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स्टार्टअप में सीएसआर पूंजी का निवेश
मौलिश्री श्रीवास्तव और विनय उमरजी /  October 02, 2016

टाटा मोटर्स, सैप और बजाज इलेक्ट्रिकल जैसी कंपनियां सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त इनक्यूबेटर्स के जरिये स्टार्टअप में निवेश कर रही हैं जो उन्हें अनिवार्य रूप से कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत खर्च करना पड़ता है। इनक्यूबेटर स्टार्टअप या शुरुआती चरण वाली कंपनियों की वृद्धि और सफलता के लिए काम करते हैं। देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान आईआईटी और प्रबंधन संस्थान आईआईएम के इनक्यूबेटर्स में सीएसआर पूंजी खर्च करने के लिए करीब एक दर्जन कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है ताकि छात्रों के स्टार्टअप को बढ़ावा दिया जा सके और इससे परंपरागत कारोबारी मॉडल के साथ इसका सामाजिक असर भी पड़े।
वर्ष 2014 में भारत ऐसा पहला देश बना जहां 500 करोड़ रुपये से ज्यादा हैसियत वाली या 1,000 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करने वाली या फिर 5 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाने वाली कंपनी को पिछले तीन सालों के औसत मुनाफे का 2 फीसदी हिस्सा सीएसआर ने नाम पर खर्च करना अनिवार्य कर दिया गया।
आईआईटी बम्बई के इनक्यूबेटर, दि सोसाइटी फॉर इनोवेशन ऐंड एंटरप्रेन्योरशिप (एसआईएनई) से सैप और टाटा मोटर्स जैसी कंपनियां इस साल के शुरुआत में जुड़ीं ताकि स्टार्टअप के विकास में मदद दी जाए। आईआईएम अहमदाबाद में भी महिंद्रा फाइनैंस, बजाज इलेक्ट्रिकल्स और कैस्ट्रॉल जैसी कंपनियों ने संस्थान के सेंटर फॉर इनोवेशन, इनक्यूबेशन ऐंड एंटरप्रेन्योरशिप (सीआईआईई) के साथ साझेदारी की है। सैप इंडिया के सीएसआर प्रमुख गुंजन पटेल का कहना है, 'हम निवेश करने योग्य, दायरा बढ़ाने लायक वृद्धि उन्मुख सामाजिक उद्यम तैयार करना चाहते हैं जिसका असर लोगों पर हो। देश में बेहतर आर्थिक माहौल बनाने के लिए यह एक बेहतर तरीका है।'
सैप अपने सीएसआर बजट का 40 फीसदी हिस्सा स्टार्टअप इनक्यूबेटर्स के लिए रखती है और यह इससे जुड़े कुछ कार्यक्रम आईआईएम अहमदाबाद, हैदराबाद के इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस में चला रही है जिसे गैर-लाभकारी संगठन के तौर पर उद्यमों के लिए सीएसआर कार्यक्रम चलाने की अनुमति सरकार से मिली हुई है। पटेल कहते हैं, 'इस साल हमें उम्मीद है कि हमारा खर्च बढ़ेगा।' सैप ने पिछले साल के महज आठ स्टार्टअप के बजाय इस वित्त वर्ष 50 स्टार्टअप की मदद करने की योजना बनाई है।
एसआईएनई में सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ी पृष्ठभूमि के उद्यमियों की मदद करने में टाटा मोटर्स मदद कर रही है। एसआईएनई में कंपनी सोलर एनर्जी कंसल्टिंग कंपनी क्वॉट के साथ भी काम कर रही है ताकि सौर ऊर्जा से जुड़े उपाय करने और अपना कारोबार चलाने के लिए आदिवासी युवाओं के प्रशिक्षण में मदद मिल सके। टाटा मोटर्स में सीएसआर प्रमुख विनोद कुलकर्णी का कहना है, 'हम आईआईटी बम्बई, आईआईटी गांधीनगर, आईआईएम बेंगलूर और आईआईएससी जैसे संस्थानों के शैक्षणिक कार्यक्रमों के लिए मौजूद हैं लेकिन हम लंबी अवधि में इन संस्थानों में उद्यमियों से जुड़ी गतिविधियों का समर्थन करना चाहते हैं।' उनका कहना है, 'हम थोड़े अलग सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के युवाओं की मदद करना चाहते हैं क्योंकि हमारा मानना है कि वे न केवल खुद की बल्कि समान पृष्ठभूमि के दूसरे लोगों की भी मदद करेंगे।'
सिडबी और एसआईसीओएम भी एसआईएनई में सीएसआर के मकसद से आगे आई हैं और ये बुनियादी ढांचे से लेकर पूंजी देने, क्षमता निर्माण गतिविधियों में अपना योगदान देंगी। एसआईएनई में प्रोफेसर में मिलिंद आत्रेय का कहना है, 'सीएसआर मॉडल अब काम कर रहा है। हम यह देख रहे हैं कि कई कंपनियां स्टार्टअप के विकास के लिए पैसे देने के लिए तैयार हैं और इसमें उनकी दिलचस्पी भी है।' कुछ कंपनियों के लिए स्टार्टअप कारोबार के लिहाज से बेहद सार्थक है। प्रमुख वेंचर ऋण दात्री कंपनी, इन्नोवेन कैपिटल में सीईओ अजय हटंगड़ी का कहना है, 'हम कारोबार के सभी हिस्से के लिए काम कर रहे हैं और इनक्यूबेटर्स के साथ काम करना एक अच्छा कदम है। इसके जरिये हम स्टार्ट अप के बारे में जल्द ही जान जाते हैं और इसका अंदाजा भी होता है कि वहां कुछ नया क्या हो रहा है। स्टार्टअप की मदद करना हमारे कारोबार के लिए अहम है।' कंपनी एसआईएनई में एक साइंस स्टार्टअप की फंडिंग कर रही है और यह आईआईएम अहमदाबाद में कार्यक्रम भी चला रही है। आईआईएम-ए के सीआईआईई को टेक सॉल्यूशंस, इंडिया इन्फोलाइन और बॉश ग्रुप से योगदान मिला है। वहीं टेक सॉल्यूशंस और बजाज इलेक्ट्रिकल्स ने 25-25 लाख रुपये का योगदान किया। महिंद्रा फाइनैंस ने भी 25 लाख रुपये और 50 लाख रुपये का शुरुआती निवेश कृषि-तकनीक में किया।  वर्ष 2014 से ही इनक्यूबेशन केंद्र ने सीएसआर के जरिये 4 करोड़ रुपये जुटाए। सीआईआईई में उपाध्यक्ष (इम्पैक्ट इन्वेस्टमेंट) सलीम वाली का कहना है, 'हम कंपनियों के साथ संवाद करते रहे हैं कि इनक्यूबेशन केंद्र की भूमिका के तौर पर हम सामाजिक विकास के लिए उद्यमशीलता के जरिये सक्रिय रह सकते हैं।' वाली का कहना है, 'हम अपनी क्षमता बढ़ा रहे हैं ताकि सीएसआर खर्च के रूप में जो योगदान हो रहा है वह न्यायोचित लगे।' कई कंपनियों के साथ बातचीत हो रही है और सीआईआईई को यह उम्मीद है कि सीएसआर खर्च इस वित्त वर्ष में 5-6 करोड़ रुपये रहेगा।
आईआईटी पटना में इस साल फरवरी में स्थापित ऐसे एक इनक्यूबेटर्स से कंपनियों ने पूछताछ की है। आईआईटी पटना के इनक्यूबेशन सेंटर के प्रबंधक आदित्य नटराज का कहना है, 'कुछ कंपनियों ने हमसे संपर्क किया है। हालांकि ज्यादातर कंपनियों ने कोई निश्चित क्षेत्र नहीं बताया है बल्कि वे मुख्यतौर पर स्टार्ट अप में निवेश करना चाहती हैं।' नैसकॉम फाउंडेशन के अध्यक्ष गणेश नटराजन के मुताबिक सरकार का मुख्य जोर स्टार्टअप पर है।

Keyword: tata motors, start-ups, CSR,
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