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एफआरबीएम समिति राजकोषीय घाटे के लक्ष्य में दे सकती है राहत
भाषा / नई दिल्‍ली January 23, 2017

वित्तीय जवाबदेही और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) कानून के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए बनाई गई सरकारी समिति वर्ष 2017-18 के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य में कुछ राहत की सिफारिश कर सकती है। आगामी वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के समक्ष तीन से 3.5 प्रतिशत के दायरे में रखा जा सकता है। बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच (बोफा-एमएल) के मुताबिक एनके सिंह की अध्यक्षता वाली समिति अगले वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य सीधा तीन प्रतिशत रखने के बजाय इसे तीन से 3.5 प्रतिशत के दायरे में रखने की सिफारिश कर सकती है।

एनके सिंह समिति राजकोषीय सुदृढीकरण के बारे में कार्ययोजना रिपोर्ट आज सरकार को सौंप सकती है। बोफा-एमएल की रिपोर्ट के अनुसार वित्त मंत्री अरुण जेटली अगले वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे के 3.5 प्रतिशत रहने का लक्ष्य तय कर सकते हैं। चालू वित्त वर्ष के लिए भी राजकोषीय घाटा इसी स्तर पर रखने का लक्ष्य रखा गया है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति में नरमी लाने के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय बैंक अपनी 8 फरवरी को जारी होने वाली मौद्रिक समीक्षा में मुख्य दर में 0.25 प्रतिशत कटौती कर सकता है। उसके बाद अप्रैल में पेश की जाने वाली समीक्षा में भी वह मुख्य नीतिगत दर में इतनी ही कटौती कर सकता है।

बोफा-एमएल ने कहा है, 'खुदरा, थोक मुद्रास्फीति और आईआईपी के नवीनतम आंकड़े सामने आने के बाद रिजर्व बैंक द्वारा 8 फरवरी को और अप्रैल में मुख्य नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत कटौती के हमारे अनुमान को लेकर हम अधिक विश्वस्त हुए हैं।' उसने कहा है कि रिजर्व बैंक की दर कटौती से बैंकों में कर्ज की उधार दर में कटौती को लेकर मजबूत संकेत जाएगा। ब्याज दरों में कटौती आर्थिक वृद्धि के लिहाज से काफी महत्त्वपूर्ण है। रिजर्व बैंक ने इससे पहले 7 दिसंबर की मौद्रिक समीक्षा में रेपो दर को स्थिर रखा था।

Keyword: एफआरबीएम समिति, राजकोषीय घाटा, समीक्षा, जीडीपी, बोफा-एमएल, कार्ययोजना, रिपोर्ट,
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