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बहुराष्ट्रीय कंपनियां स्थानीय साझेदारों संग चाहें निवेश
निवेदिता मुखर्जी /  11 30, 2016

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल खाद्य वस्तुओं के खुदरा कारोबार में विदेशी निवेश आकर्षित करने के प्रयासों में जुटी हैं। इस मसले से जुड़े विभिन्न पक्षों पर निवेदिता मुखर्जी ने कौर से विस्तार से बातचीत की। पेश हैं उनके साथ की गई बातचीत के मुख्य अंश:

बिजनेस स्टैंडर्ड बहुराष्ट्रीय कंपनियां स्थानीय साझेदारों संग चाहें निवेशखाद्य खुदरा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की घोषणा हुए कई माह हो चुके हैं। आप इस नीति की सफलता का आकलन कैसे करती हैं?
खाद्य वस्तुओं के  खुदरा कारोबार में एफडीआई की घोषणा पिछले बजट में हुई थी। उसके बाद जुलाई से यह प्रभाव में आ गई। अब तक खाद्य उद्योग की प्रतिक्रिया इस पर सकारात्मक रही है। हाल में ही मैं ब्रिटेन, फ्रांस और इटली गई थी जहां मुझे अच्छी प्रतिक्रियाएं मिलीं। इसमें कोई शक नहीं कि कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नजर भारत पर है, लेकिन वे यहां स्थानीय साझेदारों के साथ काम करना चाहती हैं। इस लिहाज से कंपनियों के एक जगह आने के लिए एक मंच की जरूरत है और इसी उद्देश्य से वल्र्ड फूड फोरम का आयोजन 2017 में नई दिल्ली में किया जाएगा।

खाद्य क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने के लिए आप किन देशों का दौरा करेंगी?
मैं अगले माह जापान जाने वाली हूं। खाद्य आयातक देश, जो भारत में निवेश करना चाहते हैं, मैं उनके दौरे पर जा रही हूं। मैं बड़ी खुदरा कंपनियों को लाने की दिशा में काम कर रही हूं, लेकिन इनमें कुछ अपने स्टोर में घरेलू इस्तेमाल के सामान भी रखना चाहती हैं। इस संबंध में हम एक सुझाव पर विचार कर रहे हैं। स्टोर में बिकने वाले सभी उत्पाद भारत में ही निर्मित होंगे।

लेकिन गैर-खाद्य उत्पादों की बिक्री की अनुमति देने से खाद्य स्टोर बहु-ब्रांड की तरह नहीं हो जाएंगे?
अभी यह केवल एक सुझाव है और कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। जो बहुराष्टï्रीय कंपनियां भारत में खाद्य वस्तुओं के खुदरा कारोबार में आना चाह रही हैं उनके लिए यह नए देश में एक नया मॉडल होगा। यही वजह है कि वे थोड़ा संकोच कर रही हैं और गैर-खाद्य वस्तुएं भी अपने स्टोर में रखने की अनुमति मांगी है।

सरकार के दूसरे विभागों के क्या प्रतिक्रियाएं हैं?
हमारी कोई औपचारिक बैठक नहीं हुई है। चूंकि, भाजपा ने साफ कर दिया है कि एफडीआई केवल खाद्य क्षेत्र के लिए है इसलिए हमें सरकार के तौर पर निर्णय लेना होगा। लेकिन इतना जरूर बता दूं कि कंपनियां जबरदस्त प्रतिक्रियाएं दिखा रही हैं।

क्या कार्फू ने भी दिलचस्पी दिखाई है?
नहीं, कार्फू ने अब तक दिलचस्पी नहीं दिखार्ई है लेकिन फ्रांस की सबसे बड़ी खुदरा कारोबारी कंपनी ऑचन आना चाहती है। किसानों के साथ सीधे काम करने का उनका तरीका भारत के अनुकू ल है। आगे की बैठकें करने के लिए ऑचन के अधिकारी जनवरी में भारत आ सकते हैं।

क्या आपको लगता है कि मैगी विवाद खाद्य क्षेत्र के लिए एक झटका था?
मैं सभी चीजों पर सकारात्मक रुख रखता है। संभवत: नेस्ले के लिए यह एक झटका था लेकिन इससे कई मुद्दे भी सामन आए, जिनमें भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के काम करने का तरीका भी शामिल है। एफएसएसएआई मुद्दे का समाधान हो गया है और हम प्रयोगशाला में जांच के लिए एक निर्धारित नियम पर विचार कर रहे हैं।

हाल में ही संसद में कोक और पेप्सी में भारी धातुएं होने का मुद्दा भी उठा है? इसे कैसे सुलझाया जा सकता है?
हम लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के प्रति दृढ़ संकल्प हैं। जब ऐसे मुद्दे उठाए जाते हैं हम कोशिश करते हैं कि इनका उपयुक्त तरीके से समाधान किया जाए।

नोटबंदी एक ज्वलंत मुद्दा है। क्या आपको ऐसा नहीं लगता है कि पंजाब सहित कई राज्यों में विधानसभा चुनावों से पहले लिए गए इस फैसले से लोग प्रभावित हुए हैं?
जब दुश्मन, अवैध ड्रग्स कारोबार या भ्रष्टाचार से जंग लड़ी जाती है तो पूरे देश को तकलीफ झेलनी पड़ती है। जब आप पिछले 70 वर्षों से जमा काले धन के खिलाफ जंग छेड़ते हैं तो निस्संदेह बहुत से लोगों को असुविधा होती है। कुछ लोग यह असुविधा झेलने के ही लायक होते हैं, जबकि कुछ नहीं होते हैं। हमारे प्रधानमंत्री ही ऐसा कदम उठाने की ताकत रखते हैं। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक की तरह यह फैसला अचानक लिया। विपक्ष की भूमिका सवाल पूछने की है। वे संसद को क्यों नहीं चलने दे रहे हैं और कार्यवाही में रुकावट क्यों पैदा कर रहे हैं?

Keyword: हरसिमरत कौर बादल, खाद्य वस्तु, खुदरा कारोबार, विदेशी निवेश, बातचीत,
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