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श्रम आधारित क्षेत्रों पर हो मेक इन इंडिया का ध्यान
संजीव मुखर्जी और इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली January 22, 2017

नीति आयोग चाहता है कि प्रधानमंत्री की ओर से की गई पहल मेक इन इंडिया का ध्यान श्रम आधारित क्षेत्रों जैसे चमड़ा, कपड़ा और परिधान की ओर हो। इससे नौकरियों की संभावनाओं में बढ़ोतरी होगी। सूत्रों के मुताबिक सरकार के प्रमुख थिंक टैंक ने 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-13 से 2016-17) के मूल्यांकन में कहा है कि मेक इन इंडिया का ध्यान मुख्य रूप से वाहन पुर्जे, उड्डयन, बायोटेक्नोलॉजी, रसायन, रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, चमड़ा, दवा, टेक्टाइल और गारमेंट्स पर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें ज्यादातर ऐसे क्षेत्र हैं, जो पहले से ही मजबूत हैं। 
 
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, चमड़ा, कपड़ा और परिधान के क्षेत्र में पीछे है। यह सभी श्रम आधारित क्षेत्र हैं। आयोग का कहना है कि इस पर सरकार को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि ये सभी श्रम आधारित क्षेत्र हैं। इसमें कहा गया है कि इन श्रम आधारित क्षेत्रों के लिए नीतियां न होने से इनकी वृद्धि प्रभावित हुई है, ऐसे में इन पर ज्यादा ध्यान दिए जाने की जररूरत है, जिससे इस क्षेत्र में जटिल कानूनों व नियमों को चिह्नित किया जा सके, जो इन क्षेत्रों के तेज विकास के लिए महत्त्वपूर्ण है।  श्रम समवर्ती सूची में है, इसलिए केंद्र व राज्य सरकारों को इस पर कानून बनाना होगा। अधिकारियों ने कहा कि दोनों ने ही कानून बना रखे हैं, जिसकी वजह से इस पर 40 से ज्यादा केंद्रीय व तमाम राज्य सरकारों के कानून लागू होते हैं। 
 
फर्मों की ओर से नियुक्त किए गए कामगारों की संख्या बढ़ी है, वहीं श्रम कानून स्थिर बना हुआ है। एक फर्म जो बिजली का इस्तेमाल करती है, उसमें 10 मजदूर और बिजली का इस्तेमाल करने वाली फर्मों में 20 मजदूर से ज्यादा रहने पर वे फैक्टरीज ऐक्ट 1948 के दायरे में आ जाती हैं। अगर किसी फर्म में 50 से ज्यादा कर्मचारी हैं तो वह अपने कर्मियों को दूसरा काम नहीं सौंप सकते। इसी तरह से 100 फर्म वाली कंपनियों को किसी भी स्थिति में छंटनी का अधिकार नहीं है। पूंजी आधारित क्षेत्रों की तुलना में श्रम आधारित उद्योगों में पहले से मुनाफा कम है। श्रम कानून स्थिर बने होने की वजह से फर्म काम बढ़ाने से बचती हैं। इसकी वजह से फर्मों को श्रमिकों की संख्या कम रखने व छोटा बने रहने की प्रेरणा मिलती है।
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