बिजनेस स्टैंडर्ड - तकनीकी बदलाव से मेलजोल जरूरी
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तकनीकी बदलाव से मेलजोल जरूरी
अजय शाह /  August 24, 2016

तकनीकी बदलावों से भयभीत होने के बजाय जरूरी यह है कि हम बाजार के दुरुपयोग से निपटने की क्षमता विकसित करें। विस्तार से जानकारी दे रहे हैं अजय शाह 

 
कंप्यूटर प्रौद्योगिकी वित्तीय ट्रेडिंग को बहुत गहराई से बदल रही है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को इस नए माहौल में काम करने के लिए नए तरीके तलाश करने होंगे। बदलाव लोगों को थोड़ा परेशान जरूर करते हैं लेकिन इसके अनुभवजनित प्रमाण अच्छे हैं। इस पर विचार करने के दो उपयोगी तरीके मौजूद हैं। पहला तत्त्व है प्रौद्योगिकी का अपरिहार्य संचालन जो समय-समय पर सभी उद्योगों को प्रभावित करता है। दूसरा तत्त्व यह है कि एल्गोरिथम ट्रेडिंग यानी स्वचालित ट्रेडिंग से संबंधित आंकड़े एक खास तरह के कारोबारियों के बारे में कुछ बताते हैं जबकि पहले इनके व्यवहार का अलग आकलन संभव नहीं था। 
 
पुराने दिनों में लोग एक दूसरे से बातचीत करके कारोबार किया करते थे। इसके बाद हमने कंप्यूटर स्क्रीन और टाइपिंग का सहारा लिया। अभी भी कुछ ट्रेडिंग इस तरीके से की जाती है, हालांकि इसका अधिकांश हिस्सा अब एल्गोरिथम ट्रेडिंग में बदल चुका है। यहां पर एक व्यक्ति किसी कंप्यूटरीकृत क्लर्क को निर्देश देता है कि कीमतों पर किस प्रकार नजर रखनी है और कैसे कारोबार करना है। हर व्यक्ति ऐसे ढेर सारे कंप्यूटरीकृत क्लर्कों पर नजर रखता है। अधिकांश वित्तीय बाजारों में 60 से 90 प्रतिशत ट्रेडिंग अब मनुष्य और मशीन की साझेदारी में की जाती है। 
 
इन कंप्यूटराइज क्लर्कों के आगमन से विश्वसनीयता बढ़ी है और गति तेज हुई है। इसके चलते लागत में भी कमी आई है। कंप्यूटरीकृत क्लर्क तय किए गए मूल्य तक नजर रखते हैं और शेयर के दाम एक निश्चित दायरे से कम होने पर तत्काल खरीद का आदेश देते हैं। यह काम बहुत भरोसेमंद तरीके से और तीव्र गति से किया जाता है जबकि किसी मनुष्य के बारे में यह दावा नहीं किया जा सकता है। हमारे देश में लागत का मसला खास तौर पर महत्त्वपूर्ण है। 
 
मनुष्य की मदद से किया जाने वाला कारोबार महंगा पड़ता है। वेतन की लागत को सही ठहराने के लिए ऐसे कारोबारी को उच्च टर्नओवर पर ध्यान केंद्रित करना होता है। छोटे शेयरों की बात करें तो प्रति घंटा कारोबारियों की संख्या वेतन को सही नहीं ठहरा पाती। एल्गोरिथम ट्रेडिंग में एक व्यक्ति कई कंप्यूटराइज्ड क्लर्कों पर नजर रख सकता है और उनको नियंत्रित कर सकता है। 
 
विभिन्न एक्सचेंज पर ऑर्डर मिलाने का काम वित्तीय बाजारों में ट्रेडिंग का अहम काम है। अब ऐसा केवल शेयर बाजार में ही नहीं हो रहा है बल्कि मुद्रा बाजार, बॉन्ड बाजार, जिंस बाजार आदि में भी यह चलन में है। इन सभी परिसंपत्ति वर्ग का कारोबार इलेक्ट्रॉनिक एक्सचेंज और एल्गोरिथम ट्रेडिंग के जरिये हो रहा है। निश्चित रूप से एल्गोरिथम ट्रेडिंग के चलते इलेक्ट्रॉनिक एक्सचेंज काफी अहम हो चले हैं। बॉन्ड और मुद्रा कारोबार को भी इस श्रेणी में रखा जा सकता है क्योंकि वहां भी काफी कुछ इन्हीं फॉर्मूलों पर आधारित है। यही वजह है कि एल्गोरिथम ट्रेडिंग क्रांति ने न केवल शेयर बाजार को बल्कि सभी वित्तीय बाजारों को प्रभावित किया है।
 
इन बातों की वित्तीय बाजार नियमन के लिए काफी अहमियत है। नियमन का सबसे अहम काम है बाजार के दुरुपयोग को रोकना। सामान्य तौर पर होने वाली ट्रेडिंग में बाजार के दुरुपयोग को रोकने के सीमित तौर तरीके मौजूद थे। एल्गोरिथम ट्रेडिंग के लिए इनमें बहुत हद तक बदलाव करने पड़े। इसलिए क्योंकि यहां ऑर्डर और कारोबार का स्वरूप बहुत विशालकाय है। यहां पल भर में काफी कुछ हेरफेर हो सकता है। सेबी को इन नई चुनौतियों से निपटने के लिए नए तरह के संसाधन तैयार करने होंगे। 
 
तमाम नए तकनीकी विकास की ही तरह यहां भी नफा और नुकसान दोनों संभव हैं। पुरानी शैली की ट्रेडिंग से जुड़ी फर्म और उनसे जुड़े लोगों को नई तकनीक ने बेदखल कर दिया है। जाहिर है इससे उन लोगों के मन में निराशा पैदा हुई है जिनकी आमदनी का स्रोत चला गया। ऐसी तकनीकी हलचल हर उद्योग में देखने को मिलती है। नियमन वाले उद्योगों में इसके चलते मांग उठती है कि नियामक बदलाव को रोके। 
 
एल्गोरिथम ट्रेडिंग की एक अहम आलोचना इस डर से निकली है कि अफरातफरी की स्थिति में यह पीछे हट जाती है। यकीनन ऐसा होता है। इसके सबूत मौजूद हैं। इस आधार पर दावा किया जाता है कि एल्गोरिथम ट्रेडिंग बाजार में नकदी की स्थिति के यूं अचानक संकटग्रस्त होने की परिस्थिति निर्मित करते हैं क्योंकि ऐसे कारोबारी अनिश्चितता और अस्थिरता से घबरा जाते हैं।
 
अहम बात यह है अल्पावधि की सटोरिया गतिविधियां या बाजार बनाने की नीतियां हमेशा मौजूद रही हैं। बदला सिर्फ यह है कि अब वे ट्रेडिंग करने वाले व्यक्ति की जगह उस व्यक्ति तक आ गई हैं जो कंप्यूटरों को नियंत्रित करता है। नए तकनीकी दौर में हम कंप्यूटरीककृत क्लर्कों की गतिविधियों को पहचान लेते हैं जबकि पुराने समय में ऐसे कारोबार करने वाले आसानी से चिह्निïत नहीं होते थे। अल्पावधि में काम करने वाले कई सटोरिये अस्थिरता बढऩे पर बाजार छोड़ देते हैं। ऐसे व्यवहार में कुछ भी नया नहीं है।
 
इन प्रश्नों ने अकादमिक अर्थशास्त्रियों को खूब आकर्षित किया है। इस बात के पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं कि एल्गोरिथम ट्रेडिंग काफी हद तक सकारात्मक है। निधि अग्रवाल और सुजान थॉमस ने एनएसई के बारे में जो शोध किया है वह बताता है कि एल्गोरिथम ट्रेडिंग की बदौलत नकदी की स्थिति मजबूत होती है। अस्थिरता कम होती है और कीमत या नकदी में तेज गिरावट की घटनाएं कम हो जाती हैं। 
 
सेबी ने कई संभावित हस्तक्षेपों से लैस एक परिचर्चा पत्र पेश किया है जो इस कारोबार में हस्तक्षेप करेगा। बहरहाल ऐसा करने के पहले सेबी को यह स्पष्टï करना होगा कि इस व्यवस्था में क्या गड़बड़ी है? एनएसई में एल्गोरिथम कारोबार को लेकर कोई विशिष्टï जानकारी सामने नहीं है। ऐसे में हस्तक्षेप करने या उसका विश्लेषण करने की कोई वजह नहीं। सेबी के लिए जरूरी है कि वह इस कारोबार में हस्तक्षेप करने के बजाय बाजार का दुरुपयोग रोकने का प्रयास करे। इस दौरान उसे बाजार नियमों के उल्लंघन को श्रेणीबद्घ करना चाहिए और एल्गोरिथम ट्रेडिंग में होने वाली गड़बडिय़ों की जांच की व्यवस्था करनी चाहिए। चार-चार एक्सचेंज की मौजूदगी में यह काम आसान नहीं है। इस कारोबार ने वैश्विक वित्तीय बाजार को काफी हद तक बदल दिया है। इसकी वजह से हर परिसंपत्ति वर्ग में इलेक्ट्रॉनिक एक्सचेंज सामने आ रहे हैं और समय के साथ ये जरूरी क्षमताएं भी हासिल करेंगे। एक तबका है जो तकनीकी बदलाव का विरोध करता है। ऐसे में इसे लेकर शोधपरक अंतदृष्टिï हासिल करना और बाजार के दुरुपयोग को रोकने के तरीके खोजना कहीं अधिक आवश्यक है।
Keyword: computer, technical,,
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