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...और खुद खबरों में छा गए खबरनवीस गोस्वामी
उर्वी मलवाणिया /  November 04, 2016

उनका शो 'द न्यूजऑवर' अपने तेवरों के लिए खासा मशहूर रहा है और उसमें होने वाली तल्ख बहसों और शोरशराबे के चलते ट्वीट और लतीफों का विषय भी बनता रहा है। टाइम्स नाऊ और ईटी नाऊ के प्रेसिडेंट-न्यूज और प्रधान संपादक पद से इस्तीफा दे चुके अर्णव गोस्वामी हालांकि अपने शो की तासीर से उलट नरम मिजाज वाले मृदुभाषी शख्स हैं। पिछले वर्ष बिज़नेस स्टैंडर्ड को दिए साक्षात्कार में गोस्वामी ने ग्रामीण बाजारों में टाइम्स नाऊ के दर्शकों की संख्या का हवाला देते हुए कहा था कि आखिरकार बाजार में विषयवस्तु यानी सामग्री ही निर्णायक साबित होगी। भले ही वह मृदुभाषी हों लेकिन उनका आत्मविश्वास आक्रामकता की बानगी पेश करता है। उन्होंने कहा था, 'हमारी सफलता और वृद्घि दर्शाती है कि चैनल का नाम बदलने के बजाय सामग्री में निवेश  अंतत: फलदायी होती है।'

 
फिर भी उनके तमाम कनिष्ठ सहयोगी यही बताएंगे कि वह थोड़े तुनक मिजाज हैं, जिन्हें सुस्ती से काम करने वाले लोग जरा भी नहीं भाते। मुंबई में उनके साथ तकरीबन दो साल काम कर चुके एक पूर्व सहकर्मी कहते हैं कि गोस्वामी जब भी एनडीटीवी और सीएनएन आईबीएन पर कुछ देखते और  अपने चैनल पर नहीं पाते तो वह अपने दफ्तर से बाहर निकलकर चिल्लाते हुए कहते, 'तुम लोग मेरे चैनल को बरबाद करने पर तुले हो। इस दौरान उनकी आवाज का स्वर इतना तेज होता था कि वह टाइम्स नाऊ के लंबे गलियारे को पार करते हुए जूम और ईटी नाऊ के दफ्तरों तक पहुंच जाता था।' वास्तव में टाइम्स नेटवर्क में एक चुटकुला चलता था कि अगर चैनल में कोई गलत स्टोरी या कुछ और गड़बड़ी कर देता तो सजा के तौर पर उसे कुछ हफ्तों तक गोस्वामी के शो में टिकर चलाने का काम दिया जाता। 'द न्यूजऑवर' में अपने तेजतर्रार अंदाज से वह घर-घर में पहचाने जाने लगे और उनके इस शो के दम पर चैनल निर्विवाद रूप से शीर्ष पर पहुंच गया। वर्ष 2008 में मुंबई में हुआ 26 नवंबर का आतंकी हमला उनके लिए एक बड़ा पड़ाव साबित हुआ। इस दौरान उन्होंने 65 घंटों से ज्यादा समय तक एंकरिंग कर कीर्तिमान ही स्थापित कर दिया। लोगों ने इस बात का संज्ञान लिया। एक सहकर्मी का कहना है, 'आतंकी हमले से मर्माहत देश को उनका तेजतर्रार अंदाज भा गया।' उसके बाद तो उनकी यही शैैली बन गई। 
 
शीर्ष पर जगह 
 
ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल इंडिया (बीएआरसी) के अनुसार टाइम्स नाऊ देश में अंग्रेजी का निर्विवाद रूप से शीर्ष चैनल है और कोई अन्य चैनल उसके आसपास भी नहीं। इस साल के 42वें सप्ताह (15 अक्टूबर से 21 अक्टूबर) में गोस्वामी की अगुआई वाले चैनल को जहां 6,32,000 इंप्रेशन मिले थे, वहीं उसके निकटतम प्रतिद्वंद्वी सीएनएन न्यूज18 को 2,89,000 इंप्रेशन हासिल हुए थे। इंप्रेशन से आशय एक कार्यक्रम के दौरान चैनल को देखने वाले कुल दर्शकों की संख्या से है। गोस्वामी के इस करिश्मे ने चैनल की कमाई को बढ़ाने में भी अहम योगदान दिया। विज्ञापनों के जरिये होने वाली उसकी आय में यह झलकता भी है। अंग्रेजी के समाचार चैनलों में सप्ताह के आम दिनों के दौरान विज्ञापनों के लिए 3,000 रुपये की सबसे ऊंची दर होती है। वहीं उद्योग जगत के अनुमान के अनुसार टाइम्स नाऊ के प्राइमटाइम के लिए यही दर 20,000 रुपये के आसपास है। वहीं किसी घटनाक्रम से बढ़ी हलचल या चुनावों के दौरान यह दर और भी ऊपर चली जाती रही है। टाइम्स नाऊ को कमाऊ बनाने में गोस्वामी के कार्यक्रम ने निर्णायक भूमिका निभाई और चैनल का 70 फीसदी राजस्व गोस्वमी के शो से  ही आता रहा है।
 
ब्रांड के अग्रदूत 
 
जहां उनका शो अंग्रेजी समाचारों की दुनिया में लोगों के लिए देखना एक तरह से जरूरी हो गया, वहीं इस दौरान ब्रांड गोस्वामी भी स्थापित होता गया। हालांकि अपनी जबरदस्त सफलता से वह आलोचकों और अपने समकक्षों के निशाने पर आ गए लेकिन कोई भी उनकी दमदार शख्सियत को नकार नहीं सकता। ब्रांड विशेषज्ञ और हरीश बिजूर कंसल्ट्स के संस्थापक हरीश बिजूर कहते हैं, 'गोस्वामी निश्चित रूप से एक ब्रांड हैं। वह लोगों के दिमाग पर हावी हो जाते हैं और बड़े ताकतवर ढंग से ऐसा करते हैं, वह भविष्य में जो भी करेंगे, उसमें उनकी शख्सियत की छाप होगी, जिसे उन्होंने कई वर्षों की मेहनत से विकसित किया है। देखने में भले ही वह किसी सामान्य लड़के की तरह लगें लेकिन उनका रवैया किसी उपदेशक जैसा ही है, जिसे अगर अपनी बात पर भरोसा है तो वह कहीं से भी किसी पर चिल्ला सकता है।'
 
उनके सहकर्मी बताते हैं कि गोस्वामी के इर्द-गिर्द मचता शोर, जो भले ही सकारात्मक या नकारात्मक हो, अब इस ब्रांड का हिस्सा बन चुका है। बिजूर कहते हैं, 'उन्होंने जो छवि बनाई है अब उनकी शख्सिसत से उसे पहचान मिलने लगी है।' हालांकि ब्रांड विशेषज्ञ गोस्वामी के ब्रांड और शख्सियत के आकलन के अलावा सोशल मीडिया पर उन्हें मिलने वाली चर्चा पर सहमत हैं लेकिन दूसरी जगहों पर काम करने वाले दिग्गज उनके बारे में बात करने से हिचकते हैं। प्रसिद्घ पत्रकार और हेडलाइंस टुडे में सलाहकार संपादक राजदीप सरदेसाई कूटनीतिक अंदाज में कहते हैं, 'मैं हमेशा उन्हें शुभकामनाएं दूंगा।' हालांकि तमाम दूसरे दिग्गज उनके बारे में बात करने से कतराते हैं। 
 
एक वरिष्ठï पत्रकार दावा करते हैं कि उन्होंने गोस्वामी के बहुत ज्यादा कार्यक्रम नहीं देखे हैं, लिहाजा वह इस मामले में टिप्पणी नहीं कर पाएंगे, जबकि एक अन्य का कहना है कि उन्होंने टीवी समाचार श्रेणी में एक बेवजह की खलबली मचा दी है जो जरूरी नहीं कि ठीक ही हो। हालांकि यह पत्रकार इस बात को आगे खींचने से इनकार कर देते हैं और उनका कहना है कि इस पर ज्यादा कुछ कहना सही नहीं होगा। 
 
अब सभी नजरें उनके अगले कदम पर लगी हैं। कुछ लोगों का कहना है कि वह अपना खुद का उपक्रम शुरू करेंगे। ऐसी अटकलें भी हैं कि वह डिजिटल-टीवी के मिश्रण वाली कंपनी शुरू कर सकते हैं, जैसा कि राघव बहल क्विंट-ब्लूमबर्ग जुगलबंदी के साथ कर रहे हैं। ऐसा मानने वालों की भी कमी नहीं है कि वह टीवी समाचारों की मौजूदा दुनिया में ही बने रहेंगे। ऐसी खबरें भी हैं कि वह राजीव चंद्रशेखर के साथ मिलकर 24 घंटे का अंग्रेजी समाचार चैनल शुरू करेंगे। 
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