बिजनेस स्टैंडर्ड - पवन ऊर्जा की बढ़ेगी मांग
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पवन ऊर्जा की बढ़ेगी मांग
श्रेया जय / नई दिल्ली 02 26, 2017

देश में अक्षय ऊर्जा पर जोर

पवन ऊर्जा की पहली सफल नीलामी के बाद दो दशक पुराना एफआईटी का दौर खत्म होने की ओर
केंद्र सरकार आगे और 4,000 मेगावॉट की पेशकश करेगी, नीलामी दो चरणों में होगी
राजस्थान, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश भी करेंगे पवन ऊर्जा परियोजनाओं की पेशकश
पवन ऊर्जा परियोजना की लागत करीब 7 करोड़ रुपये प्रति मेगावॉट होगी
बिजली दरें 3.5 रुपये प्रति यूनिट के आसपास रहने की संभावना, कीमतों में हो सकती है 25 प्रतिशत घटबढ़
उन्नत तकनीक की वजह से पवन ऊर्जा की उत्पादन लागत में कमी आने के आसार

बिजनेस स्टैंडर्ड पवन ऊर्जा की बढ़ेगी मांगपवन ऊर्जा परियोजनाओं की पहली सफल नीलामी के बाद देश भर में पवन ऊर्जा की मांग बढ़ने की संभावना है। नीलामी में पवन ऊर्जा के दाम 3.46 रुपये प्रति यूनिट के न्यूनतम स्तर पर पहुंचने के बाद पवन ऊर्जा के डेवलपर उम्मीद कर रहे हैं कि अब कई और राज्य आगे आएंगे और वे परियोजनाएं आवंटित करेंगे या सस्ती पवन ऊर्जा खरीदेंगे। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा (एमएनआरई) मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि केंद्र सरकार 4,000 मेगावॉट क्षमता की और परियोजनाएं आवंटित करने पर विचार कर रही है, जिनका आवंटन दो हिस्सों में नीलामी के माध्यम से हो सकता है। 

एमएनआरई मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि इस नीलामी से उद्योग की दिलचस्पी बढ़ाने में मदद मिलेगी और राज्यों की भी इस क्षेत्र में रुचि बढ़ेगी। नीलामी में सामने आए नए सस्ते दाम की वजह से राज्य अब अपनी अक्षय ऊर्जा खरीद बाध्यता (आरपीओ) पूरी करने के लिए बिजली खरीदने को प्रेरित होंगे।' इस उद्योग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पवन बिजली परियोजना की लागत करीब 7 करोड़ रुपये प्रति मेगावॉट होगी।

इनोक्स विंड लिमिटेड के पूर्णकालिक निदेशक देवांश जैन ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, 'इस नीलामी को लागू करने की अवधि 18 महीने है, जिससे मुनाफा कम रहने की उम्मीद है। इसके साथ ब्याज दरें कम होंगी और बिजली खरीद समझौते होने की संभावना है। इसकी वजह से डेवलपर के पास नवोन्मेष, कीमतें कम रखने व अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल का भरपूर मौका है।' इनोक्स विंड उन 5 कंपनियों में से एक है, जिसे हाल में हुई नीलामी में 3.46 रुपये प्रति यूनिट के भाव पवन ऊर्जा परियोजना मिली है। 

पहली पवन ऊर्जा परियोजना की नीलामी से बिहार, दिल्ली, ओडिशा, गोवा और दादरा और नागर हवेली की बिजली खरीद वार्ता अंतिम अवस्था में है। एमएनआरई के अधिकारी ने बताया कि भारतीय रेल व दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने भी खरीद में दिलचस्पी दिखाई है। इसके अलावा उद्योग जगत को उम्मीद है कि राजस्थान, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक भी अपनी ओर से पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बोली आमंत्रित करेंगे।

जैन ने कहा, 'पवन ऊर्जा क्षेत्र का पहले की तुलना में अब बहुत तेजी से आकार बढऩे की संभावना है। दो दर्जन राज्य 3.46 रुपये प्रति यूनिट के भाव पवन ऊर्जा की खरीद के लिए सामने आ रहे हैं। ऐसे में स्वाभाविक है कि बाजार में मांग तेज है। साथ ही शुल्क भी 25 प्रतिशत कम या ज्यादा रहने की संभावना है, लेकिन दरें सस्ती रहेंगी और यह क्षेत्र आरपीओ पूरा करने के लिए विश्वसनीय विकल्प रहेगा।' 

माइत्रा एनर्जी, इनोक्स विंड, ओस्ट्रो कच्छ विंड ने 250-250 मेगावॉट के ठेके जबकि ग्रीन इन्फ्रा (सेम्बकॉर्प इंडिया) ने 249 मेगावॉट की का ठेका हासिल किया है। 1,000 मेगावॉट का कोटा सिर्फ 1 मेगावॉट के कारण हासिल नहीं हो रहा था, ऐसे में सरकार ने अदाणी ग्रीन एनर्जी को 50 मेगावॉट की परियोजना आवंटित की और लक्ष्य पार कर गया। अदाणी ने भी न्यूनतम दरों पर बोली लगाई। 

अब तक पवन ऊर्जा क्षेतत्र फीड इन टैरिफ (एफआईटी) दौर में था, जिसमें बिजली के दाम परियोजना की लागत के मुताबिक होते थे। उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना है कि एफआईटी का दौर अब खत्म होने की ओर है। जैन ने कहा कि मेरे अनुमान के मुताबिक अगले 6 या 8 महीने में एपआईटी का दौर खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में पवन ऊर्जा की संभावना है, वे और परियोजनाओं के साथ सामने आएंगे और गैर पवन ऊर्जा वाले राज्य इसकी खरीदारी करेंगे। 
Keyword: अक्षय ऊर्जा, पवन ऊर्जा, नीलामी, एफआईटी, परियोजना, बिजली दर, एमएनआरई, आरपीओ,
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