बिजनेस स?टैंडर?ड - रेल पीएसयू में विनिवेश फिलहाल नहीं
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रेल पीएसयू में विनिवेश फिलहाल नहीं
शाइन जैकब / नई दिल्ली January 05, 2017

रेलवे में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में निकट भविष्य में विनिवेश की फिलहाल संभावना है। सूत्रों के अनुसार रेलवे की सहायक इकाइयों में आगामी विनिवेश सभी केंद्रीय पीएसयू के लिए एक होल्डिंग कंपनी बनाए जाने की योजना के संबंध में केंद्रीय मंत्रिमंडल के निर्णय पर निर्भर करेगा। मंत्रिमंडल द्वारा इस महीने के अंत तक इस संदर्भ में निर्णय लिए जाने की संभावना है। 
 
सूत्रों के अनुसार कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकॉर) में बिक्री के लिए शुरुआती योजना से रेलवे के निजीकरण को बढ़ावा मिलता जो मौजूदा बाजार हालात की वजह से अस्थायी रूप से लंबित है। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ए के मित्तल ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'रणनीतिक बिक्री की योजना पर अमल हो रहा है और हम सही समय का इंतजार कर रहे हैं।' वर्ष 2016-17 के लिए सरकार का कुल विनिवेश लक्ष्य 56,500 करोड़ रुपये था जिसमें 36,000 करोड़ रुपये पीएसयू में अल्पांश हिस्सेदारी बिक्री के जरिये और 20,500 करोड़ रुपये रणनीतिक बिक्री से शामिल है। वहीं इस वित्त वर्ष में अल्पांश हिस्सेदारी की बिक्री का आंकड़ा 34,800 करोड़ रुपये है। 
 
कॉनकॉर मुनाफे वाली इकाई है और सरकार की इसमें 56.79 फीसदी की हिस्सेदारी है। एक आधिकारिक सूत्र ने कहा, 'हम दो आइडिया पर काम कर रहे हैं। एक है 10 फीसदी की रणनीतिक हिस्सेदारी की बिक्री करना, जिसके जरिये कंपनी अपना पीएसयू टैग खो सकती है। सरकार ने 5 फीसदी की अल्पांश हिस्सेदारी बिक्री की भी योजना बनाई है। यदि बाजार में हालात उपयुक्त रहते हैं तो सरकार इस पर विचार कर सकती है।'
 
कॉनकोर को 2015-16 में 787 करोड़ रुपये का शुद्घ लाभ हुआ था। पिछले साल सरकार ने कॉनकोर में 1195 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से पांच फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री की और 1,155 करोड़ रुपये हासिल किए थे। रेलवे की आईआरसीटीसी, इरकॉन, आरआईटीईएस आदि जैसी गैर-सूचीबद्घ इकाइयों में हिस्सेदारी विनिवेश से सरकार को राजस्व का जरूरी स्रोत हासिल होगा। रेल सहायक इकाइयों के विलय के प्रस्ताव के लिए मंत्रालय को अन्य मंत्रालयों और विभागों से प्रतिक्रिया मिली है। जब एक वरिष्ठï अधिकारी से यह पूछा गया कि कॉनकोर जैसी मुनाफे वाली कंपनी में हिस्सेदारी बिक्री पर विचार क्यों किया जा रहा है तो उन्होंने कहा, 'इरकॉन और राइट्ïस जैसी रेलवे कंपनियां भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण हैं और इसलिए सरकार इन्हें खोने में दिलचस्पी नहीं दिखा सकती है।'
Keyword: railway, PSU, infra, concor,,
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