बिजनेस स्टैंडर्ड - मदरसन का होगा पीकेसी ग्रुप
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मदरसन का होगा पीकेसी ग्रुप
अजय मोदी / नई दिल्ली January 20, 2017

वाहनों  के कल-पुर्जे बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी मदरसन सूमी ने वर्ष 2020 तक 18 अरब डॉलर राजस्व के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक अहम कदम बढ़ाया है। कंपनी ने शुक्रवार को 4,150 करोड़ रुपये (60.9 करोड़ डॉलर) मूल्य के अपने अब तक के सबसे बड़े अधिग्रहण की घोषणा की। यह किसी भारतीय वाहन कंपनी द्वारा किए गए सबसे बड़े अधिग्रहणों में से एक है। विवेक चांद सहगल की अगुआई वाली 30 साल पुरानी मदरसन सूमी ने विदेशी कंपनियों का अधिग्रहण कर वित्त वर्ष 2016 में अपना राजस्व 5.7 अरब डॉलर पहुंचा दिया था। 
 
मदरसन वायरिंग हारनेस बनाने वाली फिनलैंड की कंपनी पीकेसी ग्रुप का अधिग्रहण करेगी। इस कंपनी का सालाना राजस्व करीब 6,100 करोड़ रुपये है। इस अधिग्रहण से मदरसन को अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में अपने वायरिंग हारनेस के बाजार को बढ़ाने का मौका मिलेगा। मदरसन पीकेसी के शेयरधारकों को खुली पेशकश करेगी। दिलचस्प है कि कंपनी ने मारुति के लिए वायरिंग हारनेस के वास्ते एक इकाई स्थापित की है। मदरसन के मुख्य वित्तीय अधिकारी जी एन गाबा ने कहा, 'वायरिंग कारोबार हमारे दिल के करीब है।' कंपनी के राजस्व में इसकी 14-15 फीसदी हिस्सेदारी है। इस अधिग्रहण से कंपनी के राजस्व में वायरिंग हारनेस की हिस्सेदारी दोगुनी हो जाएगी। वायरिंग हारनेस वायर, टर्मिनल और कनेक्टर का सेट होता है जो गाड़ी के विभिन्न हिस्से जुड़े रहते हैं। 
 
गाबा ने कहा, 'उत्तर अमेरिका हमारे लिए अहम बाजारों में शामिल है।' नैस्डेक और हेलसिंकी स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्घ पीकेसी की अमेरिका, ब्राजील, चीन, रूस और जर्मनी में उत्पादन इकाइयां हैं और उसके कर्मचारियों की संख्या 22,000 है। अधिग्रहण की घोषणा के बाद नैस्डेक में कंपनी के शेयर 49 फीसदी की तेजी के साथ 23.30 यूरो पहुंच गया। साथ ही कंपनी की बाजार पूंजी भी बढ़कर 56.2 करोड़ डॉलर हो गई।
 
मदरसन का कहना है कि वह एशिया प्रशांत क्षेत्र में मजबूत स्थिति में है और इससे पीकेसी को अपने विस्तार में मदद मिलेगी। कंपनी की नजर एशियाई बाजार पर है, जहां प्रमुख वैश्विक व्यावसायिक कंपनियां अपनी बिक्री बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। इससे मदरसन को भी बढ़ते व्यावसायिक वाहन श्रेणी में अपना राजस्व बढ़ाने में मदद मिलेगी। गाबा ने कहा कि मदरसन ने सितंबर 2016 में पात्र संस्थागत निवेश के जरिये 1,993 करोड़ रुपये जुटाए थे। उन्होंने कहा, 'हमारे पास नकदी के आंतरिक स्रोत भी हैं। मुझे नहीं लगता है कि हमें नए कर्ज की जरूरत है।' सितंबर 2016 तक कंपनी का कुल कर्ज 2,175 करोड़ रुपये था। मदरसन की रणनीति अपने पोर्टफोलियो के जोखिम को कम करना है और कंपनी लगातार ऐसी नीति पर काम कर रही है जहां 2020 तक कोई भी एकल ग्राहक, देश या श्रेणी की राजस्व में 15 फीसदी से अधिक भागीदारी न हो। गाबा ने कहा कि कंपनी लगातार अपना कारोबार बढ़ाएगी और इससे किसी एक ग्राहक पर निर्भरता घटेगी। लक्जरी कार मर्सिडीज बेंज बनाने वाली जर्मन कंपनी डेमलर मदरसन की दूसरी सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय ग्राहक बन गई है। एक साल पहले यह छठे स्थान पर थी। इस होड़ में कंपनी ने फोक्सवेगन और फोर्ड जैसी कंपनियों को पीछे छोड़ा है और मदरसन के राजस्व में उसकी 10 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी है। पिछले कुछ सालों से जर्मनी कार निर्माता कंपनी ऑडी मदरसन के राजस्व में सर्वाधिक योगदान करने वाली कंपनी बनी हुई है। 
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