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खाते में खाद सब्सिडी भेजने की तैयारी
संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली 11 16, 2016

14 जिलों में 1 दिसंबर से शुरू होगा डीबीटी का प्रायोगिक परीक्षण

प्रत्यक्ष नकदी हस्तांतरण से 20 प्रतिशत उर्वरक सब्सिडी बचाने की कवायद में सरकार

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खाते में खाद सब्सिडी

बिजनेस स्टैंडर्ड खाते में खाद सब्सिडी भेजने की तैयारीकेंद्र सरकार को भरोसा है कि उर्वरक के लिए प्रत्यक्ष नकदी हस्तांतरण (डीबीटी) का प्रायोगिक परीक्षण देश के चिह्नित 14 जिलों में 1 दिसंबर से शुरू हो जाएगा। हालांकि विमुद्रीकरण के बाद नकदी संकट पैदा होने से ज्यादातर जगहों पर डीलर उधारी पर खाद बेच रहे हैं। उर्वरकों के लिए प्रत्यक्ष नकदी हस्तांतरण औपचारिक रूप से पेश किए जाने की प्रक्रिया में प्रायोगिक परीक्षण पहला चरण है। 

दिसंबर अंतिम तिथि इसलिए भी रखी गई है, क्योंकि उत्तर भारत के चिह्नित जिलों में रबी की बुआई का सत्र करीब खत्म हो जाएगा। प्रायोगिक तौर पर चिह्नित 16 जिलों में आंध्र प्रदेश के कृष्णा और पश्चिमी गोदावरी जिले में पहले से ही डीबीटी परिचालन में है। सरकार ने उर्वरक के मामले में डीबीटी की अवधारणा में संशोधन किया है, क्योंकि इसका सब्सिडी वितरण अलग किस्म का है। रसोई गैस या खाद्यान्न की तरह खाद के मामले में सरकार सब्सिडी लाभार्थियों के खाते में नहीं डालेगी। इसकी जगह पर किसान द्वारा एक बोरी खाद खरीदे जाने के बाद उसे कुद को खुदरा बिक्रेता के बिक्री स्थल पर रखी मशीन में खुद को चिह्नित कराना होगा। 

चिह्नित करने का माध्यम किसान क्रेडिट कार्ड या आधार संख्या होगा। किसान सब्सिडी दरों पर खाद खरीदेगा, न कि बाजार भाव पर। आधार के माध्यम से किसान को चिह्नित कराए जाने के बाद उसकी मिट्टी की स्थितियों और उïर्वरक की जरूरत देखी जाएगी कि वह उसके दायरे में आता है या नहीं। इस प्रक्रिया के बाद बाजार भाव और सब्सिडी दर के बीच अंतर की राशि को विनिर्माता के बैंक खाते में डाला जाएगा। शुरुआत में सब्सिडी का भुगतान साप्ताहिक होगा और उसके बाद व्यवस्था विकसित होने पर तुरंत भुगतान हो जाएगा। पीओएस उपकरण कंपनियों को खुद खरीदना होगा।

अधिकारियों ने कहा कि परंपरागत डीबीटी ढांचे में बदलाव करने का फैसला किया गया, क्योंकि उर्वरक के मामले में सब्सिडी की राशि ज्यादा है। कुछ मामलों में यह राशि वास्तविक बिक्री मूल्य की तुलना मेंं दोगुने से ज्यादा है। अगर किसानों को इसका भुगतान बाजार भाव से करना पड़ा तो उन पर भारी बोझ पड़ेगा। इस समय उर्वरक कंपनियां हर जिले में अपनी बिक्री की रसीद पेश करती हैं, जिसे कंपनी प्रतिनिधियों व सीए द्वारा प्रमाणित किया जाता है। इसके बाद 90 प्रतिशत से ज्यादा सब्सिडी का भुगतान 2 महीने के भीतर हो जाता है। 

अधिकारी ने बताया कि परंपरागत डीबीडी के तरीके में बदलाव न सिर्फ सब्सिडी राशि बहुत ज्यादा होने की वजह से किया गया है, बल्कि वास्तविक किसानों को उन किसानों से चिह्नित करना कठिन है, जो किसी दूसरे की जमीन पर खेती करते हैं। केंद्र सरकार का मानना है कि किसानों को बेहतर तरीके से लक्षित करने व इसकी खामियां दूर किए जाने से बचत तभी होगी, जब डीबीटी योजना पूरे देश में लागू की जाए। बहरहाल इसमें अभी कुछ वकक्त लगेगा, जो प्रायोगिक परियोजना की सफलता पर निर्भर होगा। अधिकारियों ने कहा कि उर्वरक बजट करीब 75,000 करोड़ रुपये के करीब है और बेहतर तरीके से लक्षित करने से इसमें 20 प्रतिशत बचत हो सकती है।
Keyword: subsidy, DBT, urea,,
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