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फ्लाईरोब यानी कम खर्च में महंगे कपड़ों का रौब
स्नेहा सागर और अभिषेक जेजानी /  November 20, 2016

फ्लाईरोब ने महज 3 घंटे में पश्चिमी परिधानों की डिलिवरी ग्राहकों तक कर फैशनपरस्त लोगों के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई है। इस बारे में विस्तार से बता रही हैं स्नेहा सागर और अभिषेक जेजानी
करीब 30 साल की नेहा पाठक को दोस्तों के साथ मिलना-जुलना और सोशल इवेंट में शिरकत करना पसंद है। पहले उन्हें इस बात के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी कि वह क्या पहने क्योंकि हमेशा उन्हें अपने कपड़े कम ही पड़ जाते थे। लेकिन अब उनका कहना है कि फ्लाईरोब की वजह से अब वह बेहद कम खर्च में एक से बढ़कर एक डिजाइनर कपड़े पहन सकती हैं। वह कहती हैं, 'फ्लाईरोब मेरे लिए अच्छा विकल्प साबित हुआ है क्योंकि इसके कलेक्शन हमेशा नए होते हैं और ग्राहकों को सेवाएं भी बहुत अच्छी दी जाती हैं। किफायती होने के साथ-साथ कपड़े की साफ-सफाई को लेकर भी किसी तरह की चिंता नहीं होती, जो मेरे लिए सबसे अच्छी बात है।'
पिछले महीने 53 लाख डॉलर जुटाने वाली मुंबई की यह स्टार्टअप फैशन परिधान और एक्सेसरीज किराये पर देती है और बतौर किराया उनकी असली कीमत का 10 से 15 फीसदी वसूल लेती है।

कैसे करती है काम
फ्लाईरोब हर तरह के अवसर के लिए पारंपरिक और पश्चिमी परिधान किराये पर देती है। ग्राहक परिधान को तीन दिन तक अपने पास रख सकते हैं। कंपनी की तरफ से मुफ्त डिलिवरी की जाती है और उसके बाद ग्राहक के घर से परिधान वापस भी ले लिया जाता है। पारंपरिक परिधान के लिए मूल कीमत का 20 फीसदी किराया वसूला जाता है। कंपनी कुछ पैसे बतौर सिक्योरिटी जमा भी कराती है, जो बाद में वापस कर दिए जाते हैं। कंपनी के पास ऋतु कुमार, मसाबा गुप्ता अनीता डोंगरे जैसी डिजाइनरों के परिधान और एसेसरीज का कलेक्शन भी होता है।
इसने मैंगो, क्वर्क बॉक्स, आउटहाउस आदि जैसे ब्रांडों के साथ भी गठजोड़ किया है। इसने फ्रांसीसी कंपनी 5एसेक के साथ ड्राई क्लिनिंग के लिए गठजोड़ किया है। कंपनी पश्चिमी परिधान बुकिंग के तीन घंटे के भीतर पहुंचा देती है। इनकी बुकिंग आम तौर पर किसी पार्टी या दूसरे मौके पर पहनने के लिए ग्राहक अचानक ही कराते हैं। पारंपरिक परिधान के लिए फिटिंग का इंतजाम भी किया जाता है। ऐसी पोशाकों को आम तौर पर शादियों और त्योहारों जैसे मौके के लिए बुक किया जाता है।
फ्लाईरोब की स्थापना भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बम्बई से पढ़कर निकले श्रेया मिश्रा, प्रणय सुराना और तुषार सक्सेना ने 2015 में की थी। श्रेया इसकी मुख्य कार्याधिकारी हैं। वह कहती हैं, 'हम कुछ ऐसा चाहते थे, जिसे साझा किया जा सके और फैशन ऐसी श्रेणी है, जहां लोग जरूरत से बहुत ज्यादा खर्च करते हैं। जो कपड़े ज्यादा महंगे होते हैं, वे सबसे कम पहने जाते हैं और रात में पहनने वाले कपड़े सबसे ज्यादा पहने जाते हैं, लेकिन सबसे सस्ते होते हैं।'
कंपनी के पास दिखाने के लिए काफी कुछ मौजूद है। परिणीति चोपड़ा, सनी लियोनी और अदिति राव सहित 15 से अधिक बॉलीवुड शख्सियतें फ्लाईरोब की सेवा का इस्तेमाल कर चुकी हैं। इसने आईडीजी वेंचर्स के नेतृत्व में हाल में ए-सीरीज की फंडिंग भी हासिल की है। अभी सिकोया इंडिया और टोक्यो के फंड ग्री वेंचर्स ने भी इसमें रकम लगाई है।
 
कैसा है मौका?
किराये वाला मॉडल लंबी अवधि में कारोबार को मजबूती देने में मददगार साबित होता है। श्रेया कहती हैं, 'महिलाओं के लिए ऑनलाइन फैशन मार्केट मजबूत हो रहा है और इसमें काफी संभावनाएं भी दिखती हैं। फिलहाल हम किराये वाले मॉडल का इस्तेमाल कर फैशन को सभी के लिए उपलब्ध कराना चाहते हैं। बाद में हम इस्तेमाल की जा चुकी चीजों की बिक्री, ज्यादा छूट वाली सेल और अन्य प्रकार की ऑफलाइन तथा ऑनलाइन किराया सेवाओं के लिए मार्केटप्लेस भी तैयार कर सकते हैं।'
आईडीजी के कार्यकारी निदेशक करण मोहला के मुताबिक लेन-देन के मौजूदा मॉडल को देखते हुए फैशन और परिधान उत्पाद को किराये पर देने का कारोबार पूरे बाजार में खलबली मचा सकता है। लेकिन प्रमुख उत्पादों की आपूर्ति और ज्यादा से ज्यादा विकल्पों की पेशकश सबसे बड़ी चुनौती होगी। कंपनी के लिए सबसे बड़ा मौका यह था कि वह फैशन रेंटल के लिए एक राष्ट्रीय ब्रांड तैयार करे जो फिलहाल नहीं है।
ग्री वेंचर्स के प्रमुख अल्बर्ट शाय कहते हैं, 'इस बाजार के लिए निश्चित तौर पर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है क्योंकि भारत के लिए अभी यह नए किस्म का कारोबारी मॉडल है।' फैशन रेंटल का बाजार शेष ई-कॉमर्स बाजार के पूरक की तरह काम करता है। किराये पर परिधान लेने की कई वाजिब वजहें भी हैं। यह ब्रांडों के लिए संभावित ग्राहकों का एक व्यापक आधार भी तैयार करता है।
शाय का कहना है कि फ्लाईरोब को मिंत्रा या लाइमरोड की तर्ज पर ही अपनी ब्रांड इक्विटी तैयार करने की जरूरत होगी ताकि यह अपनी स्थिति को मजबूत कर सके क्योंकि इस बाजार में मजबूती आ रही है। पिछले अगस्त में इसने सिकोया कैपिटल के नेतृत्व में 17 लाख डॉलर की सीड फंडिंग जुटाई थी। स्नैपडील के संस्थापक कुणाल बहल और रोहित बंसल, फ्रीचार्ज के संस्थापक कुणाल शाह और संदीप टंडन, स्टैनहोप कैपिटल के अध्यक्ष जीशान हयात ने भी इसमें हिस्सा लिया।

भविष्य की राह
इस चरण की फंडिंग के साथ कंपनी ने अपना विस्तार दो अन्य शहरों में भी किया है और डिजाइनर सूट, शेरवानी तथा कुर्ता पायजामा मुहैया कराने के अलावा पुरुष परिधानों की श्रेणी की पेशकश भी की है। कंपनी ने अपने डिजाइनरों की तादाद तीन गुनी यानी 150 तक करने की योजना बनाई है और पांच शहरों में सेवाएं शुरू करना भी चाहती है ताकि ग्राहकों को और बेहतर अनुभव मिल सके। फिलहाल अभी तक कंपनी खुद ही डिलिवरी करती है, लेकिन यह काम भी ठेके पर कराने की उसकी योजना है। मुंबई की इस कंपनी का जोर अब दुल्हन और दूल्हे के परिधानों पर भी है, जहां ज्यादा कमाई होती है।

Keyword: flyrobe, garments, startup,
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