन कॉल आए तो हो सकता है दूसरे छोर पर किसी चैटबॉट के साथ आपकी बात हो रही हो। गुडग़ांव की मानव संसाधन (एचआर) कंपनी पीपुलस्ट्रॉन्ग किसी संभावित उम्मीदवार की नौकरी में दिलचस्पी जानने, उसका हुनर पता करने और मानव संसाधन से संबंधित दूसरे एचआर कार्यों के लिए पिछले छह महीने से चैटबॉट का इस्तेमाल कर रही है।

 
पीपुलस्ट्रॉन्ग के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) पंकज बंसल कहते हैं, 'हमने उम्मीदवार की नियुक्ति से पहले उसका मूल्यांकन करने के लिए जो नई व्यवस्था की है, उसमें 50 करोड़ रुपये खर्च कर किए हैं, लेकिन इससे कहीं ज्यादा हमें खर्च नियंत्रित करने में मदद मिली है।' पीपुलस्ट्रॉन्ग की तरह ही कई दूसरी कंपनियां भी ऐसा ही कर रही हैं। इस साल जनवरी में कानूनी सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी साइरिल अमरचंद मंगलदास ने अनुबंधों और अन्य कानूनी कागजात के विश्लेषण और क्लाउज खोजने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का इस्तेमाल करना शुरू किया। इस सॉफ्टवेयर को बनाने वाले अपनी वेबसाइट पर दावा करते हैं कि यह गुणवत्ता के साथ समझौता किए बिना अनुबंध समीक्षा में 20 से 90 प्रतिशत तक समय बचा सकता है। पिछले साल आईसीआईसीआई बैंक ने बार-बार होने वाले कामों के लिए सॉफ्टवेयर रोबोटिक्स इस्तेमाल करने की घोषणा की। बैंक ने कहा कि वह कारोबारी प्रक्रिया से जुड़े 500 कार्य सॉफ्टवेयर से संचालित करना चाहता है। आईटी सलाहकारों का कहना है कि कई कारोबारों में वित्तीय काम-काज के लिए अब ऑटोमेशन (स्वचालन, बिना मानव श्रम के) और डिजिटलाइजेशन (डिजिटल तकनीक) का सहारा लिया जा रहा है।
 
यह जरूर है कि ऑटोमेशन और डिजिटलाइजेशन से लोगों और प्रक्रियाओं की गुणवत्ता बढ़ती है मगर दूसरा पहलू यह है कि समय के साथ विभिन्न कार्य अब मानव श्रम के बजाय मशीनों और सॉफ्टवेयर से ही पूरे किए जाने लगे हैं। पिछले साल सॉफ्टवेयर सेवा प्रदाता कंपनी विप्रो ने 12,000 इंजीनियरों को दूसरी परियोजनाओं पर लगाया क्योंकि वे जो काम करते थे, वे सॉफ्टवेयर से ही होने लगे। इन्फोसिस ने करीब 8,500 लोगों के साथ भी यही किया। भारतीय वाहन उद्योग में भी कारखानों में नौकरियां कम होने लगी हैं क्योंकि मानव श्रम पर निर्भरता कम करने के लिए ऑटोमेशन एवं रोबोट का इस्तेमाल हो रहा है। इस बारे में वाहन उद्योग के एक अधिकारी ने कहा, 'पुरानी फैक्टरियों के मुकाबले कार बनाने वाली नई फैक्टरियों में विभिन्न नौकरियां 10 प्रतिशत तक कम हो सकती हैं।'
 
मानव संसाधन पेशेवेरों के संगठन एसएचआरएम इंडिया के प्रमुख (एडवाइजरी एवं नॉलेज) निशीथ उपाध्याय का कहना है कि ऑटोमेशन की सबसे अधिक मार जिन क्षेत्रों पर पड़ेगी उनमें ज्यादातर सूचना-प्रौद्योगिकी (आईटी), बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं, बैक-ऑफिस प्रोसेसिंग एवं ग्राहकों से दो चार होने वाली बुनियादी सेवाओं से संबंधित होंगे। कम कौशल और ऊंचे लेन-देन वाली नौकरियों पर ऑटोमेशन का सर्वाधिक असर पड़ेगा। एचआर विशेषज्ञों का कहना कि लेन-देन और प्रक्रियात्मक स्तर से संबंधित नौकरयिों के साथ ऐसा ही होगा।
 
इस साल के शुरू में मैकिंजी ऐंड कंपनी के एक अध्ययन में कहा गया कि भारत में 52 प्रतिशत नौकरियां ऑटोमेशन के हवाले हो सकती हैं या ऐसा होने की संभावना है। एचआर विशेषज्ञों का कहना है कि इससे करीब 23.3 करोड़ नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। एचएफएस इंडिया के एक सर्वेक्षण में कहा गया है कि 2021 तक भारत में 6.40 लाख नौकरियां आईटी ऑटोमेशन की भेंट चढ़ जाएंगी।
 
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हालांकि एचआर विशेषज्ञों का कहना है कि ऑटोमेशन की तरफ जाने में तीन से पांच साल लगेंगे। ऐसा भी नहीं होगा कि कुछ नौकरियां रातोरात गायब हो जाएंगी। रैंड्सटेड इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी मूर्ति के उप्पलुरी कहते हैं, 'भूमिकाएं एक जैसी हो जाने के कारण कुछ नौकरियां तो चली ही जाएंगी। उत्पादकता में सुधार करने के लिए ऑटोमेशन पर सबसे अधिक जोर दिया जाएगा।' ऑटोमेशन और डिजिटलाइजेशन से कुछ कार्यों की प्रकृति बदलेगी या इनका विलय होगा, साथ ही नए हुनर वाले काम आएंगे, जिनके लिए दूसरी कुशलता हासिल करने की जरूरत होगी। पीडब्ल्यूसी इंडिया के चेयरमैन श्यामल मुखर्जी कहते हैं, 'मानव और मशीन में मुकाबले जैसी कोई बात नहीं होगी। दोनों एक साथ काम करेंगे। जो काम बार-बार होते हैं, वे स्वचालित हो जाएंगे। लेकिन इससे नए कौशल सीखने के भी अवसर आएंगे।'
 
देश की तीनों शीर्ष आईटी कंपनियों टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (टीसीएस), इन्फोसिस और विप्रो ने डिजिटल तकनीक में प्रशिक्षित इंजीनियरों का दस्ता तैयार किया है। करीब 2 लाख कर्मचारियों को डिजिटल तकनीक का ज्ञान दिया गया है और 10 लाख टीसीएस में प्रशिक्षण पा रहे हैं। करीब 1.35 लाख सॉफ्टवेयर इंजीनियर डिजाइन थिंकिंग में प्रशिक्षित हो रहे हैं और 2,000 इन्फोसिस में मशीन लर्निंग में निपुण हैं। विप्रो के 61,000 कर्मचारी डिजिटल तकनीक कौशल से लैस हो चुके हैं। विप्रो के मुख्य कार्याधिकारी आबिदअली नीमचवाला कहते हैं, 'डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग के साथ हम अपने कर्मचारियों को डिजिटल कौशल प्रदान कर रहे हैं।' कंपनी ने वित्त वर्ष 2017 में 39,600 कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया है। हालांकि मानव संसाधन विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के उद्योग जगत तकनीकी और रोजगार की बदलती जरूरतों के साथ बदलाव तो कर रहे हैं, लेकिन यह अभी शुरुआत भर कही जा सकती है।
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