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बिक्री के लिए रफ्तार में जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर

देव चटर्जी / मुंबई April 12, 2017

भारतीय दूरसंचार टावर क्षेत्र में विलय एवं अधिग्रहण (एमऐंडए) जोरों पर है। हाल में भारती इन्फ्राटेल द्वारा 6,200 करोड़ रुपये के एक सौदे के तहत 10.3 फीसदी हिस्सेदारी एक निजी इक्विटी और एक पेंशन निवेशक को बेचे जाने के कुछ ही दिनों बाद बंबई स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर अपनी सहायक कंपनी चेन्नई नेटवर्क इन्फ्रास्ट्रक्चर (सीएनआईएल) में विलय के बाद करीब 10,000 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचने के लिए तैयार हो रही है।
इस सौदे से जुड़े एक बैंकर ने बताया कि यह मूल्यांकन हाल में इस क्षेत्र में हुए विलय एवं अधिग्रहण सौदों और वित्त वर्ष 2017-18 के लिए उसके खुद के आय अनुमानों के आधार पर किया गया है। जीटीएल इन्फ्रा पिछले साल सितंबर में रणनीतिक ऋण पुनर्गठन (एसडीआर) की प्रक्रिया शुरू की थी। लेनदार 4,500 करोड़ रुपये के ऋण को इक्विटी में तब्दील करेंगे और प्रवर्तक सहित सभी हितधारक इस हिस्सेदारी बिक्री के जरिये कंपनी से बाहर हो सकते हैं।
कंपनी ने इस बिक्री के लिए ईवाई और न्यूयॉर्क की निवेश बैंकिंग फर्म टैप एडवाइजर्स को नियुक्त किया है। साथ ही वह एकीकृत कंपनी के लिए बेहतर मूल्यांकन के साथ 2017-18 में 1,400 करोड़ रुपये एबिटा हासिल करने के लिए कोशिश कर रही है। ऋण को इक्विटी में बदलने के बाद अगले साल मार्च तक कंपनी को उसका कुल ऋण बोझ 8,200 करोड़ रुपये से घटकर 4,200 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है।
एकीकृत कंपनी के ऋण को ध्यान में रखते हुए एंटरप्राइज मूल्य (ईवी) 14,200 करोड़ रुपये होगा। ईवाई के पार्टनर अबिजर दीवानजी ने कहा, 'यह एसडीआर का यह पहला मामला है जहां बैंक किसी कंपनी की पूंजी को सही आकार देने के बाद उसे निवेशकों को बेच रहा है।' दूरसंचार टावर कंपनियां फिलहाल सुदृढीकण के दौर से गुजर रही हैं। भारत की सबसे बड़ी टावर कंपनी इंडस टावर्स करीब 12 अरब डॉलर यानी करीब 79,000 करोड़ रुपये का सौदा कर सकती है क्योंकि वोडाफोन और आइडिया सेल्यूलर अपनी हिस्सेदारी बेचने जा रही हैं। इंडस टावर्स के पास करीब 1,22,000 टावर हैं।
साल 2015 में अमेरिकन टावर कॉरपोरेशन ने व्योम नेटवक्र्स में श्रेय इन्फ्रास्ट्रक्चर और टाटा टेलीसर्विसेज से हिस्सेदारी खरीदी थी। व्योम नेटवक्र्स के पास 42,000 टावर हैं। पिछले महीने भारती एयरटेल ने 39,000 टावर वाली भारती इन्फ्राटेल में 10.3 फीसदी हिस्सेदारी 11 गुना ईवी/एबिटा मूल्यांकन पर 6,200 करोड़ रुपये में निजी इक्विटी फर्म केकेआर और कनाडा के पेंशन फंड सीपीपीआईबी को बेची है।
जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर ने 2010 में 8,000 करोड़ रुपये के एक सौदे के तहत सीएनआईएल में हिस्सेदारी खरीदी थी। साल 2012 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दूरसंचार लाइसेंस रद्द किए जाने से पूरे दूरसंचार उद्योग को झटका लगा और कंपनी का राजस्व एवं मुनाफा दोनों घट गया। लेकिन एयरसेल के टावर खरीदने के लिए कंपनी ने जो ऋण ले रखा था उससे उसकी वित्तीस सेहत खराब होने लगी। इसके अलावा अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस इन्फ्राटेल के साथ विलय की योजना भी पूरी नहीं हो सकी। पिछले साल सितंबर में 28,000 टावर के साथ जीटीएल इन्फ्रा ने एसडीआर की प्रक्रिया शुरू की थी।

Keyword: Telecom, towers, gtl infrastructure,
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