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अमेठी के मैदान में कांग्रेस-सपा की दोस्ती और दुश्मनी
करण चौधरी /  February 21, 2017

अमेठी में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता आजकल भ्रम में हैं। वे अब भी इस सवाल में उलझे हुए हैं कि उनकी पार्टियां साथ मिलकर चुनाव लड़ रही हैं या फिर एकदूसरे के खिलाफ। इस इलाके में दोनों पार्टियों ने अपने-अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं। दोनों पार्टियों के उम्मीदवार एकदूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं और कभी-कभी वे दोस्ती और दुश्मनी की लक्ष्मणरेखा  भी पार कर जाते हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस सीट पर अमेठी के पूर्व महाराजा संजय सिंह की पूर्व पत्नी गरिमा सिंह को उम्मीदवार बनाया है और सहानुभूति वोट पाने की उम्मीद कर रही हैं।

 
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को सत्ता में आने से रोकने के लिए साथ हो गए हैं। लेकिन अमेठी में उनकी यह दोस्ती कहीं नजर नहीं आ रही है। सपा ने इस सीट पर दागी मंत्री और मौजूदा विधायक गायत्री प्रजापति को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने संजय सिंह की पत्नी और पूर्व विधायक अमिता सिंह को टिकट दिया है। न केवल कांग्रेस और सपा के कार्यकर्ताओं के लिए बल्कि अमेठी के लोगों के लिए भी यह उलझन की स्थिति है। छोटे स्तर के कार्यकर्ताओं के लिए तो प्रचार करना  समस्या बन गई है। उनके लिए लोगों के असहज सवालों का जवाब देना भारी पड़ रहा है।
 
पिछले 5 साल से कांग्रेस से जुड़े एक कार्यकर्ता ने कहा, 'लोग पूछ रहे हैं कि जब सपा ने उम्मीदवार खड़ा किया है तो फिर कांग्रेस अपना प्रत्याशी क्यों उतार रही है? इसी तरह जब कांग्रेस का उम्मीदवार लड़ रहा है तो फिर सपा क्यों लड़ रही है। अमेठी से सपा के उम्मीदवार का दागदार इतिहास रहा है और लोग हमसे पूछ रहे हैं कि कांग्रेस ऐसी पार्टी के साथ क्यों खड़ी है जिसका उम्मीदवार ऐसा है। गरिमा सिंह भाजपा टिकट पर लड़ रही हैं और उनका कहना है कि वह अपने अधिकारों के लिए लड़ रही हैं। हमें पता नहीं है कि पार्टी में शीर्ष स्तर पर क्या चल रहा है लेकिन लोगों को कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने के लिए मनाना हमारे लिए मुश्किल हो रहा है।' प्रजापति पर बलात्कार और यौन शोषण के आरोप हैं। उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। 
 
वह अमेठी में एक जनसभा के दौरान फूटफूटकर रोये थे और उन्होंने इसे भाजपा की साजिश बताया। संजय सिंह के मुताबिक पहले यह तय हुआ था कि अमेठी में कांग्रेस ही अपना उम्मीदवार उतारेगी। लेकिन बाद में चीजें बदल गईं। उन्होंने कहा, 'पहले यह हुआ था कि रायबरेली और अमेठी में सपा का कोई उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ेगा। लेकिन मुख्यमंत्री ने दबाव में आकर सपा उम्मीदवार को यहां से लडऩे की इजाजत दे दी।' अपनी पत्नी का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा, 'गायत्री प्रजापति ने यहां के लोगों पर जो जुल्म ढाए हैं, उन पर मरहम केवल अमिता ही लगा सकती हैं। अमेठी ने पहले कभी भी इस तरह का अपराध, सामाजिक रोष और दुर्दशा नहीं देखी थी। इसका कारण मौजूदा विधायक हैं। यहां तक कि उच्चतम न्यायालय ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है।' उन्होंने कहा कि कांग्रेस अमेठी में सपा के खिलाफ लड़ रही है लेकिन मुख्यमंत्री के तौर पर वह अखिलेश का समर्थन करेगी। अमिता सिंह ने कहा कि जब दोनों दल साथ आए तो उनके बीच कई मुद्दे थे। अमेठी में दोनों दलों के उम्मीदवार उतारने के बारे में उन्होंने कहा, 'इसमें काफी कुछ लेनदेन है। इसमें कार्यकर्ताओं, दलों और विचारधाराओं का सवाल है। आपको एक तरह की समझ विकसित करनी थी। मुझे लगता है कि इस फैसले पर पहुंचने के लिए दोनों दलों के नेताओं के बीच आपसी समझ बनी होगी।'
 
अमिता ने कहा, 'पार्टी कार्यकर्ताओं और अमेठी के लोगों के मन में कोई भ्रम नहीं है, वे मुझे ही वोट देंगे। कांग्रेस नेतृत्व मेरे साथ है। प्रियंका गांधी ने साफ किया है कि वह पूरी तरह मेरे साथ हैं। मौजूदा विधायक के जुल्मों से लोग परेशान हैं।' गरिमा सिंह को भाजपा उम्मीदवार बनाने के सवाल पर अमिता ने कहा कि यह महज नाटक है। उन्होंने कहा, 'भाजपा का ऐसे लोगों को टिकट देना इस बात को दर्शाता है कि पार्टी को अपनी हार का अहसास हो चुका है। पार्टी को लगा होगा कि जब हारना ही है तो क्या न थोड़ा बहुत नाटक किया जाए।' सोमवार को अमेठी में सपा की जनसभा में कांग्रेस पर भ्रष्टïाचार के आरोप लगाए जा रहे थे और संजय सिंह का मजाक उड़ाया जा रहा था। लेकिन मुख्यमंत्री के आते ही कांग्रेस के खिलाफ छींटाकशी बंद हो गई। कांग्रेस के साथ गठबंधन के बारे में अखिलेश का तर्क था कि अगर सपा की साइकिल पर कांग्रेस का हाथ होगा तो वह और तेज दौड़ेगी। 23 फरवरी को राहुल गांधी और सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव अमेठी में होंगे। राहुल कांग्रेस की रैली में शिरकत करेंगे जबकि मुलायम का एक बैठक में हिस्सा लेने का कार्यक्रम है।
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