बिजनेस स्टैंडर्ड - केयर्न के निवेशक नहीं हुए खुश
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केयर्न के निवेशक नहीं हुए खुश

देव चटर्जी और कृष्ण कांत / मुंबई April 12, 2017

वेदांत की तरफ से केयर्न इंडिया का अधिग्रहण तेल उत्पादक के शेयरधारकों के चेहरे पर रौनक लाने में नाकाम रहा। वेदांत ने मंगलवार को विलय की प्रक्रिया पूरी कर ली। अगस्त 2010 में पहली बार इस अधिग्रहण की घोषणा हुई थी और उस समय के मुकाबले केयर्न इंडिया के शेयरधारक अब तक बाजार कीमत का 7.17 फीसदी गंवा चुके हैं। कच्चे तेल की स्थिर कीमतों के दम पर पिछले एक साल में कंपनी के शेयर की कीमत दोगुनी हुई है, बावजूद इसके ऐसा हुआ।
बुधवार को केयर्न इंडिया की मार्केट वैल्यू 58,000 करोड़ रुपये रही। जब वेदांत ने अगस्त 2010 में अधिग्रहण का ऐलान किया था तब कच्चा तेल 74.84 डॉलर प्रति बैरल पर था। तब से तेल की कीमतें 26 फीसदी घटकर 55.62 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है, लिहाजा भारतीय कंपनी को काफी झटका लगा। बाहरी कारकों के अलावा केयर्न इंडिया के निवेशकों को तब झटका लगा जब केयर्न इंडिया ने पुनर्खरीद या निवेशकों को विशेष लाभांश के तौर पर बांटने के बजाय जुलाई 2014 में कम दर पर 1.25 अरब डॉलर का कर्ज सेसा स्टरलाइट (अब वेदांत) को देने का फैसला लिया। बीएसई तेल व गैस सूचकांक इस अवधि में 40 फीसदी चढ़ा है। वेदांत व केयर्न ने अंतत: जून 2015 में विलय का ऐलान किया, जिसके बारे में कंपनी ने कहा कि यह विसाखित धातु व तेल उत्पादक कंपनी सृजित करेगा। यह विलय नई इकाई को केयर्न इंडिया के खाते में दर्ज 26,000 करोड़ रुपये की नकदी व इसके समतुल्य तक पहुंच बना देगा, जैसा कि इस साल 9 फरवरी को अपने प्रेजेंटेशन में बताया था।
प्रॉक्सी एडवाइजरी निकाय इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक व प्रबंध निदेशक श्रीराम सुब्रमण्यन ने कहा, अधिग्रहण के फायदे मिलने में समय लगेगा। तेल की घटती कीमतों ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे शेयरधारकों को रिटर्न नहीं मिला। इसके सबूत हैं कि 70 फीसदी विलय-अधिग्रहण छोटे शेयरधारकों के लिए रकम बनाने में नाकाम रहे हैं।
विश्लेषकों ने कहा, आने वाले दिनों में केयर्न इंडिया के अल्पांश शेयरधारकों को संयुक्त इकाई में रकम बनाना और मुश्किल हो सकता है। एक विश्लेषक ने कहा, केयर्न इंडिया के शेयरधारक उच्च रिटर्न, नकदी के मामले में संपन्न व कर्ज मुक्त कंपनी के बदले कम रिटर्न व कर्ज से लदी कंपनी के साथ जा रहे हैं।
केयर्न इंडिया का इक्विटी पर रिटर्न की दर पिछले पांच सालों में औसतन 15.9 फीसदी रहा है, जो वेदांत के एकल रिटर्न की दर 9.3 फीसदी के मुकाबले काफी ज्यादा है। इसमें स्टरलाइट इंडस्ट्रीज के आंकड़े शामिल हैं, जिसका विलय साल 2013 में सेसा गोवा के साथ कर वेदांत बनाया गया। वित्त वर्ष 2016 के आखिर में एकल आधार पर वेदांत का कुल कर्ज करीब 37,000 करोड़ रुपये था और कर्ज-इक्विटी अनुपात करीब शून्य।
विश्लेषकों ने यह भी कहा कि वेदांत का मूल धातु व खनन कारोबार कुछ सालों के बंपर मुनाफे के बाद कमजोर मांग व कम लाभ के चलते काफी उतारचढ़ाव वाला रहा है। इसकी तुलना में केयर्न इंडिया का तेल व गैस खोज कारोबार ज्यादा स्थिर है। वेदांत का नियोजित पूंजी पर रिटर्न एकीकृत आधार पर पिछले 10 साल में से छह साल तक एक अंक में रहा है। जबकि केयर्न का सिर्फ एक बार 10 फीसदी से नीचे गया है।

Keyword: Cairn india, vedanta limited, merger,
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