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दूरसंचार टावर कारोबार बेचकर ऋण चुकाएगी जीटीएल
देव चटर्जी / मुंबई September 21, 2016

ऋण को इक्विटी में बदलकर जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर नियंत्रण हासिल करने के लिए ऋणदाताओं को तैयार देखते हुए जीटीएल समूह के संस्थापक मनोज तिरोडकर ने अंतत: अपने दूरसंचार टावर कारोबार से बाहर होने का निर्णय लिया है। दूरसंचार टावर कंपनी की बिक्री से प्राप्त रकम के बल पर तिरोडकर को अपने समूह की प्रमुख कंपनी जीटीएल लिमिटेड की ऋण समस्याओं से निपटने में मदद मिलेगी जिससे पूरा समूह पिछले छह साल से जूझ रहा है।
 
तिरोडकर ने दक्षिणी मुंबई के गिरगांव की गलियों से अपनी यात्रा शुरू की थी और 2010 तक वह अरबपति बनकर उभरे। लेकिन उसके तुरंत बाद उन्हें एक बड़ा झटका लगा जब अनिल अंबानी की स्वामित्व वाली दूरसंचार कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस के साथ विलय सौदा उसी साल टूट गया। जून 2011 में शेयर के धाराशायी होने के बाद जीटीएल समूह अब तक संभल नहीं पाया है।
 
विश्लेषकों ने कहा कि तिरोडकर की वापसी की योजना काफी हद तक जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर के मूल्यांकन पर निर्भर करती है जिसका बाजार पूंजीकरण मंगलवार को 668 करोड़ रुपये था। इसी साल अप्रैल में श्रेयी और टाटा टेलीसर्विसेज ने 7,500 करोड़ रुपये के सौदे के तहत व्योम नेटवक्र्स में अपनी 49 फीसदी हिस्सेदारी बेची थी। व्योम के पास देशभर में करीब 42,200 वायरलेस दूरसंचार टॉवर हैं जबकि टीवीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर के पास 27,000 टावर।
 
जीटीएल समूह के चेयरमैन तिरोडकर ने मंगलवार को कहा, 'हम जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर-चेन्नई नेटवर्क के 1,500 करोड़ रुपये के एबिटा के 8 से 10 गुना अधिक रकम पर बिक्री कर सकते हैं। लेकिन कोई भी निवेशक सबसे पहले साफ सुथरा बहीखाता और ऋण की स्पष्टï स्थिति पर गौर करता है। इसलिए हम अपने सभी लंबित मुद्दों को निपटा रहे हैं और जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर व सीएनआईएल का विलय पूरा होते ही हिस्सेदारी बिक्री की उम्मीद करते हैं।' सोमवार को कंपनी ने ऋण को इक्विटी में बदलने की घोषणा की है।
 
मार्च 2015 के अनुसार, जीटीएल और सीएनआईएल का एबिटा 1,500 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2जी लाइसेंस रद्द किए जाने, 3जी व ब्रॉडबैंड की सुस्त रफ्तार और दूरसंचार कंपनियों के खर्च में कटौती के कारण उसका कारोबार प्रभावित हुआ। तिरोडकर ने 2010 में 8,100 करोड़ रुपये के नकद सौदे के तहत एयरसेल से चेन्नई नेटवर्क का अधिग्रहण किया था। लेकिन ऋण के जरिये किए गए इस लेनदेन से जल्द ही कंपनी की नकदी प्रवाह प्रभावित हो गई। बीएसई के आंकड़ों के अनुसार, जीटीएल लिमिटेड और जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर का एकल ऋण बोझ इस साल मार्च तक 6,600 करोड़ रुपये था।
Keyword: telecom, spectrum, network, call drop,,
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