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स्मार्टफोन बाजार में चीनी फोनों की गुंजार
मौलिश्री श्रीवास्तव /  September 13, 2016

पिछले दो सालों में देश के स्मार्टफोन बाजार में चीन के ब्रांडों की भरमार हो गई है। श्याओमी, वनप्लस, विवो, ओप्पो, जियोनी और लीइको जैसे चाइनीज ब्रांडों ने कम कीमत पर स्मार्टफोनों की पेशकश कर देश में अपने ब्रांडों का दबदबा बढ़ाया है। कुछ ने ऑनलाइन लॉन्च की रणनीति अपनाई तो कुछ ने फैन क्लब और प्रतियोगिताओं की शुरुआत की। कुछ ने बड़े इवेंट मसलन इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के साथ जुडऩे का फैसला किया और डाटा आधारित ऑनलाइन प्रचार पर जोर दिया ताकि उनके ब्रांडों को लेकर चर्चा शुरू हो सके। जाहिर है, इन कोशिशों के नतीजे अच्छे रहे। वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में देश में आने वाले स्मार्टफोन के लिहाज से चीन के फोन ब्रांडों में 80 फीसदी की तेजी देखी गई। काउंटरप्वाइंट रिसर्च के मुताबिक बाजार में इन ब्रांडों की हिस्सेदारी पहले से ही 27 फीसदी है और महज चार ब्रांडों (लीइको, ओप्पो, श्याओमी और विवो) की भारतीय स्मार्टफोन बाजार में हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी है। 

 
भारत इस वक्त दुनिया में सबसे तेजी से वृद्धि करने वाला स्मार्टफोन बाजार है और इसलिए यह कोई हैरानी की बात नहीं कि चीन की स्मार्टफोन कंपनियां इस बाजार में दबदबा बनाने की होड़ में जुटी हैं। लेकिन इसके लिए बजट सीमा के भीतर ही लक्षित ग्राहकों को मोबाइल बेचना एक बड़ी चुनौती है। खासतौर पर तब जब सैमसंग और ऐपल जैसे वैश्विक ब्रांडों की मौजूदगी को देखते हुए इस क्षेत्र में मार्केटिंग बजट काफी ज्यादा है।
 
श्याओमी ने एक ईमेल जवाब में कहा, 'हम विज्ञापन या पेड मार्केटिंग पर ज्यादा खर्च करने में यकीन नहीं करते हैं। हमारा जोर वफादार प्रशंसकों पर है।' श्याओमी ने सोशल मीडिया के जरिये अपनी मार्केटिंग की पहल शुरू की जिससे उसे लोकप्रियता मिली। उसने इस साल जून में देश में मी कम्युनिटी नाम से एक ऑनलाइन फैन क्लब शुरू किया जो श्याओमी के मुताबिक उसका एक 'सीक्रेट सॉस' है। 
 
वर्ष 2011 में चाइनीज ग्राहकों के लिए इसे शुरू किया गया था जिससे कि वे अपने विचार और प्रतिक्रिया कंपनी के साथ साझा कर सकें और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के साथ ही ऑफलाइन इवेंट से जुड़ें और फैन क्लब में सामिल हों। भारत में मी सामुदायिक प्लेटफॉर्म शुरू होने के चार दिनों के भीतर ही उसे 19,000 पंजीकृत यूजर मिल गए। चीन के बाहर सिंगापुर एकमात्र ऐसा देश है जहां ऐसा एक क्लब पिछले साल शुरू किया गया। 
 
देश में डिजिटल रणनीति का इस्तेमाल करने वाले दूसरे ब्रांडों में वन प्लस भी है। साइबर मीडिया रिसर्च के आंकड़े के मुताबिक  पिछले साल यह देश में पांचवां सबसे बड़ा प्रीमियम ब्रांड बन गया। वनप्लस इंडिया के महाप्रबंधक विकास अग्रवाल कहते हैं, 'कोई भी रणनीति भावनात्मक और निजी अनुभवों पर आधारित होती है ताकि उपभोक्ताओं को यह महसूस हो कि वे सक्रियता से ब्रांड के साथ जुड़ रहे हैं।' उनका मानना है कि लंबी अवधि में डिजिटल माध्यम से बिक्री और ब्रांड के प्रति उपभोक्ताओं की वफादारी बढऩे की संभावना है। वनप्लस के बारे में लोगों ने ही एक-दूसरे को बताया और यह लोकप्रिय हुआ।
 
ब्रांड का मानना है कि ग्राहक अब इस फोन से अच्छी तरह वाकिफ हैं। ऐसे में शुरुआती ब्रांडिंग कोशिशों की वजह से ऑनलाइन माध्यम पर ज्यादा चर्चा हुई। अब इसके विज्ञापन अभियान में लघु हास्य फिल्मों का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि युवा इससे जुड़ें। ये फिल्में केवल ऑनलाइन ही रिलीज की जाएंगी। कंपनी ने हाल में एक कंटेंट कंपनी, ईस्ट इंडिया कॉमेडी (ईआईसी) के साथ गठजोड़ किया है ताकि ब्रांड का संदेश देने के लिए पांच हिस्से वाली एक कॉमिक वेब सीरीज शुरू की जा सके। 
 
अग्रवाल कहते हैं, 'हमारा मकसद अच्छे कंटेंट के जरिये लक्षित समूह के साथ जुडऩे का था।' सैपिएंटनिट्रो इंडिया के चीफ क्रिएटिव ऑफिसर के वी श्रीधर का कहना है, 'सभी स्मार्टफोन ब्रांड नई पीढ़ी के उपभोक्ताओं के साथ जुडऩे के लिए बेहतर सामग्री तैयार कर रहे हैं क्योंकि युवा आजकल टीवी नहीं देखते हैं।' चीन के स्मार्टफोन ब्रांडों के निशाने पर युवा उपभोक्ता हैं जो बजट को लेकर काफी सतर्कता बरतते हैं, चाहे वे महानगर हों या छोटे शहरों के युवा उपभोक्ता। श्रीधर का मानना है कि इसी वजह से ब्रांडिंग के लिए उनका पूरा सोशल मीडिया पर है। ओप्पो, विवो और लीइको जैसी कंपनियों ने माकेर्टिंग और ब्रांडिंग के लिए कई माध्यमों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है लेकिन उनका पूरा जोर सोशल मीडिया पर ही रहने वाला है। ओप्पो और विवो क्रिकेट के साथ जुड़े हैं और क्रिकेट सभी आमदनी और उम्र वर्ग के साथ जुड़ा खेल है। दोनों ही ब्रांड डिजिटल अभियान का इस्तेमाल अपने ऑफलाइन गठजोड़ के लिए कर रहे हैं। 
 
मिसाल के तौर पर ओप्पो ने एक सेल्फी अभियान शुरू किया जिसमें दर्शकों को फेसबुक और ट्विटर पर सेल्फी अपलोड करने का मौका मिला ताकि वे मैच के टिकट जीत सकें। ओप्पो इंडिया के अध्यक्ष स्काई ली कहते हैं, 'हमने युवा उपभोक्ताओं को जोडऩे पर जोर दिया है और हमारा मार्केटिंग अभियान भी इन्हीं लक्षित मंचों पर आधारित है।' लीइको ने इस साल जनवरी में भारत में अपनी शुरुआत से पहले ही सोशल मीडिया मंच के जरिये उपभोक्ताओं की दिलचस्पी बढ़ानी शुरू कर दी थी। कंपनी का कहना है कि उसने फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर भी प्रचार अभियान छेड़ा। कंपनी डिजिटल मीडिया पर उपभोक्ताओं को जोडऩे के लिए अपने लॉन्च इवेंट और सेल के लिए हैशटैग का इस्तेमालकरती है। 
 
लीइको इंडिया के मुख्य परिचालन अधिकारी (स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार) अतुल जैन कहते हैं कि कंपनी ने अपने फेसबुक पन्ने पर एक 'शॉप' सेक्शन बनाया है जहां यूजर सभी उपलब्ध उत्पाद देख सकते हैं और खरीदारी के लिए ई-कॉमर्स वेबसाइट पर पहुंच सकते हैं। विवो ने देश में 2014 में कदम रखा। उसने ऑफलाइन माध्यमों के जरिये मसलन खुदरा स्टोरों में भी फोन बेचने की शुरुआत की। लेकिन आखिरकार उसने भी ऑनलाइन अभियान के साथ प्रयोग शुरू कर दिया। विवो इंडिया के मुख्य मार्केटिंग अधिकारी विवेक झांग कहते हैं, 'हमारा मानना है कि युवा ही देश में स्मार्टफोन उद्योग की वृद्धि में योगदान देंगे।'
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