बिजनेस स?टैंडर?ड - जल संकट की ओर बढ़ रहा गुजरात
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जल संकट की ओर बढ़ रहा गुजरात
विमुक्त दवे / अहमदाबाद 08 16, 2016

भारी बारिश के बावजूद राज्य के ज्यादातर जलाशयों में पानी कम

बिजनेस स?टैंडर?ड जल संकट की ओर बढ़ रहा गुजरातपाटीदार और दलित आंदोलन के बाद अब गुजरात सरकार के सामने एक और बड़ी चुनौती आने वाली है। इस साल अगस्त महीने में राज्य में मध्यम और भारी बारिश हुई, लेकिन इसके बावजूद राज्य के ज्यादातर जलाशयों में पानी कम है। इसका इस्तेमाल पेयजल के रूप में होता है। खासकर उत्तरी गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ इलाकों में जलाशयों में पानी कम है।

जलापूर्ति विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 203 जलाशयोंं में से 136 जलाशयों में 50 प्रतिशत से कम पानी है और इनमें से 60 जलाशय सिर्फ 10 प्रतिशत ही भरे हैं। अगर राज्य में अगले डेढ़ महीने में अच्छी बारिश नहीं होती है तो सरकार को गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ेगा। अगले साल होने वाले विधान सभा चुनाव को देखते हुए राज्य के नए मुख्यमंत्री विजय रूपानी के समक्ष यह सबसे बड़ी चुनौती होगी।

गुजरात के ज्यादातर हिस्से में नर्मदा ही पेयजल के लिए जीवनरेखा है। राजकोट, भावनगर, पोरबंदर, जामनगर, कच्छ और बनासकांठा इस समय भी पेयजल के संकट से जूझ रहे हैं और यहां घरेलू इस्तेमाल की जरूरतों का आधा ही जलापूर्ति हो रही है। अगर जल संकट आने वाले दिनों में बढ़ता है तो गुजरात सरकार नर्मदा बांध से जलापूर्ति करने की योजना बना रही है, इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है।

गुजरात के जलापूर्ति राज्य मंत्री जाशा बाराड ने कहा कि हमें इस साल बेहतर मॉनसून की उम्मीद है, अभी स्थिति नियंत्रण में है, लेकि न अगर पानी के संकट की स्थिति गंभीर होती है तो हम नर्मदा से घरेलू इस्तेमाल के लिए जलापूर्ति करेंगे। जलापूर्ति विभाग के मुताबिक करीब 11,000 गांव पेयजल पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से नर्मदा से जुड़े हुए हैं, जिनमें ज्यादातर सौराष्ट्र क्षेत्र में हैं। हालांकि गुजरात कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया, 'इस समय खरीफ सत्र के लिए पानी की कोई कमी नहीं है। अगर आगे मॉनसून बेहतर नहीं रहा तो अगले जाड़े और गर्मी के मौसम में समस्या आ सकती है।'

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