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फौरन बदलें डेबिट कार्ड का पिन ताकि चैैन न जाए छिन
प्रिया नायर /  10 20, 2016

रहें सावधान, अपनाएं एहतियाती उपाय

 देश के पांच बैंकों के डेबिट कार्ड से संबंधित जानकारी के चोरी होने के बाद एटीएम का इस्तेमाल करते समय काफी सावधानी बरतने की जरूरत है। अगर संभव हो तो केवल अपने बैंक के एटीएम का ही इस्तेमाल करें

अपने डेबिट कार्ड से हुए लेनदेन के ब्योरे पर एक नजर डालें, यह पता लगाने की कोशिश करें कि किसी और स्थान पर इस कार्ड से कोई खरीदारी तो नहीं हुई है
बैंक से एसएमएस अलर्ट सेवा जरूर लें ताकि हरेक संदिग्ध लेनदेन की आपको जानकारी मिल सके
एटीएम पिन नियमित रूप से बदलें। जैसे हर 3 या 6 महीने में एक बार पिन बदलें
कई कार्डों के लिए एक ही पिन रखने से परहेज करें
अपना पिन कभी भी किसी को न बताएं, खास तौर पर फोन पर पिन मांगने पर सतर्क हो जाएं
किसी दुकान पर कार्ड से खरीदारी करते समय यह ध्यान रखें कि कोई देख तो नहीं रहा
अपने फोन नंबर और ईमेल आईडी के बारे में हर किसी को न बताएं, इसके आधार पर भी आपके खाते की जानकारी जुटाई जा सकती है
संदिग्ध नजर आने वाले ईमेल या वेबसाइट लिंक को क्लिक न करें, इससे आपका डाटा चोरी हो सकता है
ऐसी घटना के तुरंत बाद बैंक को सतर्क कर आगे  नुकसान से बचने के लिए  कार्ड तुरंत ब्लॉक करा दें

बिजनेस स्टैंडर्ड फौरन बदलें डेबिट कार्ड का पिन ताकि चैैन न जाए छिनपिछले कुछ समय से कई ग्राहकों को अपने बैंक की तरफ से ऐसे मेल और संदेश आ रहे हैं जिनमें उन्हें अपना एटीएम कार्ड का पिन तत्काल बदलने की सलाह दी गई है। अब जाकर इसकी वजह का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक देश के पांच बैंकों से जुड़े करीब 32 लाख खाताधारकों के डेबिट कार्ड से जुड़ी जानकारियां लीक हुई हैं लिहाजा इन खातों के साथ धोखाधड़ी की आशंका पैदा हो गई है। 

देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई, ऐक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और येस बैंक के खातों से जुड़़ी जानकारियां खतरे की जद में आई हैं। इसी आशंका को देखते हुए बैंकों की तरफ से अपने खाताधारकों को यह सलाह दी जा रही है कि वे अपना पिन नंबर बदलने में देर न करें। बैंकिंग और साइबर सुरक्षा के विशेषज्ञों का कहना है कि खाताधारक को सामान्य स्थिति में भी हरेत तीन या छह महीने पर अपना पिन नंबर बदल देना चाहिए। ऐसे में सवाल उठता है कि कहीं बैंक जरूरत से ज्यादा सतर्क रुख तो नहीं अपना रहे हैं? इसका जवाब शायद ना है। खाताधारकों के कार्ड से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारियों के साथ छेड़छाड़ होने के बाद कई अन्य बैंकों ने भी अपने ग्राहकों को कार्ड की सुरक्षा जानकारी को बदलने और केवल अपने बैंक के एटीएम से ही निकासी करने की सलाह दी है। 

सलाहकार फर्म क्रॉल एडवाइजरी सॉल्यूशंस की भारतीय परिचालन प्रमुख रेशमी खुराना के मुताबिक, कुछ ग्राहकों ने अपने डेबिट कार्ड से चीन में लेनदेन होने की शिकायतें दर्ज कराईं जिसके बाद बैंकों को कार्ड सुरक्षा में सेंधमारी की जानकारी मिली। बैंकों ने एटीएम भुगतान सेवा देने वाली कंपनियों को इससे अवगत करा दिया लेकिन ऐसा लगता है कि एक विदेशी भुगतान कंपनी के सिस्टम से छेड़छाड़ की गई है और उसे फॉरेंसिक ऑडिट का भी सामना करना पड़ सकता है।

रेशमी खुराना कहा, 'हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है लेकिन लगता है कि डाटाबेस में सेंधमारी का काम किसी सफेद लेबल वाले एटीएम नेटवर्क पर ही हुआ है। यही वजह है कि बैंक अपने खाताधारकों को केवल अपने एटीएम नेटवर्क का ही इस्तेमाल करने की सलाह दे रहे हैं।'

एटीएम नेटवर्क से छेड़छाड़ का यह मतलब है कि न केवल उस बैंक के खाताधारक बल्कि उस नेटवर्क का इस्तेमाल करने वाले अन्य बैंकों के ग्राहक भी डाटा चोरी के शिकार हो सकते हैं। अधिकांश ग्राहक तो काफी भरोसे से एटीएम मशीन में अपने कार्ड का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि उनकी नजर में बैंक निगरानी में होने से यह काफी सुरक्षित होते हैं। लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता है। देश में करीब 70 फीसदी एटीएम मशीनें अब भी पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम पर ही चलती हैं जिससे धोखाधड़ी करने वालों के लिए सुरक्षा में सेंध लगाना आसान हो जाता है।

डेटा प्राइवेसी और सिक्योरिटी कंपनी फोर्सप्वाइंट के रणनीतिक सुरक्षा सलाहकार हर्शिल दोषी कहते हैं, 'माइक्रोसॉफ्ट ने लगभग दो साल पहले विंडोज एक्सपी से समूचा सपोर्ट वापस ले लिया था लेकिन कई एटीएम अभी भी इसी ऑपरेटिंग सिस्टम पर चल रहे हैं जिससे उनमें मालवेयर और धोखाधड़ी की आशंका बढ़ गई है।' बैंक विभिन्न कंपनियों की एटीएम मशीनों का इस्तेमाल करते हैं। इसके चलते भी नेटवर्क और प्रौद्योगिकी का मानकीकरण संभव नहीं हो पाता है। धोखेबाजों ने सभी तरह की एटीएम मशीनों को निशाना बनाने के लिए कई उपकरण भी बना लिए हैं।

खुराना बताती हैं कि एक बार मालवेयर का पता चलते ही बैंक या भुगतान सेवा कंपनी उस पर काबू पा सकती है लेकिन उसकी शिनाख्त कर पाना ही सबसे बड़ी बड़ी मुश्किल है। विदेशों में तो इस तरह के मामले अक्सर होते रहते हैं लेकिन भारत भी अब इन हमलों की जद में आने लगा है। इसे रोकने के लिए अधिक सतर्क रुख अपनाने और सही नियंत्रण रखने की जरूरत है। 

एक्सेंचर इंडिया में वित्तीय सेवा परिचालन के निदेशक पीयूष सिंह कहते हैं कि डिजिटल सुरक्षा पर परिचालन व्यय कई गुना बढ़ाने से ही बात बनेगी। दरअसल भारत डिजिटल तकनीक अपनाने के मामले में काफी आगे रहा है लेकिन डिजिटल सुरक्षा के मोर्चे पर हम अभी काफी पीछे हैं। इसके लिए बैंकों और ग्राहकों दोनों को ही सावधानी बरतनी होगी। सिंह कहते हैं कि यह बैंकों की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ मसला है। बैंक ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने के लिए उनका खोया हुआ धन वापस लौटा सकते हैं लेकिन इससे समस्या का समाधान तो नहीं होगा।

Keyword: credit card, debit, bank,,
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