बिजनेस स्टैंडर्ड - भारत में आईएसआईएस का उभार और विस्तार
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भारत में आईएसआईएस का उभार और विस्तार

साहिल मक्कड़ /  04 02, 2017

आतंकी साया


भारत में तेजी से जड़ें जमा रही आईएसआईएस की वैश्विक आतंकी विचारधारा पर काबू पाना सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों के लिए कड़ी चुनौती के रूप में उभरा

बिजनेस स्टैंडर्ड भारत में आईएसआईएस का उभार और विस्तारमई 2014 में महाराष्ट्र के चार मुस्लिम युवक पूरी दुनिया में इस्लामी राज्य की स्थापना के मकसद से गठित आतंकी संगठन आईएसआईएस से जुड़ने के लिए सीरिया चले गए थे। वहां पर उन युवकों ने हथियार चलाने का प्रशिक्षण लिया और फिर आईएसआईएस के लड़ाकों के साथ लड़ाई के मैदान में भी कूद गए। करीब छह महीने बाद उनमें से अरीब मजीद नाम के एक युवक का मन इस लड़ाई से उचट गया और वह भारत लौटने के बारे में सोचने लगा। दरअसल सीरिया में जारी लड़ाई के दौरान उसे दो बार गोली लग चुकी थी और एक बार तो वह गठबंधन सेनाओं के हवाई हमले में भी बाल-बाल बचा था। 

अरीब ने भारत लौटने के लिए तुर्की स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास से संपर्क साधा और जरूरी दस्तावेज मुहैया कराने की दरखास्त की। दूतावास ने भी उसे आपातकालीन सर्टिफिकेट दे दिया और उसने मुंबई आने वाली उड़ान पकड़ ली। लेकिन नवंबर 2014S में मुंबई हवाई अड्डों पर उतरते ही सुरक्षा एजेंसियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया। यह पहला मौका था आईएसआईएस से जुड़े किसी शख्स को भारत में पकड़ा गया था। आतंकी घटनाओं की जांच के लिए गठित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अरीब मामले की जांच का जिम्मा मुंबई पुलिस से अपने हाथों में ले लिया। अरीब से कई दिनों तक चली पूछताछ के दौरान एनआईए ने आईएसआईएस के मंसूबों और भारत में उसकी साजिशों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की। 

अरीब से पूछताछ में जांच एजेंसियों को यह पता चला कि भारत के कई युवा इस खूंखार आतंकी संगठन से प्रभावित होकर उससे जुडऩे लगे हैं। इनमें से कई तो इंजीनियर जैसे काफी पढ़े-लिखे युवा भी हैं। दरअसल वर्ष 2013 में आईएसआईएस के लड़ाकों ने जैसे-जैसे इराक और सीरिया के प्रमुख ठिकानों पर कब्जा जमाना शुरू किया, ये मुस्लिम युवा उसकी तरफ आकर्षित होते चले गए। पूरी दुनिया में इस्लामी खिलाफत वाली हुकूमत स्थापित करने के इरादे से गठित इस आतंकी संगठन की फौरी कामयाबी ने भारतीय युवाओं को इस कदर बरगलाया कि वे इंटरनेट पर मौजूद उसके वीडियो की तलाश करने लगे।

आईएसआईएस अपने विदेशी बंधकों की नृशंस तरीके से हत्या करने का वीडियो इंटरनेट पर अपलोड करता रहा है। इसके अलावा प्राचीन ऐतिहासिक विरासत वाली जगहों को भी नष्ट करने और शराब एवं सिगरेट बनाने वाले कारखानों को बरबाद करने की विध्वंसक घटनाओं ने भी इन युवकों को आईएसआईएस के प्रति आकर्षित करने का काम किया था।  

बिजनेस स्टैंडर्ड भारत में आईएसआईएस का उभार और विस्तारआईएसआईएस के इन वहशी कारनामों के बारे में जानकारी इंटरनेट पर पर्याप्त मात्रा में मिल जाती थी। रही-सही कसर सोशल मीडिया और मोबाइल ऐप पूरी कर देते थे। खिलाफत साम्राज्य का योद्धा बनने की ललक पाले बैठे ये युवा अक्सर अनवर अवलाकी, अब्दु समी कासमी, मिराज रब्बानी, तौसिफ उर रहमान, जर्जीस अंसारी और जकीर नाइक जैसे कट्टïरपंथी इस्लामी प्रचारकों की तकरीरें भी डाउनलोड करके सुनते रहते थे। आईएसआईएस का मुखपत्र कही जाने वाली पत्रिका दाबिक के भी ये युवा पाठक बन गए थे। इन सब घटनाओं को देखकर और तमाम लोगों की बातें सुनकर इन युवाओं को यह यकीन हो चला था कि आईएसआईएस पूरी दुनिया के सुन्नी मुसलमानों के अधिकार और सम्मान के लिए जंग लड़ रहा है। 

एनआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि भारत के इन बहके हुए युवाओं का असल में आईएसआईएस के नेतृत्व या उनके सिपहसालारों से कोई सीधा संपर्क नहीं था। विदेश में रहकर इस आतंकी संगठन के लिए दुष्प्रचार करने वाले लोग इन युवाओं पर आसानी से यकीन भी नहीं करते थे। उस अधिकारी का कहना है, 'आईएसआईएस किसी युवा को अपने साथ जोडऩे के पहले कई महीनों तक उसे निगरानी सूची में रखता है। आईएसआईएस इसके लिए सोशल मीडिया साइट्स की जगह कूटबद्ध नामों से चलने वाले मोबाइल ऐप और वेबसाइट का इस्तेमाल करता है। इस वजह से खुफिया एजेंसियों के लिए उन पर निगाह रख पाना काफी मुश्किल हो जाता है। रंगरूटों को सीरिया तभी बुलाया जाता है जब आईएसआईएस के भीतर का कोई शख्स उनकी तगड़ी सिफारिश करे।'

उस अधिकारी का कहना है कि आईएसआईएस में भर्ती होने वाले नए लड़ाकों को सबसे पहले एक शपथपत्र पर दस्तखत करने होते हैं जिसमें इस्लामी खिलाफत के प्रति जुड़ाव का भरोसा दिलाने का जिक्र होता है। उसके बाद रंगरूटों को उस शपथपत्र को स्कैन करके अपने ऑनलाइन हैंडलर को ईमेल के जरिये भेजना होता है। जहां तक अरीब और उसके दोस्तों का मामला है तो शपथपत्र आईएसआईएस के सरगना अबु बकर अल बगदादी के नाम पर बनवाया गया था।

आईएसआईएस में शामिल होने के लिए जाने वाले अधिकतर युवा मक्का में धार्मिक यात्रा उमरा के नाम पर रवाना होते हैं। यह धार्मिक यात्रा साल में किसी भी समय की जा सकती है लिहाजा रंगरूटों के लिए इसका बहाना बनाकर निकलना आसान होता है। लेकिन मक्का पहुंचने के बाद वे गायब हो जाते हैं और तुर्की, इराक और सीरिया पहुंचकर आतंकी संगठन का हिस्सा बन जाते हैं।

बिजनेस स्टैंडर्ड भारत में आईएसआईएस का उभार और विस्तारभारत के युवाओं के आईएसआईएस से जुडऩे के कई मामले अब तक सामने आ चुके हैं। केंद्र सरकार ने अब तक आईएसआईएस से संबंध रखने के आरोप में 75 युवाओं को गिरफ्तार किया है। इनमें सबसे ज्यादा 21 युवक केरल से ताल्लुक रखते हैं जबकि तेलंगाना के 16 और कर्नाटक के नौ युवक गिरफ्तार किए जा चुके हैं। महाराष्ट्र के आठ, मध्य प्रदेश के छह, तमिलनाडु और उत्तराखंड के चार-चार, उत्तर प्रदेश के तीन, राजस्थान के दो और जम्मू कश्मीर एवं पश्चिम बंगाल के एक-एक युवक भी इस खूंखार आतंकी संगठन से संबंध रखने के आरोप में पकड़े जा चुके हैं।

आईएसआईएस के प्रति भारतीय युवकों में आकर्षण पैदा होने के मामले हाल ही में बढ़े हैं। कुछ साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि भारत में आईएसआईएस का एक भी संदिग्ध आतंकी नहीं पकड़ा गया है। लेकिन पिछले दो वर्षों में पकड़े गए लोगों को देखकर कहा जा सकता है कि अब देश के लगभग सभी इलाकों में इस आतंकी संगठन के प्रति सहानुभूति रखने वाले लोग मौजूद हैं। 

इससे सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की चुनौतियां और भी बढ़ गई हैं। देश की बड़ी आबादी पर निगरानी रख पाने में नाकामी के ही चलते भोपाल-उज्जैन सवारी गाड़ी में कम क्षमता वाले धमाके को रोका नहीं जा सका। इस महीने की शुरुआत में हुई इस आतंकी घटना में 10 लोग घायल हुए थे। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने फौरन ही एक संदिग्ध हमलावर को लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके में मार गिराया जबकि आठ अन्य लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। खुफिया एजेंसियों को हाल की कुछ घटनाओं से यह धारणा पुख्ता हुई है कि सीरिया या इराक की यात्रा के बगैर भी ये युवा आईएसआईएस के आतंकी नेटवर्क का हिस्सा बनने लगे हैं। इनमें से कुछ लोग को पश्चिम एशियाई देशों में नौकरी करते समय आतंकी विचारधारा से प्रभावित हो गए। उसके बाद उन्हें बाकायदा प्रशिक्षण देकर भारत भेजा गया ताकि वे आतंक फैलाने के मकसद को अंजाम देने के लिए स्थानीय लोगों को अपने साथ जोड़ें। 

एक खुफिया अधिकारी के मुताबिक, 'पश्चिम एशिया के देशों में काम करने वाले भारतीयों की अच्छी खासी तादाद है। उनमें से कुछ कट्टरपंथी धारा की ओर मुड़ गए और हमारा मानना है कि वे भारत में आतंकी गतिविधियां चलाने के लिए धन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। वे हवाला रैकेट के जरिये आतंकियों को पैसे भेज रहे हैं।' उनका मानना है कि इसकी वजह से समस्या अधिक गंभीर हो गई है। इससे सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं।

पिछले साल पुलिस ने हैदराबाद में पांच लोगों को आतंकी हमले की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उन लोगों ने सीरिया जाकर आईएसआईएस के लिए लडऩे की कई कोशिशें की थीं और फिर भारत में ही रहते हुए नए लोगों को आतंकी नेटवर्क से जोडऩे की कोशिश कर रहे थे। एनआईए ने उनके पास से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क, सेमी-ऑटोमेटिक पिस्तौल, एयर राइफल, पेलेट, निशाने के अभ्यास में इस्तेमाल होने वाले बोर्ड, धमाकों के लिए ट्रायसिटोन ट्राइपरऑक्साइड बनाने वाला रसायन और कैपेसिटर भी बरामद किए।

उन लोगों ने पूछताछ में कुछ ऐसी बात बताई जिसने खुफिया एजेंसियों को अचंभित कर दिया। उनका कहना था कि वे न तो कभी सीरिया या इराक गए थे और न ही वे कभी किसी आईएसआईएस विचारधारा से जुड़े किसी भारतीय शख्स के संपर्क में थे। उन लोगों ने तो आतंकी विचारधारा से प्रेरित होकर खुद ही एक संगठन बना लिया था और अब आतंकी घटना को अंजाम देने की कोशिश कर रहे थे। एनआईए का कहना है कि ये लोग विदेश में रहने वाले आईएसआईएस आकाओं के संपर्क में बने हुए थे और उनसे संपर्क साधने के लिए कूट भाषा वाले ईमेल का इस्तेमाल करते थे। इसके अलावा ये संदिग्ध आतंकी अलकायदा की प्रचार इकाई अल-फज्र मीडिया सेंटर की तरफ से तैयार किए गए कूटबद्ध प्रोग्राम अम्न अल मुजाहिद का भी इस्तेमाल कर रहे थे। उन्होंने अपनी साजिश को अंजाम देने के लिए अन्य लोगों को भर्ती की, पैसे जुटाए और धमाका करने वाले साजो-सामान भी खरीदे।

इसने केंद्रीय गृह मंत्रालय के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के अधिकारियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। पहला डर यह है कि कहीं ब्रिटिश संसद को जिस तरह से अकेले हमलावर ने निशाना बनाया, कहीं भारत में भी कोई अकेला हमलावर (लोन वोल्फ) ही भारत में ऐसी वारदात न कर दे। दूसरा डर, विभिन्न तरह के आतंकी मॉड्यूल अब सक्रिय हो चुके हैं जिन्हें थोड़े समय में ही हमला करने का निर्देश दिया जा सकता है। तीसरा डर यह है कि आतंकी की घुट्टी पी चुके कुछ युवाओं ने हथियार और गोला-बारूद के लिए उग्रवादी संगठनों से भी संपर्क साधना शुरू कर दिया है।

एनआईए ने पिछले साल जुलाई में आईएसआईएस के संदिग्ध आतंकी और लोन वोल्फ कहे जा रहे मोहम्मद मूसा को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया था। वह मदर टेरेसा की संस्था मिशनरीज ऑफ चैरिटी के कोलकाता मुख्यालय और विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने की फिराक में था। जांच से पता चला कि मूसा लगातार बांग्लादेश के आतंकी संगठन जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) के संपर्क में था। जेएमबी को ही ढाका के होली आर्टिसन कैफे पर हमले के लिए जिम्मेदार माना जाता है जिसमें 20 लोग मारे गए थे। 

कुछ जांचकर्ताओं का मानना है कि आईएसआईएस भारत की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। इसकी वजह यह है कि आईएसआईएस की विचारधारा लश्कर या इंडियन मुजाहिदीन जैसे संगठनों की तरह संगठित नेटवर्क तक ही सीमित नहीं है। एनआईए के एक अधिकारी ने कहा, 'अगर हम इंडियन मुजाहिदीन के किसी एक सदस्य को गिरफ्तार करते हैं तो हम देश भर में फैले उसके नेटवर्क तक पहुंच सकते हैं। लेकिन आईएसआईए के मामले में हरेक मॉड्यूल अलग-अलग है। उनका संचालन भी संभवत: विदेश में बैठे अलहदा हैंडलर के पास होता है।'

खुफिया अधिकारियों का मानना है कि भारत में आईएसआईएस की गतिविधियों पर काबू पाने के लिए जरूरी है कि जिस पर भी संदेह हो उस पर लगातार तकनीकी और इंसानी निगरानी रखी जाए। इसके लिए भारतीय अधिकारी आईएसआईएस नेटवर्क की समस्या का सामना कर रहे तमाम देशों के खुफिया विभाग के साथ लगातार संपर्क में रह रहे हैं। उन्हें भी बखूबी अहसास है कि यह चुनौती काफी मुश्किल साबित होने जा रही है।

Keyword: ISIS, Syria, India, Terrorist,
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