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आधार की हिफाजत के क्या हों जतन?

सायन घोषाल और सुदीप्त दे /  April 09, 2017

लोगों की पहचान, सूचनाओं और प्रमाणीकरण संबंधी रिकॉर्ड की सुरक्षा के लिए आधार अधिनियम 2016 में दिए गए प्रावधान पर एक नजर...
डेटा सुरक्षा के लिए भारतीय विशिष्टï पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के तहत किन दायित्वों का उल्लेख किया गया है?
आधार अधिनियम 2016 के अनुसार, व्यक्तियों की पहचान, उनकी सूचनाओं और प्रमाणीकरण संबंधी रिकॉर्ड की गोपनीयता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी यूआईडीएआई की है। उसे ऐसे तमाम आवश्यक उपाय करने होंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उसके कब्जे अथवा नियंत्रण में (सेंट्रल आइडेंटिटी डेटा रिपॉजिटरी के डेटा सहित) सूचनाएं सुरक्षित हैं और उन्हें कोई ऐक्सेस नहीं कर सकता। आधार अधिनियम के तहत इन सूचनाओं के इस्तेमाल अथवा बिना अनुमति के खुलासे पर रोक लगाई गई है।
यूआईडीएआई ने आधार संख्या के लिए व्यक्तियों के पंजीकरण के साथ-साथ प्रमाणीकरण के समय आधार डेटा सुरक्षा के लिए कई नियम कायदे बनाए हैं। पंजीकरण एजेंसियों और प्रमाणीकरण एजेंसियों द्वारा आधार डेटा को जुटाने, उसका संग्रह करने और उसके इस्तेमाल के लिए विस्तृत नियम बनाए गए हैं। इसलिए पंजीकरण एवं प्रमाणीकरण एजेंसियों, बाहरी परामर्शदाताओं और सलाहकारों पर तकनीकी एवं संगठनात्मक सुरक्षा उपाय भी लागू होते हैं।

क्या इस कानून में कोई ऐसा प्रावधान है जिसके तहत कोई व्यक्ति खुद की पहचान सूचनाओं को किसी भी सूरत में ऐक्सेस कर सके?
कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं कर सकता। कोई भी व्यक्ति मालिक की सहमति के बिना आधार संख्या की सूचनाओं को जुटा नहीं सकता और न ही उसका संग्रह या इस्तेमाल कर सकता है। इस कानून के तहत आधार संख्या के प्रकाशन पर भी पाबंदी लगाई गई है। आधार संख्या धारक कानून में बताए गए तरीके से अपनी पहचान संबंधी सूचनाओं तक पहुंचने के लिए यूआईडीएआई से आग्रह कर सकता है। लेकिन इस कानून के तहत आधार संख्या धारक द्वारा उनकी प्रमुख बायोमेट्रिक सूचनाओं को ऐक्सेस करने का कोई प्रावधान नहीं है। इस कानून में विशेष तौर पर कहा गया है: 'इस कानून के तहत संग्रहीत अथवा सृजित कोई भी प्रमुख बायोमेट्रिक सूचना (क.) किसी भी कारण से किसी को भी नहीं बताया जाएगा अथवा (ख.) आधार संख्या के सृजन और प्रमाणीकरण के अलावा किसी अन्य उद्देश्य से उसका इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।' इसलिए यूआईडीएआई को किसी भी व्यक्ति के फिंगर प्रिंट, आइरिस स्कैन एवं अन्य बायोजॉजिकल डेटा का इस्तेमाल आधार संख्या के सृजन एवं प्रमाणीकरण के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए करने की अनुमति नहीं है।

यदि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत सूचनाओं की गोपनीयता भंग होती है अथवा उसका दुरुपयोग किया जाता है तो उसे क्या करना चाहिए?

कानून के अनुसार, आधार डेटा के किसी भी दुरुपयोग के लिए केवल यूआईडीएआई को शिकायत दर्ज करने के लिए प्राधिकृत किया गया है। पीडि़त व्यक्ति को सबसे पहले अपनी शिकायत के साथ यूआईडीएआई से संपर्क करना होगा। यूआईडीएआई उस व्यक्ति की वैधता के सत्यापन के बाद जांच एजेंसियों के पास शिकायत भेजेगा। इस कानून के तहत अपराध की जांच कम से कम इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी द्वारा की जाएगी।
इस कानून के तहत केवल मुख्य महानगरीय दंडाधिकारी अथवा मुख्य न्यायिक अधिकारी दंड दे सकता है।

आधार डेटा के किसी भी दुरुपयोग के लिए किन अपराधों और दंडों का उल्लेख किया गया है?
आधार संख्या की सूचनाओं के आधार पर आधार संख्या धारक को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी व्यक्ति अथवा गलत जानकारी, बायोमेट्रिक सूचनाएं मुहैया कराते हुए खुद को उसके बदले पेश करना एक दंडनीय अपराध है जिसके लिए तीन साल की कैद और/अथवा 10,000 रुपये का जुर्माना अथवा दोनों हो सकता है। इसी प्रकार अनधिकृत तौर पर व्यक्ति की पहचान संबंधी सूचनाएं जुटाने के लिए तीन साल तक की कैद अथवा 10,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। कंपनी के मामले में जुर्माने की रकम बढ़कर 1,00,000 रुपये तक हो सकती है। निशीथ देसाई एसोसिएट्ïस के पार्टनर वैभव पारिख के अनुसार, हैकिंग, पहचान की चोरी, निजता का हनन और डेटा की गोपनीयता भंग करने के लिए भी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत दंड का प्रावधान है।
 

Keyword: aadhar, Deta security, UIDAI,
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