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एसऐंडपी ने भारत की रेटिंग रखी यथावत, अगले साल भी नहीं सुधार
भाषा / नई दिल्‍ली 11 02, 2016

देश की वित्तीय साख में सुधार की सरकार की उम्मीदों को झटका देते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसी एसऐंडपी ने देश की वित्तीय साख को 'बीबीबी-ऋणात्मक' के स्तर पर बरकरार रखा है। साथ ही अगले साल भी आर्थिक स्‍तर इसी तरह स्थिर बने रहने का अनुमान लगाया है। एजेंसी ने राजकोषीय स्थिति की कमजोरी का हवाला देते हुए देश की साख के मौजूदा स्तर से ऊंचे स्तर पर पहुंचने की संभावना से इनकार किया है। एसऐंडपी ग्लोबल रेटिंग ने एक वक्तव्य में कहा है, 'इस स्थिर परिदृश्य से ही भारत की बाहरी मोर्चे पर मजबूती तथा समावेशी नीति-निर्माण परंपरा और निम्न प्रति व्यक्ति आय तथा कमजोर सार्वजनिक वित्तीय स्थिति के बीच संतुलन बना हुआ है।' इसमें कहा गया है, 'अनुमान व्यक्त करने के हमारे मौजूदा मानदंडों के आधार पर परिदृश्य से यह संकेत मिलता है कि इस साल और अगले साल के लिए भारत की रेटिंग में बदलाव की कोई उम्मीद नहीं है।'

'बीबीबी ऋणात्मक' रेटिंग निवेश योग्य श्रेणियों की सबसे निचली दर्जे की रेटिंग है। एसऐंडपी का कहना है कि उस पर क्रडिट रेटिंग को बढ़ाने का दबाव तभी बनेगा जब सुधारों से सरकार की वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दिखाई दे और सरकार का सामान्य ऋण जीडीपी के 60 प्रतिशत से नीचे आ जाए। भारत सरकार का इस समय घरेलू ऋण जीडीपी का 69 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। एजेंसी ने कहा है कि नीति-निर्माण में सुधार के बावजूद वित्तीय घाटे, भारी ऋण बोझ और निम्न प्रति व्यक्ति आय की चिंता लगातार बढ़ी है। उसका कहना है कि यदि सुधार आगे नहीं बढ़ते हैं, ब्याज दर तय करने वाली मौद्रिक नीति समिति मुद्रास्फीति लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाती है और वृद्धि दर निराश करती है तो रेटिंग कम करने का दबाव उस पर फिर से बढ़ जाएगा।

एसऐंडपी ने कहा है भारत की बाह्य तरलता स्थिति में उम्मीद से ज्यादा कमजोरी आने से भी उस पर रेटिंग को कम करने का दबाव बढ़ेगा। रेटिंग एजेंसी को उम्मीद है कि 2016 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.9 प्रतिशत रहेगी। इस दौरान चालू खाते का घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.4 प्रतिशत रहेगा। एजेंसी को यह भी उम्मीद है कि रिजर्व बैंक मार्च 2017 तक पांच प्रतिशत के मुद्रास्फीति लक्ष्य को हासिल कर लेगा। एसऐंडपी ने इससे पहले सितंबर 2014 में भारत की रेटिंग को बढ़ाकर नकारात्मक से स्थिर कर दिया था। एजेंसी का कहना है कि उसने भारत की जो रेटिंग दी है उससे भारत के बाहरी मोर्चे पर मजबूत स्थिति और मौद्रिक साख में आया सुधार परिलक्षित होता है। एजेंसी ने कहा है कि भारत के मजबूत लोकतांत्रिक संस्थान और स्वतंत्र मीडिया उसकी नतियों की स्थिरता और विश्वसनीयता को बढ़ाते हैं।

सरकार द्वारा जीएसटी विधेयक को पारित कराने और राजनीतिक दलों के बीच इसके लिए आम सहमति कायम करने में सफल रहने की प्रशंसा करते हुए रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि इससे वर्ष 2017 की पहली छमाही में व्यापक कर सुधार अमल में आ सकते हैं। एजेंसी ने अन्य सुधारों में व्यावसायिक माहौल को बेहतर बनाना, श्रम बाजार में लचीलापन बढ़ाना और ऊर्जा क्षेत्र में सुधारों को अहम बताया है। भारत की रेटिंग बढऩे की आशाओं पर एजेंसी ने कहा कि 2016 में भारत का 1,700 डॉलर की प्रति व्यक्ति निम्न जीडीपी रहा है। हालांकि भारत की वृद्धि दर उसके समकक्ष दूसरे देशों से अधिक रही है और यह आगे बढ़ रही है। रेटिंग एजेंसी को 2016 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.9 प्रतिशत रहने और 2016-2018 के बीच औसतन 8 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है।

Keyword: वित्तीय साख, क्रेडिट रेटिंग एजेंसी, एसऐंडपी, बीबीबी-ऋणात्मक, राजकोषीय स्थिति,
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