बिजनेस स्टैंडर्ड - अन्य मेडिकल उपकरणों की बारी
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अन्य मेडिकल उपकरणों की बारी

वीणा मणि / नई दिल्ली March 27, 2017

कोरोनरी स्टेंट की कीमतें तय करने के बाद राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) अन्य मेडिकल उपकरणों की कीमतों के नियंत्रण की कवायद में जुट गया है। एनपीपीए ने आज इस मसले पर विचार करने के लिए इंट्रा ऑकुलर लेंस विनिर्माताओं से मुलाकात की। इसके बाद प्राधिकरण की योजना इस सप्ताह ऑर्थोपैडिक इंप्लांट विनिर्माताओं से मुलाकात की है। इन दोनों श्रेणियों के उपकरण मूल्य नियामक के निशाने पर हैं, जिनके  दाम मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाने पर विचार हो रहा है।
मेडिकल उपकरणों की कीमतें कम करने की दिशा में कोरोनरी स्टेंट के दाम तय करना पहला कदम था। इस साल फरवरी महीने में मूल्य नियामक ने कोरोनरी स्टेंट की कीमतें 85 प्रतिशत तक घटा दी थी।
इसके बाद से मेडिकल उपकरण विनिर्माताओं की सोच में बदलाव आया है। एक बहुराष्ट्रीय उपकरण विनिर्माता कंपनी के सीईओ ने कहा, 'कोरोनरी स्टेंट के दाम तय किए जाने के फैसले ने हमें हिलाकर रख दिया है।'  उन्होंने कहा, 'एनपीपीए ने एक बार में इसकी कीमतें 85 प्रतिशत तक कम कर दी। एनपीपीए इस तरह से कीमतों में कमी करे, इससे बेहतर यह है कि हम स्वनियमन का विकल्प अपनाएं।'
मेडिकल उपकरणोंं के घरेलू विनिर्माताओं ने औषधि विभाग (डीओपी) को लिखे पत्र में कहा है कि वे स्वैच्छिक रूप से गैर अनुसूचित उपकरणों, जो डीपीसीओ 2013 में शामिल हैं, के दाम कम करने की कोशिश करेंगे। औषधि मूल्य आदेश एनपीपीओ को उन दवाओं के दाम पर नियंत्रण रखने के निर्देश देता है, जो अनुसूची 1 में शामिल हैं और नियामक को शेष गैर अनुसूचित दवाओं के दाम की निगरानी करनी होती है। इसके अलावा औषधि मूल्य आदेश में एनपीपीए को यह भी अधिकार दिया गया है कि वह उपभोक्ताओं के हितों में गैर अनुसूचित दवाओं के दाम भी तय करे।
एसोसिएशन आफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (एआईएमईडी) के मंच समन्वयक राजीव नाथ कहते हैं कि दवा मूल्य नियंत्रण आदेश 2013 (डीपीसीओ 2013) में दवाओंं के दाम तय करने को लेकर बुनियादी मसला है। उनके मुताबिक मेडिकल उपकरणों के वितरण के कई तरीके हैं। इसके अलावा कई तरह के इंट्रा ऑकुलर लेंस या ऑर्थोपैडिक इंप्लांट्स हैं, इस
तरह से एक आकार सबसे लिए फिट नहींं बैठता। उन्होंने कहा, 'हम अपनी कीमतें नीचे लाएंगे और सुनिश्चित करेंगे कि मुनाफा तार्किक हो। हमने विभाग को इसके बारे में पत्र लिखा है, लेकिन हमारे प्रस्ताव पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।'
इंट्रा ऑकुलर लेंस तीन तरह के होते हैं- रिजिड प्लास्टिक, फोल्डेबल और रिफ्रैक्टिव लेंसेज। अनुमान के मुताबिक 15 प्रतिशत इंट्रा ऑकुलर लेंसों का आयात होता है, जबकि शेष का घरेलू स्तर पर विनिर्माण होता है। इन लेंसों को बनाने वाली कंपनियों में बाउस्च ऐंड लोंब, ऑरो लैबोरेटरीज, जॉनसन ऐंड जॉनसन, नोवार्तिस शामिल हैं।
कीमतों पर नियंत्रण की पूरी संभावना को देखते हुए दवा कंपनियों की लॉबी चाहती हैं कि औषधि विभाग एक तकनीकी सलाहकार बोर्ड का गठन करे, जिसमें उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी शामिल हों। एनपीपीए ने उद्योग के सिर्फ 18 प्रतिशत मूल्य पर सीमा लगाई है।
वे चाहते हैं कि  दवाओं के दाम तय करते समय और उसमें बदलाव के समयएनपीपीए  इस समूह से सलाह ले। इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपनाथ रॉयचौधरी कहते हैं, 'कभी कभी डीपीसीओ 2013 की गलत व्याख्या की जाती है।' उनका कहना है, 'एक ही दवा की सभी मात्रा एक जैसी नहीं होती। एक प्लेन कोटेड टैबलेट, एक्सटेंडेड रिलीज टैबलेट से अलग होता है। इसलिए उसका अलग मूल्य उचित है।'

Keyword: NPPA, stent, medical equipment,
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