बिजनेस स?टैंडर?ड - सपा की सूरत बदल पाएंगे अखिलेश?
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सपा की सूरत बदल पाएंगे अखिलेश?
साहिल मक्कड़ /  01 18, 2017

बिजनेस स?टैंडर?ड सपा की सूरत बदल पाएंगे अखिलेश?

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की तैयारी चल रही है। अखिलेश अपनी छवि इस तरह गढ़ रहे हैं मानो वह तो राज्य का विकास करना चाहते हैं, लेकिन पार्टी की पुरानी पीढ़ी इसके रास्ते में आड़े आ रही है। लेकिन क्या वाकई ऐसा ही है?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पिछले दिनों अपने पिता और समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव तथा चाचा शिवपाल यादव से अलग होने की जो कोशिश की, उसे कुछ हलकों में एक सोची समझी चाल माना जा रहा है। माना जा रहा है कि वह अपनी सरकार की नाकामियों को छिपाने के लिए ऐसा कर रहे हैं और लोगों को यह दिखाना चाहते हैं कि पुरानी पीढ़ी ही उन्हें अच्छा करने से रोक रही है।

बिज़नेस स्टैंडर्ड ने जब अखिलेश सरकार के कामकाज का विश्लेषण किया तो पता चला कि आर्थिक और सामाजिक मोर्चे पर उत्तर प्रदेश ने इस सरकार की अपेक्षा मायावती के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के कार्यकाल (2007-12) में बेहतर प्रदर्शन किया। बहुजन समाज पार्टी की सरकार के समय उत्तर प्रदेश ने औसतन 7 फीसदी की सालाना वृद्धि दर दर्ज की, लेकिन समाजवादी पार्टी के कार्यकाल में यह दर 5-6 फीसदी ही रह गई। दोनों दलों की सरकारों के समय में कृषि की वृद्धि दर तो कमोबेश एक जैसी ही रही, लेकिन अखिलेश के कार्यकाल में सेवा क्षेत्र का विस्तार नहीं हो पाया।

मायावती सरकार के पहले साल यानी 2007-08 में सेवा क्षेत्र ने 20.41 फीसदी की छलांग लगाई थी, लेकिन 2011-12 में यह आंकड़ा सिकुड़कर 8.67 फीसदी ही रह गया था। अखिलेश सरकार इस गिरावट को थामने में नाकाम रही और उसके कार्यकाल के पहले वर्ष में यह फिसलकर 5.85 फीसदी तक गिर गई। 2014-15 में इसमें सुधार हुआ और यह 7.85 फीसदी रही, लेकिन यह 2007-08 के मुकाबले काफी कम थी।

बिजनेस स?टैंडर?ड सपा की सूरत बदल पाएंगे अखिलेश?अलबत्ता राजकोषीय घाटे के मोर्चे पर अखिलेश सरकार का प्रदर्शन अपनी पूर्ववर्ती सरकार से बेहतर रहा। लेकिन दोनों सरकारों के कार्यकाल में सामाजिक क्षेत्र पर खर्च का अनुपात लगभग बराबर रहा। कानून व्यवस्था के मोर्चे पर मायावती का प्रदर्शन अखिलेश से कहीं बेहतर था। अखिलेश के 2012 में सत्ता संभालने के बाद पहले दो साल हिंसक अपराधों में काफी तेजी आई। मुजफ्फरनगर दंगे और दादरी में मोहम्मद अखलाक की भीड़ द्वारा हत्या अखिलेश सरकार पर सबसे बड़ा धब्बा हैं। मुजफ्फरनगर दंगों में 62 लोग मारे गए थे जबकि अखलाक को घर में गोमांस रखने के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था। 

चुनाव और राजनीति के विश्लेषक जय मृग कहते हैं, 'सपा में अंतर्कलह का मकसद अखिलेश की सार्वजनिक छवि बचाना और उनकी सरकार की नाकामियों को छिपाना हो सकता है। अखिलेश युवा मतदाताओं को अपनी ओर खींचने के लिए ऐसा कर रहे हैं। यह 2014 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपनाई गई रणनीति की तरह है।' लेकिन लखनऊ विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के पूर्व प्रोफेसर एस के द्विवेदी इससे सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि अखिलेश अच्छी स्थिति में हैं। उन्होंने कहा, 'संभव है कि मायावती ने आर्थिक और सामाजिक मोर्चे पर अच्छा प्रदर्शन किया हो, लेकिन अखिलेश सरकार की छवि साफ सुथरी है और उसने कुछ बड़ी परियोजनाएं शुरू की हैं। सपा के दिग्गज नेताओं ने अखिलेश को काम करने की आजादी नहीं दी, इसलिए अखिलेश का आकलन जल्दबाजी में नहीं किया जाना चाहिए।'

राजनीतिक विश्लेषक अखिलेश को संदेह का लाभ दे सकते हैं, लेकिन नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने उनकी सरकार की जमकर आलोचना की है। हाल में आई अपनी रिपोर्टों में कैग ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में हर दूसरा स्कूली बच्चा कुपोषित है और 52 फीसदी गर्भवती महिलाओं में खून की कमी है। कैग ने 2010-11 और 2014-15 के दौरान 20 जिलों में महिलाओं से संबंधित 11 योजनाओं का ऑडिट किया और पाया कि राज्य में महिलाओं के लिए अलग से बजट का कोई प्रावधान नहीं है। एजेंसी ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है, 'उत्तर प्रदेश सरकार ने 2006 में राज्य महिला नीति की घोषणा की थी लेकिन 10 साल बीत जाने के बाद भी वह स्त्री-पुरुष के लिए अलग-अलग बजट बनाने में नाकाम रही है।'

बिजनेस स?टैंडर?ड सपा की सूरत बदल पाएंगे अखिलेश? कैग ने पाया के अधिकांश योजनाओं में महिलाओं के लिए रखी गई रकम का या तो बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं हुआ या नाम मात्र का इस्तेमाल हुआ। इनमें से एक योजना बलात्कार पीडि़तों से संबंधित है, जिन्हें सहायता देने में राज्य सरकार नाकाम रही है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, 'बलात्कार पीडि़तों के लिए वित्तीय सहायता देने की योजना के लिए केंद्र सरकार ने 15.03 करोड़ रुपये आवंटित किए थे लेकिन इसका इस्तेमाल नहीं किया गया। हालांकि इस दौरान राज्य में बलात्कार के 3,544 मामले सामने आए थे। उत्तर प्रदेश पीडि़त मुआवजा योजना के तहत 18 में से केवल दो मामलों में ही मुआवजा दिया गया, जबकि दिसंबर 2015 तक 16 मामले 4 से 20 महीने से लंबित पड़े हैं।'

इसी तरह राज्य सरकार ने गर्भपात केंद्र बनाने के लिए 2010-15 के दौरान आवंटित राशि में से केवल 11 फीसदी का ही इस्तेमाल किया। कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा, 'राज्य के 773 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में से केवल 6 फीसदी में ही गर्भपात की सुविधा है। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश महिलाओं के पास घर के करीब और किफायती सुरक्षित गर्भपात की सुविधा नहीं है।' इससे भी बदतर स्थिति यह है कि अधिकांश ग्रामीण महिलाओं को प्रसव के लिए अनाड़ी दाइयों पर निर्भर रहना पड़ता है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में सरकार स्वास्थ्य केंद्रों की भारी कमी है।

मार्च, 2015 तक उत्तर प्रदेश में केवल 773 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 3,538 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 20,521 उप स्वास्थ्य केंद्र थे जबकि राज्य में 1,555 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, 5,183 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और 31,100 उप स्वास्थ्य केंद्रों की जरूरत है। 43,600 आंगनवाड़ी केंद्रों में शौचालय और 53,757 में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है।

बिजनेस स?टैंडर?ड सपा की सूरत बदल पाएंगे अखिलेश?फैजाबाद के राजनीतिक विश्लेषक अनिल सिंह ने कहा कि एक मुख्यमंत्री के तौर पर अखिलेश नाकाम रहे हैं। उन्होंने कहा, 'वह छोटे-छोटे फैसले लेने में भी नाकाम रहे जो सरकार को सुगमता से चलाने के लिए जरूरी होते हैं। उन्होंने समाज के कुछ वर्गों के लिए काम किया और उन्हें आगामी चुनावों में उन वर्गों का वोट मिलने की उम्मीद है।' इनमें से एक योजना 18 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए स्मार्टफोन के आवंटन से संबंधित है। सरकार ने इस योजना का बचाव करते हुए कहा है कि इसके जरिये लोगों को लगातार सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलती रहेगी।

सपा ने पिछले विधानसभा चुनावों में छात्रों को मुफ्त लैपटॉप बांटने का वादा किया था और माना जाता है कि इस वादे के दम पर पार्टी सत्ता में आई थी। मतदाताओं का कहना है कि सपा स्मार्टफोन बांटने का अपना वादा पूरा करेगी क्योंकि वह 18 लाख मुफ्त लैपटॉप बांट चुकी है। अखिलेश की नजर 41 लाख नए मतदाताओं पर है जिनकी उम्र 18-19 साल है। उनका यह दाव पिछले विधानसभा चुनाव में सफल रहा था और पार्टी ने 403 में से 224 सीटें जीती थी। अखिलेश को इस बार भी पिछली सफलता को दोहराने की उम्मीद है।

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