बिजनेस स्टैंडर्ड - अनएकेडमी : वीडियो के जरिए पढ़ाई
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अनएकेडमी : वीडियो के जरिए पढ़ाई
अपूर्वा वेंकट और रंजू सरकार /  10 02, 2016

खुद सीखने में मदद करने वाला प्लेटफॉर्म अनएकेडमी आजकर लोकप्रिय हो रहा है। इस स्टार्टअप को अब खुद को आर्थिक रूप से स्थापित करना है। बता रही हैं अपूर्वा वेंकट और रंजू सरकार

25 साल के के. गणेश आईएएस बनना चाहते हैं। वह एक निजी कंपनी में काम करते हैं और अधिकांशत: रात में या तड़के पढ़ाई करते हैं। जब वह आईएएस की पढ़ाई के लिए मार्गदर्शन की तलाश में थे तो एक मित्र ने उन्हें अनएकेडमी की सलाह दी। यह सेल्फ लर्निंग प्लेटफॉर्म है जो मुफ्त में विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के वीडियो मुहैया कराता है।
इस प्लेटफॉर्म की शुरुआत यूट्यूब पर हुई थी और यह छात्रों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने में मदद करता है। प्लेटफॉर्म के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी गौरव मुंजाल ने कहा, 'हम शिक्षा के लिए यूट्यूब बनना चाहते हैं, विभिन्न भाषाओं में पाठ्यक्रम तैयार करना चाहते हैं और आगे हमारा लक्ष्य भारत से बाहर भी अपना कारोबार फैलाने का है।' कई पाठ्यक्रम हिंदी में हैं और एक ट्यूटर तो पंजाबी में भी अर्थशास्त्र पढ़ाते हैं।
इस शिक्षा और प्रौद्योगिकी स्टार्टअप ने एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया है जो दूसरी पीढ़ी के दूरसंचार नेटवर्क पर भी आसानी से चल सकता है। स्टार्टअप को अगस्त में ब्लूम वेंचर्स, सचिन बंसल, बिन्नी बंसल और विजय शेखर शर्मा आदि से 10 लाख डॉलर की फंडिंग मिली है। इससे पहले उसे अप्रैल में ब्लूम वेंचर्स की तरफ से 5 लाख डॉलर की फंडिंग मिली थी। मुंजाल फ्लैटडॉटटू के सहसंस्थापक थे जिसका कॉमनफ्लोर ने अधिग्रहण कर लिया था। कंपनी ने फिर इसका नाम बदलकर फ्लैटचैट रख दिया था।
ब्लूम के सहसंस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर संजय नाथ कहते हैं कि अनएकेडमी बिल गेट्स समर्थित खान एकेडमी की तरह है जो मुफ्त वीडियो मुहैया कराती है। उन्होंने कहा, 'यह यूट्यूब और ट्विटर का दौर है। युवा इसे परीक्षाओं की तैयारी सहित हर चीज के लिए इस्तेमाल करेंगे। अनएकेडमी 10-15 मिनट के दिलचस्प पाठ्यक्रम वाले वीडियो मुहैया कराता है।' इसकी शुरुआत एक प्रयोग के तौर पर हुई जब मुंजाल ने 2010 में यूट्यूब पर ट्यूटोरियल वीडियो पोस्ट करना शुरू किया। अनएकेडमी के पास अपने प्लेटफॉर्म और यूट्यूब पर अब कम से कम 3,000 वीडियो और 25 लाख दर्शक हैं। स्टार्टअप का कहना है कि उसने पैसे खर्च किए बिना लोकप्रियता हासिल कर ली है। मुंजाल ने कहा, 'हम हर महीने 30,000 डॉलर (20 लाख रुपये से कम) से भी कम खर्च करते हैं।'
शिक्षक विभिन्न विषयों पर अपने वीडियो प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर सकते हैं और छात्र मुफ्त में इन्हें देख सकते हैं। ये वीडियो 15-20 मिनट के हैं और सिविल सेवा की परीक्षा देने वाले छात्रों के बीच यह प्लेटफॉर्म सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। प्लेटफॉर्म विभिन्न विषयों के अच्छे जानकारों का इस तरह इस्तेमाल करना चाहता है ताकि हर कोई आसानी से इसे समझ सके और इसका इस्तेमाल कर सके।

अवसर
मुंजाल का अनुमान है कि भारत का शिक्षा का बाजार 10 अरब डॉलर का है। इनमें जीआरई, जीमैट, कैट, जेईई, आईआईएम और आईआईटी की परीक्षाओं की तैयारी का बाजार भी शामिल है। हर साल करीब 4 करोड़ लोग सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली परीक्षाओं में बैठते हैं। इसका बाजार एक अरब डॉलर होने का अनुमान है और अनएकेडमी इसी पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है।
कई कोचिंग संस्थान ऐसे हैं जो एक ही परीक्षा की तैयारी कराते हैं और उनका सालाना बाजार 500-600 करोड़ रुपये का है। हर तरह की परीक्षाओं के लिए कोचिंग संस्थान हैं। मुंजाल कहते हैं, 'हमारा प्लेटफॉर्म स्वाध्याय वाला है और हमारा फोकस कॉलेज के उन छात्रों पर है जो खुद ही परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं।' मुंजाल का दावा है कि उनका स्टार्ट अप सिविल सेवा परीक्षा के बाजार में शीर्ष पर है और 100 आईएएस टॉपरों में से 30 ने अपने अनभुवों के बारे में कंपनी की साइट पर अपने वीडियो साझा किए हैं। इनमे इस साल आईएएस परीक्षा की टॉपर टीना डाबी और अर्किता शुक्ला शामिल हैं। मुंजाल कहते हैं, 'हमारे पास देश के शीर्ष शिक्षाविदों के कंटेंट हैं और हमने एक ब्रांड स्थापित कर लिया है।' उन्होंने कहा कि यूट्यूब और फेसबुक किसी खास वर्ग पर फोकस नहीं करते हैं। मुंजाल ने कहा, 'उनकी तरह हम भी सबसे बड़ी वीडियो एजुकेशन कंपनी बनना चाहते हैं।'

बिजनेस मॉडल
इस स्टार्ट अप की शुरुआत इस साल जनवरी में हुई और वह अपने राजस्व मॉडल पर काम कर रही है। कंपनी कंटेंट देने वाले शिक्षकों को मामूली पैसा देती है। वीडियो का लाभ उठाकर प्रतियोगी परीक्षा में सफल होने वाले लोग भी कुछ गुरु दक्षिणा देते हैं। कंपनी इसमें से अपना हिस्सा निकालकर बाकी पैसा शिक्षाविदों को दे देती है।
अनएकेडमी के वीडियो 12 लाख बार देखे जा चुके हैं और हर महीने 4 लाख लोग इनका रुख करते हैं। कंपनी की मासिक वृद्घि 30 फीसदी है। कंपनी का लक्ष्य 2017 तक रोजाना 10 लाख सक्रिय यूजर बनाना है। ब्लूम वेंचर्स के नाथ कहते हैं, 'हमारा जोर ज्यादा यूजरों तक पहुंचने का है। हमारे लिए राजस्व अहम है लेकिन वृद्घि की कीमत पर नहीं।' स्टार्ट अप के नेटफ्लिक्स की तरह सबक्रिप्शन मॉडल अपनाने की संभावना है जहां उपभोक्ताओं को विज्ञापन रहित वीडियो हासिल करने के लिए भुगतान करना पड़ेगा। इसे साथ ही पर्सनलाइज भी किया जाएगा। यानी उपभोक्ता अपनी शंकाओं के समाधान के लिए ट्यूटर से संपर्क कर सकते हैं। मुंजाल कहते हैं, इस समय हमारा जोर ज्यादा शिक्षाविदों को जोडऩे पर है ताकि अच्छा पाठ्यक्रम तैयार किया जा सके।'

चुनौतियां
सबसे बड़ी चुनौती इन वीडियो की गुणवत्ता को बनाए रखने की है जब सैकड़ों लोग इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि कंपनी हर ट्यूटर-शिक्षक का साक्षात्कार लेती है, उन्हें प्रशिक्षण देती है लेकिन फिर भी हरेक वीडियो की गुणवत्ता सुनिश्चित करना नौ महीने पुराने स्टार्ट अप के लिए एक बड़ी चुनौती है।
दूसरी चुनौती लोगों को किसी खास विषय पर पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए मनाने की है। कंपनी प्रति विषय के लिए केवल 500 रुपये देती है। ऐसे में अच्छे विशेषज्ञों की सेवा कैसे ली जा सकेगी। शिक्षकों के लिए यह अपना ब्रांड बनाने का मौका है। कई शिक्षकों के 50,000 तक फॉलोवर हैं। कुछ ने अपने प्रचार के लिए अखबारों में विज्ञापन भी दिए हैं जिनमें अनएकेडमी में 50,000 फॉलोवर होने का दावा किया गया है।

आगे की राह
स्टार्ट अप का पहला लक्ष्य रोजाना सक्रिय उपभोक्ताओं की संख्या 10 लाख पहुंचाना है। साथ ही उसे अपने राजस्व मॉडल पर काम करना है। कंपनी ट्यूटर पर एक ऐप भी लॉन्च करेगा जिसके इस्तेमाल से वे स्मार्टफोन पर एक पाठ्यक्रम बना सकते हैं। इस ऐप के माध्यम से वे तस्वीरों, पॉइंटर, हाथ से लिखी सामग्री, लिंक, साउंड और ग्राफ को एक ही वीडियो में जोड़ सकेंगे और अपलोड कर सकेंगे। मुंजाल ने कहा, 'हमारा लक्ष्य प्रक्रिया को इतना आसान बनाना है कि मेरी दादी भी इस प्लेटफॉर्म पर शिक्षक बन सकती है।'

Keyword: start-ups, unacademy, education,
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