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पुराने रुख पर कायम आरबीआई
अनूप रॉय / मुंबई March 07, 2017

दिल्ली उच्च न्यायालय में बुधवार को होने वाली सुनवाई के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक पहले से तय कीमत के हिसाब से टाटा की तरफ से एनटीटी डोकोमो को किए जाने वाले भुगतान की अनुमति न देने के अपने रुख में शायद ही बदलाव करेगा। आंतरिक तौर पर आरबीआई का मानना है कि इसी तरह से भविष्य में सौदे होने वाले हैं और विदेशी विनिमय प्रबंधन अधिनियम (फेमा) में संशोधन यह प्रतिबिंबित करने के लिए किया जाना चाहिए कि विदेशी निवेशकों के लिए उचित संरक्षण मौजूद हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय में केंद्रीय बैंक सुनवाई के दौरान मौजूद रहेगा और यह ऐसे समय में हो रहा है जब टाटा व डोकोमो ने अदालत को सूचित किया है कि वे आपसी सहमति से मामले के निपटान की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि इसकी जड़ में विवाद यह है कि टाटा की तरफ से डोकोमो को उसकी हिस्सेदारी के लिए पहले से 58.045 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से भुगतान किया जाएगा, जो अक्टूबर 2009 में दोनों कंपनियों के बीच हुए समझौते के दौरान टाटा टेली के शेयर कीमत का आधा है।
आरबीआई के सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय बैंक इस व्यवस्था के खिलाफ नहीं है, लेकिन वह नियम नहीं तोड़ सकता। आरबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, हमारा आंतरिक आकलन यह है कि इसी तरह से अंतरराष्ट्रीय समझौते होते हैं और भविष्य में होने वाले सौदे का ढांचा भी ऐसा ही होगा। हमने इस पर पिछली बार सरकार को सुझाव दिया था, लेकिन सरकार ने इस पर यह कहते हुए कदम नहीं बढ़ाया कि नियम तो नियम होता है।
इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक ने फेमा अधिनियम को संशोधित कर दिया है और कहा है कि 13 फरवरी 2009 से पहले मौजूद दिशानिर्देश के तहत हुए किसी विदेशी निवेश के लिए इन दिशानिर्देशों की पुष्टि की खातिर किसी तरह के संशोधन की दरकार नहीं होगी। इस तारीख के बाद होने वाले सभी निवेश नए दिशानिर्देश के दायरे में आ जाएंगे। इस दिशानिर्देश में कहा गया है कि सेबी व आरबीआई के नियम के तहत कीमत तय होनी चाहिए।
आरबीआई ने मई 2010 में कहा ता कि अप्रवासी (इस मामले में डोकोमो) की तरफ से प्रवासी को होने वाला हस्तांतरण तय कीमत के नियम के आधार पर होना चाहिए।
अप्रवासी की तरफ से किसी प्रवासी को बिक्री के जरिए होने वाले शेयर हस्तांतरण की कीमत न्यूनतम कीमत से ज्यादा नहीं होना चाहिए। यह सेबी की तरफ से तय शेयर कीमत फॉर्मूला के तहत होना चाहिए, जो पिछले कुछ महीने की ट्रेडिंग प्राइस का औसत होता है।
इसका मतलब यह हुआ कि डोकोमो अपने हिस्से की बिक्री पहले से तय 58.045 रुपये से भी कम पर करने के लिए नियम से बंधी है, चाहे अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत ने फैसला दिया है कि टाटा तय कीमत का भुगतान करे। आरबीआई ने सरकार को ईमेल भेजा है, जिसमें कहा गया है कि निकासी की सुनिश्चित कीमत की गारंटी वाली व्यवस्था निवेश निकालने के प्रावधान के अनुरूप नहीं है।
हालांकि यहां बड़ा मसला निवेश से जुड़े अनुबंध में प्रतिबद्धता व निवेश में गिरावट के संरक्षण को लेकर है, न कि सुनिश्चित रिटर्न को लेकर। इसके अलावा हाल के समय में एफडीआई के लेकर हमारे रणनीतिक संबंध को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। आरबीआई के पत्र में कहा गया है, इसे देखते हुए हम इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेंगे और भविष्य में ऐसे सभी मामलों में ऐसा ही सिद्धांत लागू होगा। हालांकि सरकार ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया।
अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत की तरफ से डोकोमो के हक में फैसला आने के बाद टाटा संस ने दिल्ली उच्च न्यायालय में 1.2 अरब डॉलर जमा कराए हैं। इसका मतलब यह हुआ कि डोकोमो और टाटा को रास्ता निकालना होगा ताकि डोकोमो की पहुंच 1.2 अरब डॉलर तक हो सके।

Keyword: Tata sons, docomo, telecom, Delhi high court, RBI,
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